1817 की पाइका क्रांति की कहानी जिसे इतिहासकारों ने दफन किया था, TV सीरीज के रूप में आ रही है

स्टार प्लस का नया शो "विद्रोही" लेकर आया है स्वतंत्रा संग्राम की छुपी हुई कहानी!

पाइका विद्रोह

हमारे इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां पर हमारे वास्तविक नायकों की कथाओं से हमें अनभिज्ञ रखा गया है, जबकि उन लोगों का महिमामंडन किया गया है, जो शायद नायक शब्द के योग्य भी नहीं थे। जिन राक्षसों ने मोपला नरसंहार को अंजाम दिया, उन्हे विद्रोही की उपाधि दी गई, और ओड़ीशा से पाइका समुदाय के जिन वीर योद्धाओं ने क्रांति की रणभेरी का आह्वान किया, उन्हे इतिहास से ऐसे अलग किया गया, जैसे चाय में से मक्खी। परंतु अब इस भूल को सुधारने की दिशा में राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है, और इसी अभियान में योगदान देने आगे आया है स्टार प्लस टीवी चैनल –

 

हाल ही में स्टार प्लास ने अपने आगामी टीवी सीरीज़ का टीज़र निकाला, जिसका शीर्षक है ‘विद्रोही’। ये अँग्रेज़ों के विरुद्ध भारतवासियों के सर्वप्रथम संगठित विद्रोह में से एक की कथा है, जो ओड़ीशा में प्रारंभ हुआ। इसके अंतर्गत पाइका समुदाय के योद्धाओं ने भगवान जगन्नाथ को अपना आराध्य मानते हुए अँग्रेज़ों के विरुद्ध 1817 में विद्रोह किया, और अपने क्षेत्र को कुछ समय के लिए स्वतंत्र भी कराया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से पूर्व ये प्रथम ऐसा सशस्त्र विद्रोह था, जो भारत के किसी भी क्षेत्र में संगठित तौर पर आयोजित किया गया था। अब इसी स्वतंत्रता संग्राम को टीवी की सहायता से देश के कोने-कोने में प्रसारित किया जाएगा।

लेकिन ये पाइका विद्रोह था क्या, और इसे क्यों लड़ा गया? पाइका ओड़ीशा के पारंपरिक योद्धा थे। लेकिन 1803 में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा ओड़ीशा पर प्रभुत्व स्थापित होने के पश्चात पाइका समुदाय की प्रतिष्ठा को चुनौती दी जानी लगी, और उन्हे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अपमानित करने का कोई अवसर हाथ से जाने नहीं देती थी।

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परंतु जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो बक्शी जगबंधु के नेतृत्व में पाइका योद्धाओं ने विद्रोह का नारा बुलंद किया। प्रतीक के चिन्ह के तौर पर पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ को प्रतिबिंब के रूप में चुना गया, और मार्च 1817 में प्रारंभ हुआ विद्रोह जल्द ही सम्पूर्ण उत्कल यानि आधुनिक ओड़ीशा में फैल गया। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को अपनी पराजय स्वीकार नहीं हुई। हालांकि, कटक पर उन्होंने मई 1817 तक पुनः नियंत्रण पा लिया था, परंतु इस विद्रोह को कुचलने में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरा एक वर्ष लग गया। इतना ही नहीं, ये विद्रोह इतना भीषण और इतना संगठित था कि इसे कुचलने के लिए कंपनी के अकेले की सेना पर्याप्त नहीं था, और उन्हे हैदराबाद के तत्कालीन निज़ाम मीर अकबर अली खान की सेना की भी सहायता की आवश्यकता पड़ी –

कुछ वर्षों तक पाइका योद्धा छद्म युद्ध करते रहे, लेकिन अंत में बक्शी जगबंधु के हिरासत में आते ही यह विद्रोह भी समाप्त हो गया, और बक्शी जगबंधु की 1829 में ब्रिटिश कस्टडी में मृत्यु हो गई।

परंतु भारत के इस सशस्त्र विद्रोह के बारे में प्रशंसा करना तो दूर, इसकी चर्चा तक नहीं की जाती। हालांकि अब ऐसा नहीं होगा। जिस प्रकार से स्टार प्लस ने ‘विद्रोही’ नामक सीरीज़ को बढ़ावा दिया है, वो अपने आप में इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जिसके लिए स्टार नेटवर्क की प्रशंसा आवश्यक है।

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