मोदी सरकार ने 1.5 करोड़ कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचा लिया

20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज से डूबती हुई 13.5 लाख MSMEs को बचाया

ECLG योजना

6 करोड़ परिवार का आजीविका बची

कोविड 19 के सर्वव्यापी महामारी के कारण देश भर में आर्थिक संकट छा गया। इसके मद्देनजर वित्त मंत्रालय द्वारा 20 लाख करोड़ रुपये के व्यापक पैकेज की घोषणा की गई। इस आर्थिक संकट से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) सबसे अधिक प्रभावित थे। उनकी सहायता के लिए इसी 20 लाख करोड़ रुपये के व्यापक पैकेज के हिस्से के रूप में आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLG) का अनावरण किया गया।

ECLG योजना का विस्तार

ECLG योजना के तहत, MSMEs और व्यावसायिक उद्यमों को 50 करोड़ रुपये तक का ऋण देने का प्रावधान किया गया। इस ऋण-राशि के अलावा  20% अतिरिक्त ऋण के लिए सरकार द्वारा 100% गारंटी भी प्रदान की गई थी। अगस्त 2020 में, इस योजना को मुद्रा उधारकर्ताओं और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए व्यक्तिगत ऋण लेनेवालों के लिए विस्तारित किया गया । 20 नवंबर को EGCL  2.0 के माध्यम से इस योजना को कामथ समिति द्वारा पहचाने गए 26 क्षेत्रों के अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी विस्तारित किया गया। 21 मार्च तक, 50 करोड़ रुपये से अधिक परंतु, 500 करोड़ रुपये से कम क्रेडिट वाली संस्थाओं तक इसे पहुंचने का निर्देश दिया गया।

मोदी सरकार ने अनवरत विभिन्न उद्योगों को कवर करने के लिए योजना का विस्तार किया है जिस कारण अब तक ईसीएलजी योजना के चार विस्तारित संस्करण सामने आ चुके हैं।

MSME के लिए वरदान

MSME  यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए 4.5 लाख करोड़ रुपये की आवंटित राशि में से 64.4% या 2.9 लाख करोड़ रुपये 21 नवंबर,2021 तक स्वीकृत किए जा चुके हैं।

एसबीआई रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, ECLG योजना से इस अवधि के दौरान 1.8 लाख करोड़ रुपये के लगभग 13.5 लाख एमएसएमई खातों को एनपीए (NPA) में जाने से बचाया जा सकता है।  यह बकाया उस MSME खाते पर आवंटित MSMI क्रेडिट के 14% के बराबर है जिसे NPA बनने से बचाया जा रहा है।

ईसीएलजी योजना के कारण बचाए गए 13.5 लाख MSME खातों में से लगभग 93.7% सूक्ष्म और लघु इकाइयों में हैं।

एसबीआई अनुसंधान यह भी गणना करता है कि यदि ये सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इकाइयां बिना क्रेडिट गारंटी समर्थन के NPA हो जाती हैं, तो लगभग 1.5 करोड़ कर्मचारी बेरोजगार हो जाते।  वास्तव में, ईसीएलजी योजना ने 6.0 करोड़ परिवारों (स्वयं सहित प्रति कार्यकर्ता चार परिवार के सदस्यों को मानते हुए) के लिए आजीविका बचाई है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि ECLG के तहत इस क्रेडिट स्कीम से ट्रेडिंग सेक्टर (छोटी किराना दुकानों सहित) को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। इसके बाद फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल्स और कमर्शियल रियल एस्टेट को फायदा हुआ है। इन्ही शीर्ष दस क्षेत्रों ने एनपीए से बचने हेतु  दी गई क्रेडिट का 75% हिस्सा लिया।

राज्यों की बात की जाए तो गुजरात सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। इसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश हैं। इन्ही शीर्ष दस राज्यों में इस क्रेडिट राशि का 75% हिस्सा गया क्योंकि सबसे ज्यादा NPA होनेवाले MSME  खाते इन्ही राज्यों से हैं ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में, एमएसएमई को मुख्य रूप से ईसीएलजी योजना के कारण 2019 की तुलना में अधिक ऋण प्राप्त हुआ। वित्त वर्ष 2021 में, देश ने एमएसएमई क्षेत्र को 9.5 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए, जो कि वित्त वर्ष 2020 में दिए गए 6.8 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में एमएसएमई ऋण में इस तेज उछाल को मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत द्वारा समर्थित किया गया।  ECLGS की नई भारत योजना तो उधारदाताओं को 100% क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि एसएमई क्षेत्र को ऋण देने के लिए मौजूदा क्रेडिट गारंटी योजना को समग्रता में देखा जाना चाहिए और वर्तमान ईसीएलजी योजना से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर इसे पुन: उन्मुख किया जाना चाहिए।

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