जो कपूरथला गुरुद्वारे में हुआ वह ‘बेअदबी’ नहीं थी, बल्कि एक निर्मम हत्या थी

पंजाब फिर से असहिष्णुता के पथ पर चलने को आतुर है!

कपूरथला

कपूरथला के गुरुद्वारे में धार्मिक अवहेलना की घटना के नाम पर भीड़ ने संदिग्ध व्यक्ति की जान ले ली गई, जो की निंदनीय है। गुस्साई भीड़ ने आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है या नहीं, इस बात से अज्ञात होने के बाद भी उस व्यक्ति को बेहरहमी से पीट-पीट कर मार डाला। हालांकि, गुरुद्वारे में मौजूद भीड़ का कहना था कि इस व्यक्ति को बेदअबी करते हुए देखा गया था। यहां सवाल यह है कि क्या किसी स्थिति में, हत्या को जायज ठहराया जा सकता है? किसी भी सभ्य समाज में हत्या के लिए किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया जाता है। वहीं, पुलिस जांच के बाद इस घटना से जुड़ी एक नई कड़ी सामने आई है।

कोई ‘बेअदबी’ नहीं, यह सरेआम हत्या का मामला है!

दरअसल, कपूरथला गुरुद्वारे में पहले तो यह बताया गया कि ग्रन्थि के साथ छेड़छाड़ की गई है लेकिन अब पुलिस ने अपने जांच पाया है कि यह कोई धार्मिक अवहेलना का मामला नहीं था। यह सीधे सरल स्पष्ट शब्दों में एक हत्या का मामला है। कपूरथला पुलिस ने 19 दिसंबर को एक युवक की पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में निजामपुर मोड़ स्थित गुरुद्वारे के ग्रंथी अमरजीत सिंह (55) को गिरफ्तार कर लिया है और 100 से अधिक अज्ञात लोगों पर भी मामला दर्ज किया है। हत्या से सम्बंधित गिरफ्तारी बीते शुक्रवार को सुबह पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बयान के कुछ घंटों बाद हुई, जब चन्नी ने कपूरथला घटना में बेअदबी से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि “मामला हत्या का है और हत्यारों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।”

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वहीं, इस मामले पर मीडिया को संबोधित करते हुए IG गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा, “निजामपुर गुरुद्वारे के ग्रंथी अमरजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। युवकों की लिंचिंग के लिए 100 अज्ञात लोगों पर भी मामला दर्ज किया गया है। शेष लोग जिनमें 25 से 30 हथियारबंद लोग शामिल हैं, वह अभी तक अज्ञात हैं लेकिन हमारे पास वीडियो और तस्वीरें हैं और उनकी पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। हम लिंचिंग की घटनाएं नहीं होने दे सकते।”

आखिर उस दिन क्या हुआ था?

बताते चलें कि कपूरथला हत्याकांड तब हुआ जब बिहार के उस व्यक्ति को भूख लगी और वह खाना खाने गुरुद्वारे में गया। वहां पर व्यक्ति को मार दिया गया और आरोप यह लगाया गया कि व्यक्ति ग्रन्थि के साथ छेड़छाड़ कर रहा था। भीड़ द्वारा युवक को बांधकर पीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर लाइव-स्ट्रीम भी किया गया। अमरजीत और उसके सेवादारों द्वारा उस युवक को पकड़ने के बाद 150 से 200 लोग गुरुद्वारे में जमा हो गए थे। ग्रंथी ने गुरुद्वारे से लोगों के इकट्ठा होने की घोषणा भी की थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब पुलिस डेढ़ घंटे के बाद मौके पर पहुंची, तब तक वह युवक बुरी तरह घायल हो चुका था।

असहिष्णुता को बढ़ावा देती है यह घटना

पुलिस के अनुसार,  युवक को जिस कमरे में बांधा गया था, उससे छुड़ाने की पुलिस की कोशिशों में पुलिस और भीड़ के बीच हाथापाई हो गई और कम से कम तीन पुलिस अधिकारी भी घायल हो गए। जालंधर जोन के IG गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा कि “पुलिस बाकी आरोपियों की वीडियो और फोटो से पहचान करेगी।” उन्होंने आगे कहा कि “प्राथमिकी में लगभग 100 अज्ञात व्यक्तियों का उल्लेख है और उनमें से 25-30 सशस्त्र वाले थे।” वहीं, पुलिस अधिकारियों ने बीते रविवार को ही कहा था कि हत्या से जुड़े स्थान पर बेअदबी के कोई निशान नहीं दिख रहे हैं।

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ऐसे में, जब इसे हत्याकांड माना जा रहा है, तो आवश्यक है कि इसपर जांच-पड़ताल के बाद जल्द से जल्द दोषियों को सजा दी जाए। हाल ही के दिनों में, खासकर किसान आंदोलन के बाद एक खास किस्म की असहिष्णुता देश में बढ़ी है। देश में ढीले पड़ गए खालिस्तानी तार फिर से मजबूत हो गए हैं। वहीं, ये घटनाएं संविधान संचालित राष्ट्र के लिए समस्या है और इसकी जितनी निंदा की जाए, उतनी कम होगी।

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