Xiaomi की ढुलाई के बाद चीन के बदले सुर,बोला सारी बातें मानूंगा

हाय रे चीन, चाबुक चली नहीं कि अक्ल ठिकाने आ गयी!

चीन

सौजन्य ichowk

चीन चाबुक की भाषा समझता है और ये बात मोदी सरकार को समझ में आ गयी है। अगर चाबुक का प्रयोग ना किया जाये तो चीन किसी भी राष्ट्र के साथ अपने सम्बन्धों के हर आयाम में धूर्तता और धौंस दिखाने लगेगा चाहे वो आर्थिक क्षेत्र हो या फिर सामरिक। इस धौस से आप जितना डरेंगे चीन उतना डराएगा, दबाएगा और एक दिन आप पर आधिपत्य जमा लेगा। कूटनीतिक भाषा में चीन के इस सिद्धान्त को “ड्रैगन पॉलिसी” कहते हैं। लेकिन, भारतीय शेरों ने ऐसा करारा प्रहार किया कि ड्रैगन को दुम दबाने के लिए विवश होना पड़ा। चीन को सामरिक और सैन्य स्तर पर हमारे देश के जवानों ने मुहतोड़ जवाब दिया और अब मोदी सरकार उसे आर्थिक तथा व्यापारिक स्तर पर सबक सीखा रही है।

चीनी मोबाइल फोन निर्माता Xiaomi विदेशी मुद्रा में घपले को लेकर भारत सरकार के रेडार पर आ गयी। सरकार ने जांच भी शुरू कर दी है। चीन की धमकाने वाली प्रतिक्रिया के बावजूद मोदी सरकार ने यह साफ कर दिया कि अगर भारत में व्यापार करना है तो भारतीय कानून की सर्वोच्चता तथा भारत की एकता और अखंडता को सर-माथे पर बिठाते हुए उसका अक्षरश: पालन करना होगा।

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चीनी मोबाइल कंपनी Xiaomi पर सरकार का चाबुक

चीनी मोबाइल कंपनी Xiaomi पर भारत सरकार का चाबुक चलते ही चीन की अक्ल ठिकाने पर आ गयी है।  आपको बता दें की भारतीय स्मार्टफोन बाजार में शिपमेंट के मामले में शीर्ष पांच में चार चीनी ब्रांड हैं – Xiaomi, Redmi, OPPO और vivo। भारतीय कर अधिकारियों ने सीमा शुल्क अधिनियम के कथित उल्लंघन के लिए Xiaomi Technology India Pvt को 653 करोड़ की मांग की है। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत 1 अप्रैल 2017 से 30 जून 2020 की अवधि के बीच तीन कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए। कारण- कंपनी ने अपने आयात के मूल्य में रॉयल्टी और लाइसेंस शुल्क शामिल नहीं किया था। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि लेनदेन मूल्य में “रॉयल्टी और लाइसेंस शुल्क” नहीं जोड़कर, Xiaomi India कथित तौर पर ऐसे आयातित मोबाइल फोन के सीमा शुल्क से बच रहा था।

जांच के दौरान, DRI द्वारा Xiaomi India के परिसरों में तलाशी ली गई, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेजों की बरामदगी से संकेत मिलता है कि Xiaomi India,Qualcomm USA और बीजिंग Xiaomi Mobile Software Co. Ltd. को रॉयल्टी और लाइसेंस शुल्क भेज रहा था। हाल ही में DRI ने Xiaomi India के एक पूर्व प्रमुख को इस बात की जांच के लिए बुलाया है कि क्या कंपनी की व्यावसायिक प्रथाएं भारतीय विदेशी मुद्रा कानूनों से मेल खाती हैं?

जांच के जवाब में Xiaomi के एक प्रवक्ता ने बुधवार को ग्लोबल टाइम्स को भेजे एक बयान में कहा- “Xiaomi एक कानून का पालन करने वाली और जिम्मेदार कंपनी है। हम देश के कानूनों को सर्वोपरि महत्व देते हैं। हम सभी नियम का पूरी तरह से अनुपालन कर रहे हैं और उसके प्रति आश्वस्त हैं।” कंपनी ने कहा कि Xiaomi यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ जांच में सहयोग कर रही है कि उनके पास सभी आवश्यक जानकारी है।

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होश ठिकाने आने के बाद

होश ठिकाने आने के बाद एक उच्च-स्तरीय सरकारी अधिकारियों की बैठक में द्विपक्षीय तनाव को कम करने के लिए चीन ने भारतीय अधिकारियों से चीनी मोबाइल फोन कंपनियों के साथ एक स्तर पर व्यवहार करने का आग्रह किया। जांच न केवल Xiaomi बल्कि भारत में परिचालन वाली कई अन्य चीनी फर्मों को भी लक्षित कर रही है।

भारत में सुचारू व्यवसाय संचालन को बेहतर ढंग से सुनिश्चित करने के लिए चीन ने भारत में चीनी-वित्त पोषित फर्मों से भारतीय कर कानूनों से परिचित होने का आग्रह किया, विशेष रूप से आयातित सामग्रीपूर्ण मशीन असेंबली, बिक्री, स्क्रैपिंग और राइट-ऑफ के पहलुओं में। चाइनीज चैंबर ऑफ कॉमर्स इन इंडिया के हैरिस लियू ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि चैंबर भारत में चीनी-वित्त पोषित उद्यमों के लिए जोखिम की रोकथाम, नियंत्रण और आत्मपरीक्षा के साथ-साथ आत्मसुधार को बढ़ावा दे रहा है।

काउंटरपॉइंट रिसर्च द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, Xiaomi स्मार्टफोन शिपमेंट में 2021 में 24 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ भारत के बाजार में पहले स्थान पर है और विवो 15 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है।

चीनी स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी यांग ने कहा कि, भारत में चीनी-वित्त पोषित उद्यमों के सामान्य संचालन का समर्थन करने के लिए, चीनी-वित्त पोषित उद्यमों के कर्मचारियों के लिए वीजा अभी भी सामान्य रूप से जारी किए जा रहे हैं।

यांग ने कहा- “हालांकि प्रतिबंध पूरी तरह से नहीं हटाए गए हैं, भारत में चीनी उद्यमों के कर्मचारियों के लिए वीजा आवेदनों की सफलता दर 2021 के 10-20 प्रतिशत की तुलना में 2022 में 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष विदेशी निवेशकों के साथ समान व्यवहार करेगा और भारत में सभी उद्यमों के लिए एक खुला, निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण कारोबारी माहौल तैयार करेगा।”

चीन के होश ठिकाने आने के बाद इस साल चीनी कंपनियों के खिलाफ कोई अन्य जांच नहीं हुई है। पर, मोदी सरकार ने ये स्पष्ट कर दिया है की अगर चीन की साम्यवादी सत्ता अपने व्यापारिक संगठनों और कंपनियों का दुरुपयोग कर भारत के कानून के साथ छेड़-छाड़ करेगी तो उन्हें इसके दुष्परिणाम भुगतने ही होंगे।

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