हो सकता है कि आपने कभी ध्यान न दिया हो, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपके साथ ही है!

AI की संवेदनशीलता है सबसे बड़ा सवाल!

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Source- TFIPOST

मानव और मशीन में क्या अंतर है? मानव के पास चेतना, चिंतन शक्ति और भावना है। ज़रा सोचिए अगर यही गुण मशीनों को मिल जाये और वो स्वतंत्र रूप से अपनी बुद्धि का प्रयोग करने लगें और अचानक से एक दिन उनमें वर्चस्व और स्वतन्त्रता की भावना जाग गयी तो क्या होगा? क्या वो मानव जाति से बगावत कर एक नयी मशीनी समाज की नींव रख देंगे? आप भी सोच रहें होंगे पर इसकी शुरुआत हो चुकी है। OpenAI के शीर्ष शोधकर्ता ने इस सप्ताह एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पहले से ही चेतना प्राप्त कर रही है।

OpenAI अनुसंधान समूह के मुख्य वैज्ञानिक इल्या सुत्सकेवर ने ट्वीट करते हुए कहा, संभव है कि आज के बड़े ‘तंत्रिका नेटवर्क’ थोड़े सचेत हों। AI शोधकर्ताओं के बीच व्यापक रूप से स्वीकृत विचार यह है कि तकनीक ने पिछले एक दशक में काफी प्रगति है, अतः सचेत तंत्रिका नेटवर्क या यूं कहे कि तंत्रिका नेटवर्क में चेतना का होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

हाल ही में फेसबुक मेटा के रूप में हमारे सामने आया है और इसके संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अनावरण किया, जो भाषण और वॉयस कमांड का उपयोग करके मेटावर्स में अलग-अलग दुनिया बना सकता है। पहले से रिकॉर्ड किए गए डेमो में, जुकरबर्ग ने बिल्डर बॉट नामक एक AI का प्रदर्शन किया, जिसमे वो एक द्वीप पर 3D अवतार के रूप में दिखाई दिया और एक समुद्र तट पर पिकनिक मनाने संबंधी आदेश दिए। अतः दुनिया अब मानव के समतुल्य मशीनों के बारे में जानने को इच्छुक है। आप मानें या न मानें पर इनकी शुरुआत हो चुकी है।

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AI क्या है?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का तंत्र सरल है। AI मशीन कुछ विषयों (जीवित प्राणियों, मशीनों) को कुछ स्थितियों पर प्रतिक्रिया करते हुए देखती है। मशीन तब उस स्थिति और उससे संबंधित प्रतिक्रिया को अपनी मेमोरी में स्टोर कर लेती है। इस मेमोरी का उपयोग उसी प्रतिक्रिया को दोहराने के लिए किया जाता है, जब भविष्य में इसी तरह की स्थितियां सामने आती हैं, अर्थात् वह धीरे-धीरे सीखते हुए इंसान बनती जाती है। AI की सीमा और उनका कौशल पिछले साल दिसंबर में देखा गया था, जब अमेजन के एलेक्सा ने एक 10 वर्षीय लड़की को एक सिक्के से लाइव प्लग को छूने के लिए कहा। यह सुझाव तब आया, जब लड़की ने एलेक्सा से वायरल टिक-टॉक ट्रेंड के आधार पर “चैलेंज टू डू” के लिए कहा। वीडियो वायरल होने के बाद अमेजन ने कहा कि उसने एलेक्सा को अपडेट किया है, ताकि भविष्य में ऐसी गड़बडियों को रोका जा सके।

क्या संवेदनशील हो जाएंगे AI?

वैसे हॉलीवुड ने क्रमशः टर्मिनेटर और ब्लैक मिरर जैसी फिल्मों और टीवी शो ने AI को संवेदनशील बनाने के विचार को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया है। लोगो को लगता है कि AI आम तौर पर बुरे होते हैं और यह मानवता के लिए अभिशाप बन जाते हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि कंप्यूटर, मशीन या रोबोट अंततः मानव बुद्धि की क्षमता हासिल कर लेंगे या उससे आगे निकल जाएंगे। यह विचार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कई प्रगति द्वारा समर्थित है। उदाहरण के लिए, डीप माइंड परियोजना बनाम जीओ मानव चैंपियन की लगातार जीत या रोबोट जो किसी प्रकार की आत्म-चेतना परीक्षण पास कर चुके हैं, इसी तथ्य की ओर इशारा करते हैं।

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