SBI के निवेश से Pine Labs बना वर्ष 2022 का सबसे भरोसेमंद IPO

ये तो बस झांकी है अभी स्टार्टअप्स की उड़ान बाकी है!

Pine Labs

पिछले वर्ष भारतीय कंपनियों की IPO में ऐतिहासिक वृद्धि देखी गयी है। विशेष रूप से इसमें उन कंपनियों की भागीदारी अधिक है, जो एक दशक से भी कम समय में स्थापित हुई थी और अपने नए व्यवसाय के बदौलत बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है। वहीं, हाल ही में, SBI ने मोटा मुनाफा कमाने के लिए भारत की सबसे भरोसेमंद कंपनी में निवेश किया है, जो इस साल के मध्य में अपना प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश(IPO) जारी करेगी। IPO में निवेश करनेवालों के लिए यह सुनहरा कदम माना जा रहा है। 4 जनवरी 2022 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मर्चेंट कॉमर्स प्लेटफॉर्म Pine Labs में इस साल के मध्य में होनवाले अमेरिकी सार्वजनिक लिस्टिंग से पहले $20 मिलियन का निवेश किया है।

वहीं, सितंबर 2021 में इनवेस्को डेवलपिंग मार्केट्स फंड की ओर से $100 मिलियन का निवेश हुआ और अब देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने $20 मिलियन का निवेश किया है। Pine Labs का अनुमानित मूल्यांकन 3.5 बिलियन डॉलर हो चुका है और कंपनी कथित तौर पर नैस्डैक पर एक प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) जारी करने का विचार कर रही है।

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वर्ष 2022 का भरोसेमंद IPO है Pine Labs

इस संदर्भ में Pine Labs के CEO अमरीश राजू ने कहा कि “देश के सबसे बड़े बैंक का हम पर भरोसा करना व्यक्तिगत रूप से संतोषजनक है क्योंकि कंपनी व्यापारियों को निर्बाध और सुरक्षित भुगतान अनुभव प्रदान करने का प्रयास करती है।” राव ने कहा कि उन्होंने SBI को वित्तीय सेवा प्रौद्योगिकी (Financial Service Technology) के विक्रय से अपना करियर शुरू किया। उन्होंने आगे कहा, “पिछले एक साल में कई प्रमुख निवेशकों ने कंपनी के बिजनेस मॉडल और विकास की गति का समर्थन किया है। पूंजी के ताजा संग्रह का उपयोग उत्पाद सूट को बढ़ाने के लिए ऑफलाइन पॉइंट-ऑफ-सेल, स्केल प्लुरल, डिजिटल भुगतान टूल के लिए  किया जाएगा और अंततः यह व्यापारियों के लिए एक सर्वांगीण और पसंदीदा ओमनीचैनल पार्टनर के रूप में उभरेगा।” बता दें कि 2021 में, Pine Labs ने दो राउंड की फंडरेजिंग में 70 करोड़ डॉलर जुटाए थे।

क्या है Pine Labs?

उत्तर प्रदेश के नोएडा में वर्ष 1998 में स्थापित Pine Labs 100 से अधिक ब्रांडों के लिए डिजिटल और भौतिक स्टोर दोनों में अंतिम-मील खुदरा लेनदेन की सुविधा प्रदान करता है। यह एक यूनिकॉर्न कंपनी है, जिसका मूल्यांकन 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। कंपनी मूल रूप से पेट्रोलियम ऑटोमेशन रिटेल स्पेस में काम करती थी लेकिन 2004 में व्यापारियों के हित हेतु भुगतान उत्पादों और सेवाओं में परिवर्तित हो गई। एशिया में 100,000 से अधिक खुदरा विक्रेता Pine Labs के साथ काम करते हैं और 350,000 से अधिक व्यापारी भारत में कंपनी के पॉइंट ऑफ़ सेल (PSO) टर्मिनलों का उपयोग करते हैं। कंपनी की सेवा इलेक्ट्रॉनिक्स, भोजन, फैशन, यात्रा और अन्य क्षेत्रों सहित कई उद्योगों द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं।

पेपल, सिकोइया कैपिटल इंडिया, टेमासेक और मास्टरकार्ड द्वारा समर्थित, Pine Labs ने सितंबर में इनवेस्को डेवलपिंग मार्केट्स फंड से 100 मिलियन डॉलर जुटाए, जिससे कंपनी को लगभग 3 बिलियन डॉलर का मूल्यांकन मिला। PSO टर्मिनलों के अलावा, Pine Labs चालान समाधान और कार्यशील पूंजी तक पहुंच भी प्रदान करता है।

2030 तक IPO में होगा भारतीय कंपनियों का दबदबा

मलेशियाई ई-कामर्स फिनटेक स्टार्टअप ‘फेव’ के अप्रैल में $45 मिलियन के अधिग्रहण और क्विकसिल्वर के 2019 के 110 मिलियन डॉलर के अधिग्रहण के बाद कंपनी भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में अपने Buy Now Pay Later (BNPL) अर्थात खरीद अभी अदायगी बाद में के पदचिह्न को बढ़ाने की भी योजना बना रही है। Pine Labs अपने क्लाउड-आधारित सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म के साथ भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में सभी स्तर के व्यापारियों की सेवा करती है, जिससे कई भुगतान स्वीकृति और मर्चेंट कॉमर्स समाधान सक्षम हो जाते हैं। वहीं, यह  प्लेटफ़ॉर्म इन्वेंट्री प्रबंधन और ग्राहक संबंध प्रबंधन को भी संभालता है। कंपनी का संग्रहीत मूल्य मंच कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए डिजिटल उपहार कार्ड प्रदान करता है। इसके अलावा, कंपनी IPO के जरिये 6 अरब डॉलर की वैल्युएशन प्राप्त करने की उम्मीद कर रही है।

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ऐसे में, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभरा है। Pine Labs के अलावा पिछले वर्ष 8 भारतीय स्टार्टअप्स की IPO में एंट्री हुई है और इस वर्ष कम से कम 10 और कम्पनियां इस सूची में शामिल हैं। स्टार्टअप्स इकोसिस्टम जो वर्ष 2010 की शुरुआत में उभरना शुरू हुआ था, अब पूरी तरह अपनी परिपक्वता से परिचित हो चुका है। वहीं, 2030 के दशक तक, अधिक से अधिक भारतीय कंपनियों के उभरने की उम्मीद जताई जा सकती है।

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