कैसे योगी आदित्यनाथ ने अतीक अहमद के आतंक का सर्वनाश किया

यूपी में रहना है तो कानून व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं!

Ateek अतीक अहमद

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर हद से ज्यादा सख्त है, और ये बात किसी से छिपी नहीं है। राज्य सरकार प्रदेश की कानून व्यवस्था को बेहतर करने हेतु प्रतिबद्ध है। एक समय था जब सबसे ज्यादा गुंडागर्दी इसी राज्य में होती थी। गुंडागर्दी भी इस दर्जे की कि वो कानून की धज्जियां उड़ा देते हैं। लेकिन प्रदेश की ये सूरत साल 2017 से बदलनी शुरू हुई। योगी सरकार ने उन सभी माफिया और बाहुबलियों पर नकेल कसना शुरु किया, जिन्हें पिछली सरकारों ने खूब फलने-फूलने का मौका दिया था। मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद भी उन्हीं में से एक हैं। जिन पर योगी सरकार की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। स्थिति तो ऐसी हो गई है कि योगी सरकार के खौफ के कारण ये माफिया यूपी आने को भी तैयार नहीं हैं।

अहमद पर दर्ज हैं 96 आपराधिक मामले

राज्य के बाहर की जेलों में बंद अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी, जो कभी गैंगस्टर हुआ करते था, आज वो अपने साम्राज्य के क्रमिक विनाश का केवल दर्शक है। योगी सरकार ने अतीक अहमद और उसके सहयोगियों से जुड़े 30 बंदूक लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। उसके सहयोगी पुलिस की रडार पर हैं और उनकी संपत्तियां जब्त की जा रही हैं। प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित के अनुसार, “वर्तमान में उसके पास केवल एक बंदूक का लाइसेंस बचा है और वह भी एक पिस्तौल का है।”

बताया जाता है कि अतीक अहमद (60) ने सन् 1979 में एक हत्या के जरिए क्राइम की दुनिया में कदम रखा था। जिसके बाद वो अपराध की दुनिया में और अधिक खूंखार होता गया। उसके हत्यारे कदमों को सपा और बसपा सरकार से समर्थन प्राप्त था और वो बिना किसी डर के अजेय राजा की तरह जीवन जी रहा था। पांच बार विधायक और एक बार सांसद रहे अहमद के विरुद्ध अब तक कुल 96 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसे हत्या, अपहरण, अवैध खनन, रंगदारी, धमकी और धोखाधड़ी समेत कई मामलों में नामजद किया गया है।

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जेल में बंद रहने के बावजूद वाराणसी से लड़ा था चुनाव

गौरतलब है कि फरवरी 2017 में, जब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब अहमद को प्रयागराज के नैनी इलाके से एक राज्य विश्वविद्यालय के कर्मचारियों पर हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पुलिस की खिंचाई करने के बाद हुई थी, क्योंकि इससे पहले पुलिस उसे गिरफ्तार करने में विफल रही थी।

जिसके बाद मार्च 2017 में विधानसभा चुनाव हुए और बीजेपी ने पूर्ण बहुमत से जीत हासिल कर राज्य में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनाई। योगी आदित्यनाथ राज्य के सीएम बनें। एक सख्त और दमदार व्यक्तित्व से परिपूर्ण योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री की शपथ लेने के दौरान ही यह स्पष्ट कर दिया था कि “अब प्रदेश में गुंडाराज नहीं चलेगा।” जिसके बाद योगी सरकार ने ऐसे माफिया और बाहुबलियों को धूल चटाने और इन पर सख्त कार्रवाई करने हेतु कई बड़े कदम उठाए।

मौजूदा समय में अतीक अहमद गुजरात के एक जेल में सड़ते हुए अपने साम्राज्य का विनाश देख रहा है। सपा की टिकट पर कई बार चुनाव जीत चुके अतीक अहमद ने लोकसभा चुनाव 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया और उनके विरुद्ध चुनाव लड़ा, किन्तु उसे मात्र 855 वोट ही मिले थे। ऐसे में वाराणसी की जनता ने उसके आतंक का जवाब वोट से दिया। आपको बता दें कि चुनाव के बाद अतीक अहमद की जमानत जब्त हो गई थी।

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योगी सरकार कर रही है गुंडों का सफाया

बहरहाल, जेल में बंद माफिया अतीक अहमद और उसके गुर्गों के विरूद्ध पुलिस-प्रशासन की लगातार कार्रवाई चल रही है। अहमद के दो गुर्गे माजिद और अकबर की लाखों की जमींदोज संपत्तियों को कुर्क कर दिया गया है। बमरौली उपरहार, झपिया, एनुउद्दीपुर में इनकी काफी जमीन को पुलिस ने चिह्नित किया है, जिसकी आख्या राजस्व विभाग को भेजी जा रही है और जल्द ही राजस्व टीम पुलिस के साथ इन जमीनों को कुर्क करने की कार्रवाई करेगी। ऐसे में, यह कहना गलत नहीं होगा कि योगी आदित्यनाथ ने अतीक अहमद और उसके जैसे माफियाओं पर जो लगाम कसी है, उसके बाद प्रदेश में कोई बाहुबली बनने और कानून व्यवस्था को हाथ में लेने की सोच भी नहीं सकता। सीएम योगी की मजबूत शासन और कानून व्यवस्था के सामने इन माफियाओं के भय का अंदाज़ा इस बात लगाया जा सकता है कि एक समय के गुंडे अब अपने ही राज्य में आना नहीं चाहते हैं!

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