निर्मला सीतारमण का प्रदर्शन वित्त मंत्री के तौर पर गर्व करने योग्य है

कोराना महामारी के बीच आर्थिक वृद्धि में इनका योगदान अतुलनीय है!

भारत आर्थिक विकास

PC: World Finance

दुनिया भर ने कोविड महामारी के विकराल रूप को देखा है। पहली और दूसरी लहर ने विश्व पर ताला लगा दिया था। दुनिया में आवागमन, यातायात, व्यापार सब ठप हो गए थे। भारत जैसे देश में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन हमारे देश के बहादुर डॉक्टरों ने हमारे देश को भयावह महामारी से बचा लिया। बहुत नुकसान हुआ लेकिन ऐसे देश में जहां स्वास्थ ढाँचा कमजोर रहा है, लोग अनुशासित नहीं है वहां मौत के आंकड़ो का अंदाजा लगाना भी बहुत कठिन था। महामारी के दौरान सबसे ज्यादा चिंता हमारे अर्थव्यवस्था की थी। भारत एक विकासशील देश है, यहां पर आर्थिक विकास धीरे धीरे हो रहा है। ऐसे में जब कोविड के चलते अर्थव्यवस्था पर ताला लगा तो दुनिया भर में आशंकाओं की बाढ़ आनी शुरू हो गई। अधिकतर लोगों ने ऐसा माना कि जितने लोग कोविड से नहीं मरेंगे, उससे ज्यादा भूख से मर जायेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और तो और, पहले क्वाटर के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े ने तो सबको आश्चर्य में डाल दिया है।

देश की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 20.1% की रिकार्ड वृद्धि दर्ज की गई है।

आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण समेत विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 49.6%, निर्माण गतिविधियों में 68.3% और व्यापार, होटल तथा संचार समेत सेवा क्षेत्र में 34.3% की वृद्धि हुई है।

आलोच्य तिमाही में कृषि क्षेत्र में शानदार 4.5% की वृद्धि हुई है जबकि इसी तिमाही में पिछले साल 2020-21 में 3.5% की वृद्धि दर्ज की गई थी। कृषि एकमात्र क्षेत्र है जिसमें ‘लॉकडाउन’ के बीच पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि हुई थी।

एनएसओ ने एक बयान में कहा, ‘स्थिर मूल्य (2011-12) पर जीडीपी 2021-22 की पहली तिमाही में 32.38 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो 2020-21 की इसी तिमाही में 26.95 लाख करोड़ रुपये थी। यह 20.1 प्रतिशत वृद्धि है जबकि 2020-21 की पहली तिमाही में उससे पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले 24.4 प्रतिशत की गिरावट आयी थी।’

बता दें कि दूसरी वेव के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था बुरी स्थिति में थी। पहले वाले वेव में अर्थव्यवस्था में बंदी थी, लेकिन दूसरी लहर के दौरान सख्त चेतावनी दी गई थी। बीमार होने वाले लोगों के आंकड़े बढ़ रहे थे लेकिन भारत में आर्थिक विकास के काम रुके नहीं थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उसी समय लघु उद्योग और बड़े उद्योगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए पैकेज की घोषणा भी कर रही थीं। हमारे देश में लोग वैक्सीन खरीदकर शायद ही लगवाते या कम लोग लगवाते और ऐसे लोगों की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान होता। उससे बचने के लिए सरकार ने वैक्सिनेशन को मुफ्त किया और सारा खर्चा खुद उठाया। बेरोजगार मजदूरों को सरकारी परियोजनाओं में काम देकर भी पैसा पहुंचाया गया। नितिन गडकरी के परिवहन मंत्रालय ने भी कोविड के दौरान ताबड़तोड़ काम किया है।

अब जब 20.1% की जीडीपी में बढ़ोतरी हुई है तब यह जरूरी हो गया है कि निर्मला सीतारमण के प्रयासों को सराहा जाए। उनकी नीतियों पर हंसने वाले शायद यह बात भूल गए कि हमारे देश में लोग बीमारी से मरे, कोविड के दौरान कोई भूखा रहकर नहीं मरा। समावेशी विकास की धारणा के साथ राशन पहुंचाया गया था। जरूरी चीजों को घर घर तक दिया गया। जब स्थिति सामान्य हुई तब सरकार ने उद्योगों को जरूरी पैसा देकर मजबूत बनाने का काम किया है। जीडीपी के आंकड़े तो यही बताते हैं कि समावेशी विकास के अवधारणा पर वित्त मंत्रालय जो काम कर रहा है, वो जमीन पर असर कर रहा है।

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