पंजाब में सुर्खियों में आने के साथ ही गोवा में कांग्रेस की धूम

फलेरियो कांग्रेस

PC: Tribune India

एक दल को संचालित करने में तीन चीजों की भूमिका प्रमुख होती है। प्रथम-नेतृत्व,द्वितीय-सिद्धान्त, तृतीय- काडर और कार्यकर्ता। देश की सबसे पुरानी पार्टी के ये तीनों स्तम्भ ध्वस्त हो चुके हैं। नेतृत्व निर्बलता ने आलाकमान को ध्वस्त कर दिया और निरंकुश और लोभी कार्यकर्ताओं ने सिद्धान्त को ध्वस्त कर दिया। अब सत्ता ही एकमात्र सिद्धान्त है चाहे उसके लिए किसी सिद्धान्त से समझौता करना पड़े। सिद्धांतों का चीरहरण और राजनीतिक विकृतिकरण और आलाकमान को दंडवत होते हमनें पंजाब में तो देख लिया, अब गोवा में भी यही हो रहा है। दरअसल, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्य कांग्रेस अध्यक्ष लुईजिन्हो फलेरियो मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के प्राथमिक सदस्य और गोवा विधानसभा के सदस्य के रूप में इस्तीफा देने के एक दिन बाद कोलकाता के लिए रवाना हो गए। फलेरियो के बुधवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है।

फलेरियो ने सोमवार को अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा की वह “निश्चित रूप से ममता कांग्रेस का समर्थन करेंगे।” मंगलवार को फलेरियो अपने कुछ वफादारों के साथ कोलकाता के लिए रवाना हुए जिन्होंने फलेरियो के साथ कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। उनकी कोलकाता यात्रा पर उनके साथ गोवा कांग्रेस के पूर्व महासचिव यतीश नाइक, विजय पाई, सचिव मारियानो पिंटो, एमजीपी के पूर्व विधायक लवू ममलेदार, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता शिवदास नाइक और राजेंद्र काकोडकर और अन्य थे। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी की मौजूदगी में बुधवार को उनके तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की उम्मीद है।

फलेरियो क्यों नाराज़ थे?

मामले से वाकिफ लोगों के मुताबिक, गिरीश चोडनकर को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने देने को लेकर उनके विरोध को नजरअंदाज करने के लिए फलेरियो कांग्रेस नेतृत्व से खफा थे। उनके एक करीबी नेता ने कहा कि फलेरियो को आगामी राज्य चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की राज्य इकाई का नेतृत्व करने की उम्मीद है।

कांग्रेस की स्थिति

दक्षिण गोवा के नवेलिम से कांग्रेस के सात बार विधायक रहे फलेरियो 2017 के बाद से पार्टी छोड़ने वाले 13वें विधायक हैं। कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। 40 विधानसभा सीटों में से 17 पर जीत हासिल की थी। अब केवल चार विधायक रह गए हैं। ऊपर से राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए छह महीने का समय है। यहां तक ​​​​कि शेष चार विधायको में भी मतभेद  हैं। उनमें से तीन – प्रताप सिंह राणे, रवि नाइक, और एलेक्सो रेजिनाल्ड लौरेंको को गोवा कांग्रेस नेतृत्व से मोहभंग हो चुका  है। उनमें से भी दो विधायक राणे और नाइक के बेटे भाजपा के सदस्य हैं। कांग्रेस के असंतुष्ट पदाधिकारी चौथे विधायक और विपक्ष के नेता दिगंबर कामत को गोवा कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडनकर के साथ के साथ मिलकर राज्य में वरिष्ठ कांग्रेसियों को दरकिनार कर दिया है।

कांग्रेस की लीपापोती

कांग्रेस शुरू में फलेरियो के इस कदम से अचंभित थी, परंतु, अब कांग्रेस ने फलेरियो के जाने-माने वफादारों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। गोवा के प्रभारी दिनेश गुंडू राव ने पणजी के पूर्व महापौर सुरेंद्र फर्टाडो और पूर्व विधायक एग्नेलो फर्नांडीस से मुलाकात की, जिन्हें दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से मिलने के लिए कहा गया है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक एवर्टानो फर्टाडो को भी कांग्रेस में शामिल किया। कांग्रेस के प्रतिस्थापन एवर्टानो फर्टाडो 2017 के विधानसभा चुनावों में फलेरियो से हार गए। कांग्रेस ने लुईजिन्हो फलेरियो के जाने से पार्टी को होने वाले नुकसान को दरकिनार करते हुए कहा कि फलेरियो ने एक ‘सेवानिवृत्ति पैकेज’ का विकल्प चुना। कांग्रेस ने कहा कि उनका जाना पार्टी के लिए लाभदायक होगा।

निष्कर्ष

अगर कांग्रेस को स्वयं का अस्तित्व बचाना है तो नेतृत्व परिवर्तन करना अनिवार्य है। नेतृत्व कमजोर हो तो दल में बिखराव अवश्यंभावी है। पार्टी को अपने छद्म और अवसरवादी सिद्धांतों को समाप्त कर नैतिकता की राजनीति करनी चाहिए। इससे कार्यकर्ताओं और जनता का भरोसा मजबूत होगा। अन्यथा, पंजाब, गोवा कल राजस्थान भी हो सकता है। भाजपा विरोधी दल होने के नाते इसको प्राकृतिक रूप से अवसर में देखेगी जैसे फलेरियो के मामले में ममता नें देखा।

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