Biden ने किया भारत के NSG में शामिल होने और UNSC के स्थाई सदस्य बनने का समर्थन

PC: NDTV.com

वैश्विक स्तर पर भारत की ताकत को स्वीकृति मिलने लगी है, इसकी एक बड़ी वज़ह ये भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीति से अपने विरोधियों को भी पक्ष में शामिल करने की कुटिलता दिखाई है। संभवतः यही कारण है कि जो अमेरिका पहले भारत पर परमाणु परीक्षण करने के लिए एमबारगो जैसे प्रतिबंध लगा देता था, वो ही अमेरिका अब न्यूक्लियर संबंधी ग्रुप में भारत को शामिल करने के साथ ही उसे संंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सीट दिलाने के लिए प्रतिबद्धता दिखाने की बातें कर रहा है। ये दोनों ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से लेकर डॉनल्ड ट्रंप तक खुलकर कुछ भी बोलने से बचते थे, किंतु पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की ताकत के विस्तार को समझते हुए अब अमेरिका भारत को सर्वाधिक महत्व देने है।

सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिकी यात्रा पर हैं, और वहां क्वाड के नेताओं की बात करें तो मोदी जापानी पीएम योशिहिदे सुगा और आस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से भी मिले हैं। बाइडन से पीएम मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात काफी महत्वपूर्ण रही है, जिसमें भारत के प्रति बाइडन का सकारात्मक रुख़ सामने आया है, जिसका संकेत दोनों देशों की बैठक के बाद साझा बयान में भी दिखा। इस बयान में भारत की सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट के संबंध में कहा गया, “इस परिप्रेक्ष्य में, राष्ट्रपति बाइडन ने सुधारों से युक्त संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता तथा उन अन्य देशों के लिए अमेरिका का समर्थन दोहराया, जो बहुपक्षीय सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की आकांक्षा रखते हैं।”

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NSG में शामिल हो भारत

जो बाइडन का भारत के प्रति सकारात्मक रुख केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सीट को लेकर ही नहीं रहा है, अपितु वो भारत को न्यूक्लियर आपूर्तिकर्ताओं के वैश्विक समूह में भी शामिल करने के लिए आतुर हैं, और अमेरिका ने पहली बार खुलकर इस संबंध में भारत का पक्ष लिया है। साझा बयान में कहा गया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी बैठक के दौरान राष्ट्रपति जो बाइडन ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश के प्रति भी अमेरिका का समर्थन दोहराया है।” इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि बाइडन पीएम मोदी के व्यक्तित्व से अत्यधिक प्रभावित हुए हैं। इसको लेकर कहा गया, “राष्ट्रपति बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी बैठक के दौरान अगस्त 2021 में सुरक्षा परिषद की नई दिल्ली द्वारा की गई अध्यक्षता के दौरान भारत के ‘‘मजबूत नेतृत्व’’ की सराहना की।”

बदल गए अमेरिका के सुर

ये मान जा रहा था, कि पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के चुनाव हारने के बाद आतंकवाद के विरुद्ध भारत के साथ अमेरिका कटिबद्धता से खड़ा नहीं दिखेगा, लेकिन अब ये सारा मुद्दा हवा हो गया है। पीएम मोदी को इस कूटनीति का श्रेय दिया जा रहा है, संभवतः यही कारण है पाकिस्तान के प्रति नर्म रुख़ रखने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी से संबंधित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस तक ये स्वीकारने लगी हैं कि पाकिस्तान में आतंकवाद का पालन पोषण होता है। डेमोक्रेट्स को लेकर सभी के मन में शंका थी, लेकिन आज भारत की वैश्विक स्तर पर ये हनक ही है कि भारत पर परमाणु परीक्षण के लिए प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिका परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल करने को आतुर है। यद्यपि इससे पहले अमेरिका ने इतनी अधिक कटिबद्धता भारत के प्रति कभी नहीं दिखाई थी।

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पीएम मोदी ने नहीं दिया भाव

एक खास बात ये भी है कि पीएम मोदी ने जो बाइडन के डेमोक्रेटिक इतिहास को जानते हुए उन्हें ज्यादा भाव ही नहीं दिया है। इसी का नतीजा था कि ट्रंप शासन के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच जो गर्मजोशी दिखती थी, वो हवा हो गई है। पीएम मोदी ने तो गले मिलने को आतुर बाइडन को ही झटका देते हुए उन्हें रुकने का संकेत दे दिया था, जो इस बात का पर्याय है, कि पीएम मोदी जो बाइडन को ज्यादा तवज्जो नहीं देने वाले हैं, जो कि एक संप्रभु राष्ट्र के नेता की गरिमा के लिए एक विशिष्टता का परिचायक भी है।

पीएम मोदी की इस अमेरिका यात्रा को लेकर अगर ये कहा जाए कि मोदी से प्रभावित होकर भारत के क़रीब आने को बाइडन उत्साहित थे, तो संभवतः गलत नहीं होगा, क्योंकि बाइडन लगातार भारत के हक की बात कर रहे थे, और पीएम मोदी कूटनीतिक तौर से इतर बाइडन के प्रति उदासीन ही थे।

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