जिनपिंग का Gaming पर शिकंजा चीन की ई-गेमिंग इंडस्ट्री को नॉकआउट कर देगा, भारत को मिलेगी बढ़त

चीन की गेमिंग इंडस्ट्री

PC: News18

चीन ने अपनी गेमिंग इंडस्ट्री को बड़ा झटका देते हुए E-स्पोर्ट्स खेलने पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। चीनी सरकार ने निर्णय लिया है कि 18 वर्ष या उससे कम आयु के लोगों को सप्ताह में 3 घंटे ही ऑनलाइन गेमिंग खेलने की छूट होगी। यह छूट शुक्रवार, शनिवार और रविवार को शाम 8:00 बजे से 9 बजे तक 1 घंटे के लिए होगी। अब चीनी सरकार के इस निर्णय से चीन की गेमिंग इंडस्ट्री का बुरी तरह प्रभावित होना यत तय है, ऐसे में चीन की गेमिंग इंडस्ट्री को होने वाला नुकसान भारतीय गेमिंग इंडस्ट्री के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

पीपुल्स डेली की रिपोर्ट के अनुसार चीन में E-स्पोर्ट्स का मार्केट बहुत बड़ा है, जिसके 400 मिलियन से अधिक प्रशंसक और दर्शक हैं। 2020 में चीन का ऑनलाइन गेमिंग मार्केट रेवेन्यू 29.2 billion-dollar था। इसके और बढ़ने की संभावनायें थी, किंतु अब चीनी सरकार के प्रतिबंध के बाद इस पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

वहीं भारत की बात करें तो लॉकडाउन के बाद से भारत का गेमिंग मार्केट बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग यूजर 2020 में 80 मिलियन से बढ़कर 2023 तक 150 मिलियन होने की उम्मीद है। भारत में 2014 से 2020 के बीच गेमिंग मार्केट की ग्रोथ रेट 21%  देखने को मिली और 2020 के बाद हर साल 41% ग्रोथ होने की संभावना जताई गई है। आने वाले समय में भारतीय गेमिंग उद्योग  का अनुमान 3.8 बिलियन डॉलर लगाया गया है, जो भारत को सबसे बड़ा इंटरनेट गेमिंग उद्योग बनाने में बड़ी भूमिका निभायेगा। इसके अलावा 2020 में भारतीय ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर $1.027 बिलियन तक पहुंच गया था, 2016 में $ 543 मिलियन से 17.3% की वृद्धि हुई है। तब 2023 तक इसके 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी जो अब शायद चीन के हालिया कदम से और जल्द पहंच जायेगा।

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वर्तमान समय में भारत में 500 मिलियन स्मार्टफोन यूजर हैं। भारत सरकार स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में एक अनुमान के अनुसार यह संख्या 2025 तक बढ़कर 900 मिलियन हो जाएगी। जैसे-जैसे स्मार्टफोन प्रयोग करने वालों की संख्या बढ़ेगी गेमिंग मार्केट का भी उसी तेजी से विस्तार होगा। वर्तमान समय में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि भारत का ऑनलाइन गेमिंग मार्केट 2024 तक 3.8 बिलियन डॉलर का हो जाएगा, लेकिन चीनी सरकार के निर्णय का भारतीय ई-गेमिंग मार्केट को बहुत लाभ होगा।

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यह इस आधार पर कहा जा सकता है कि चीनी सरकार के निर्णय से निवेशकों का चीन के ई-गेमिंग मार्केट में विश्वास कम होगा। ऐसे में भारत निवेश के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आएगा। वर्तमान में भारत चौथा सबसे बड़ा ई गेमिंग मार्केट है, लेकिन यह जल्द ही दूसरे स्थान पर आ सकता है। भारत को आवश्यकता है तो बस अपने यहां ई गेमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने की। भारत को इस इंडस्ट्री को बढ़ाने के लिए एक सरकारी रेगुलेटरी बॉडी बनानी चाहिए जो निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करे, उनकी सहायता करे। आवश्यक लीगल फ्रेमवर्क तैयार होना चाहिए जिससे लोगों का डेटा सुरक्षित रहे और ई गेमिंग कंपनी भी विवादों और कोर्ट से दूर रहे।

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चीन ने अपनी गेमिंग इंडस्ट्री को बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर उसे समर्थन दिया था। यूनिवर्सिटी में E-स्पोर्ट्स से संबंधित कोर्स शुरू किए गए थे, E-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता था। यहां तक कि चीन के प्रभाव के कारण E-स्पोर्ट्स को ओलंपिक में एक खेल के रूप में स्वीकृति देने पर भी विचार हो रहा है। भारत सरकार को भी उतनी ही तन्मयता के साथ यह कार्य करना होगा।

फिलहाल, वर्तमान समय में फ्रेंच ई गेमिंग कंपनी Ubisoft के भारत में दो डेवलपमेंट स्टूडियो हैं। अमेरिकी कंपनी Rockstar बेंगलुरु स्थित भारतीय कंपनी Dhruva Interactive के साथ काम करना शुरू किया था। आवश्यकता है कि भारतीय निवेशक भी इस क्षेत्र में निवेश करें, ई गेमिंग से जुड़े स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाए। FDI आकर्षित करने के लिए एक सुव्यवस्थित चैनल बनाया जाए और ई गेमिंग डेवलपमेंट से जुड़े इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए जाएं।

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