शाह और डोभाल से मिले अमरिंदर, पाक समर्थक सिद्धू की अब खैर नहीं

पाकिस्तान के प्रति सिद्धू का नर्म रुख हमेशा ही कैप्टन को चुभता रहा है!

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भले ही कांग्रेस में रहकर राजनीति की हो, किन्तु वो राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर वो सदैव भारत सरकार के साथ खड़े दिखते हैं। उनकी राष्ट्रभक्ति पर कोई प्रश्न नहीं उठा सकता है। ऐसे में अब जब पंजाब में उन्हें कांग्रेस ने अपमानित कर सीएम पद त्यागने पर मजबूर कर दिया, तो पद छोड़ने के बाद से ही उनके मन में राजनीति से ज्यादा चिंता पाकिस्तान से सीमा साझा करने वाले पंजाब की सुरक्षा की है। पाकिस्तान के प्रति सिद्धू का नर्म रुख हमेशा ही कैप्टन को चुभता रहा है। संभवतः यही कारण है कि कैप्टन ने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की है।

पंजाब को लेकर चिंतित कैप्टन

कैप्टन अमरिंदर सिंह 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना में शामिल थे। यही कारण है कि भले ही वो कांग्रेस में हों किन्तु उनकी राष्ट्रभक्ति पर कोई सवाल नहीं खड़े कर सकता है। कैप्टन ने कांग्रेस आलाकमान द्वारा अपमानित होने के बाद जब अपने सीएम पद से इस्तीफा दिया था, तो पहली प्रेस कॉन्फ्रैंस में ही कहा था कि पार्टी की कमान सिद्धू के हाथ में होगी, तो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कैप्टन ने जो उस दौरान कहा था, अब उस कटिबद्धता भी को वो दिखा भी रहे हैं, क्योंकि पंजाब इस समय दो बड़े खतरों के बीच है, कथित किसान आंदोलन और सीमा पर पाकिस्तान का खतरा।

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पाकिस्तान से खतरा

ये सर्वविदित है कि देश के जिन भी इलाकों से पाकिस्तान की सीमा लगती है, उन सभी इलाकों में पाकिस्तान भारत विरोधी अभियान चलाता रहता है। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी दिक्कत कैप्टन अमरिंदर सिह ही हैं, क्योंकि जब तक अमरिंदर सिंह पंजाब की सत्ता में थे, तब तक उन्होंने राज्य पुलिस और भारतीय सेना के जवानों के साथ एक समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दिखाई थी। कैप्टन ने इन हरकतों को देखते हुए ही हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की थी, और इस दौरान उन्होंने पंजाब की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।

कैप्टन ने मुलाकात के बाद कहा था, “मैं आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मिलता रहता हूं। अब चाहे मैं मुख्यमंत्री नहीं हूं, लेकिन पंजाब तो हमारा है। जो कुछ भी हो रहा है उससे हम चिंतित हैं। ड्रोन आ रहे हैं, हथियार आ रहे हैं।” उन्होंने पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन पर भी आशंकाएं जाहिर की हैं, क्योंकि उनसे हथियार आते थे। कैप्टन का कहना था कि पहले उनकी सरकार के दौरान  सुरक्षा चौकन्नी रहती थी, किन्तु अब सिद्धू के रिमोट कंट्रोल से चलने वाली चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार के कारण असमंजस की स्थिति बन सकती है। सर्वविदित है कि पंजाब में आतंकी गतिविधियों से लेकर अराजकता में कैप्टन कार्यकाल के दौरान भी कमी आई थी और पाकिस्तान प्रायोजित नशे का कारोबार अब लगभग खत्म हो चुका है।

गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात

कैप्टन ने जैसे ही सीएम पद छोड़ा वैसे ही ये कहा जाने लगा था कि वो भाजपा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में जब कैप्टन अमित शाह से मिले थे, तो ये खबरें पुख्ता होने लगी थीं , वहीं कैप्टन ने बाद मे ये साफ किया था कि वो भाजपा में नहीं शामिल होंगे। इसके विपरीत कैप्टन का अमित शाह से मिलने का मंतव्य किसान आंदोलन था। कैप्टन का अमित शाह से आग्रह था कि कैसे भी करके कथित किसान आंदोलन को खत्म किया जाए, या तो फिर कानून रद्द हो। इसकी वजह ये है कि कैप्टन जानते हैं कि किसानों के नाम पर एक बड़ा वर्ग पंजाब में अराजकता फैला रहा है, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर खतरा हो सकता है। वहीं TFI भी इस पर अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि भाजपा कथित किसान आंदोलन की कमर तोड़ने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह की सकारात्मकता का सहारा ले सकती है।

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सिद्धू का पाकिस्तानी कनेक्शन

कैप्टन अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में मंत्री रहने के दौरान कैप्टन की असहमति के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान गए, और पाक पीएम इमरान खान के शपथ ग्रहण में पाकिस्ती सेना के प्रमुख कमर जावेद बाजवा के गले भी लग लिए। ऐसे में सिद्धू का पाकिस्तान के प्रति प्रेम जाहिर हो गया था, जिसका नतीजा ये था कि कैप्टन खुलेआम सिद्धू की यात्रा के विरोध में बोल रहे थे। सीएम पद छोड़ने के बाद से ही कैप्टन को आशंका है, कि सिद्धू पाकिस्तान के साथ संबंधों को नर्म करने के नाम पर सीमा में असुरक्षा को न्यौता दे सकते हैं। वहीं किसानों के मुद्दे पर भी अराजकता फैलाने में सिद्धू ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

इस पूरे परिदृश्य के आधार पर ये कह जा सकता है कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, और एक राष्ट्रवादी नेता होने के चलते वो लगातार केन्द्र सरकार को ताजा स्थिति से अवगत करा रहे हैं, जो कि एक सराहनीय कदम प्रतीत होता है। ऐसे में अगर सिद्धू के खिलाफ कुछ कार्रवाई देखने को मिलती है तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।

 

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