CoWin पर भारत का मज़ाक उड़ाने वाला अमेरिका, ‘पेपर’ से बने वैक्सीन प्रमाणपत्रों को संभालना सीख रहा है

भारत ने दिये Digital Certificate, वहीं अमेरिका अब भी परचियाँ बांट रहा है!

अमेरिका वैक्सीन सर्टिफिकेट

कोरोना वायरस से दुनिया अभी भी लड़ रही है। देश-विदेश में कोरोना की वैक्सीन लगाने की तत्परता दिखाई जा रही है जिससे अधिक लोगों को सुरक्षा प्रदान की जा सके। आज जब कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है तो उसके बाद वैक्सीन का सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जा रहा है जिससे सरकार के पास पूरा रिकॉर्ड दर्ज हो सके। वैक्सीन सर्टिफिकेट के मामले में अब अमेरिका पूरी तरह से पिछड़ गया है।

आपको बता दें कि हर आकस्मिक कोविड -19 लहर के साथ, संयुक्त राज्य अमेरिका हमेशा किसी न किसी तरह से खुद को तबाह करने का प्रबंधन करता है। कोविड टीकाकरण कार्यक्रम अब एक वर्ष से भी अधिक समय से चल रहा है, USA को यह समझ में नहीं आया है कि महामारी से कैसे निपटा जाए, अस्पताल में भर्ती होने से कैसे बचा जाए, कैसे सामान्य स्थिति बनाई रखी जाए और देश के लोगों को कैसे बचाया जाए। USA जैसा देश जो अपने नागरिकों को टीकाकरण प्रमाण पत्र देने का अच्छा तरीका भी नहीं निकाल पाया है, उससे कोविड़ महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने की उम्मीद करना बेईमानी होगी।

आपको बता दें कि अमेरिका में रोग नियंत्रण केंद्र द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा टीकाकरण कार्ड अजीबोगरीब आकार का है। जैसा कि हमने बताया, संयुक्त राज्य अमेरिका में टीकाकरण अभियान अब एक साल से अधिक समय से चल रहा है। समय के साथ, लोगों ने अपने पेपर वाले सफेद वैक्सीन कार्ड खो दिए हैं और अब अमेरिका के नागरिक वैक्सीन सर्टिफिकेट के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

अमेरिका में बहुत सारे लोगों को अपने वैक्सीन प्रमाण पत्र नहीं मिले, पेपर से बना कोविड सर्टिफिकेट होने के कारण कुछ लोगों के सर्टिफिकेट क्षतिग्रस्त होने का पता चला है जिसके बाद अमेरिका के जनमानस को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स, जो भारत से संबंधित घटिया रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए बदनाम है, उसने इस मामले में अपने लेख के माध्यम से अमेरिकियों को यह सन्देश दिया है कि कैसे उन्हें अपने वैक्सीन कार्ड खोने से घबराने की जरूरत नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि “अगर आपने अपना कोविड -19 टीकाकरण कार्ड खो दिया है तो इसके लिए वे अपने डॉक्टरों से संपर्क कर सकते हैं जहां आपने इलाज करवाया है ।” पर यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है।

खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश कहने वाला अमेरिका आज तक अपने नागरिक को डिजिटल कोविड़ सर्टिफिकेट भी प्रदान नहीं कर पाया है। वहीँ इसकी तुलना में भारत का टीकाकरण कार्यक्रम उन देशों से प्रशंसा प्राप्त कर रहा है, जो वास्तव में खुद को कोविड -19 से छुटकारा पाना चाहते हैं। और ऐसे देशों को एहसास हो गया है कि भारत की CoWin प्रणाली बाकी देशों से बहुत अच्छी है। दरअसल, भारत की तुलना में अमेरिकी वैक्सीन प्रमाण पत्र हस्तलिखित होते हैं।

अन्य देशों के विपरीत CoWin प्लेटफॉर्म सर्टिफिकेट के लिए भारत की जनता को टीकाकरण केंद्रों पर जाने की जरुरत नहीं पड़ती, वहीँ अमेरिका जैसे देश के लोगों को टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचना पड़ता है, और बड़ी भीड़ के संपर्क में आना पड़ता है जिससे कोरोना का प्रसार और भी बढ़ जाता है।

US और UK जैसे विकसित देशों में, जो लोग COVID-19 के टीका लगवाते हैं, उन्हें हाथ से लिखा हुआ पेपर सर्टिफिकेट दिया जाता है। इसके विपरीत भारत में कहीं अधिक मजबूत प्रणाली मौजूद है। यहां लोगों को CoWIN के माध्यम से तुरंत डिजिटल टीकाकरण प्रमाणपत्र मिल जाता है। इस बात पर जोर देने की जरूरत नहीं है कि डिजिटल रिकॉर्ड हस्तलिखित रिकॉर्ड की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होते हैं।

आज भारत में लगभग हर कोई अपने प्रमाणपत्रों के डिजिटल रूपों पर निर्भर करता है – जिसका लाभ किसी के पंजीकृत मोबाइल से एक साधारण SMS कर प्राप्त किया जा सकता है। वहीँ अमेरिकी डिजिटल वैक्सीन प्रमाणपत्र बनाने से कोसो दुर है। भारत आज अपने कोविड़ कार्यक्रम के लिए पूरे विश्व के लिए एक मिसाल बन गया है।

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भारत वर्तमान में CoWIN प्लेटफॉर्म के माध्यम से सबसे बड़ा डिजिटल टीकाकरण अभियान चला रहा है और दुनिया में सबसे तेजी से अपने नागरिकों का टीकाकरण भी कर रहा है। इतनी विशाल आबादी के बावजूद, भारत अपने डिजिटल कौशल की बदौलत बहुत ही कुशल तरीके से अभियान चला रहा है।

CoWIN भारत सरकार का एक लाइसेंस प्राप्त एक ऐप है। दुनिया के 76 देश इस तकनीक का इस्तेमाल करना चाहते हैं। भारत न केवल अपने नागरिकों का तेजी से टीकाकरण कर रहा है, बल्कि भारत में लोगों को टीकाकरण का डिजिटल प्रमाणपत्र भी मिलता है। टीका लगते हीं, कुछ ही मिनटों के भीतर, लाभार्थी के मोबाइल फोन पर एक डिजिटल सर्टिफिकेट भेजा जाता है जिसे आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। वहीं इस तरह के कोविड़ प्रबंधन से संयुक्त राज्य अमेरिका को भारत से सीखना चाहिए।

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