यह हिमाचल प्रदेश में AAP के अंत की शुरुआत है

आप के हिमाचल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी और संगठन महामंत्री सतीश ठाकुर बीजेपी में शामिल!

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अब धरती लगी फटने तो खैरात लगी बंटने, इस कथन के एक एक शब्द आम आदमी पार्टी पर सटीक बैठते हैं। अब पंजाब में जीतने के बाद जब लग रहा है कि राज्य चलाएंगे कैसे क्योंकि वादे ही इतने हाईफाई कर दिए हैं कि पूरे करने में हालत खस्ता हो रही है, इधर दिल्ली में केंद्र सरकार ने निगमों के एकीकरण करने के सारी प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली हैं। ऐसे में अब अन्य राज्यों में बिखराव और टूट सरेआम हो गई है। हिमाचल प्रदेश में अपने प्रभाव को बढ़ाने और सत्ता पक्ष की कुर्सी हिलाने की बात करने वाले आम आदमी पार्टी के ही राज्य इकाई के प्रमुख पार्टी को टाटा-बाय-बाय कर गए। ऐसे में जो सीएम बदलने की बात कर रहे थे आज उनके पास राज्य इकाई का चेहरा ही नहीं बचा क्योंकि उन्हें तो भाजपा ले उडी।

 

किसी ने सही ही कहा है कि, राजनीतिक व्यक्ति की कथनी और करनी में बड़ा अंतर होता है तो वो व्यक्ति ज़्यादा दिन टिक नहीं सकता। यही चरित्र आम आदमी पार्टी का शुरुआत से रहा है। आरोप मढ़ने के अतिरिक्त इस पार्टी का कोई मूल एजेंडा नहीं है, फ्री-फ्री से सरकारें चलतीं तो आज पूरा देश मुफ़्त की रोटी ही तोड़ता, श्रीलंका में जो हालात हैं दिल्ली वैसे हालातों में अब तक चली गई होती, वो तो केंद्र सरकार और संविधान का हाथ है देश की राजधानी पर. नहीं तो पहला दिवालिया राज्य दिल्ली ही घोषित होता |

जिस हिसाब से आम आदमी पार्टी सरकार सत्ता के मद में चूर होकर अनर्गल वायदे करती है उसका  सारा बोझ आम आदमी की जेबपर जाता है, न की उस आम आदमी पार्टी पर।

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आम आदमी पार्टी राजनीति बदलने के लिए सत्ता में आई थी वो बात अलग है राजनीति भले ही न बदली पर आम आदमी पार्टी अवश्य बदल गई। आम आदमी पार्टी (आप) के इस दावे के बीच कि अरविंद केजरीवाल के मंडी रोड शो के बाद बीजेपी ने शुक्रवार को खेला कर दिया और “आप” प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री को पार्टी में शामिल कर आप को बड़ा झटका दिया है।  मंडी शहर में अरविंद केजरीवाल के रोड शो के ठीक दो दिन बाद, AAP के हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी, संगठन महासचिव सतीश ठाकुर और ऊना अध्यक्ष इकबाल सिंह भाजपा में शामिल हो गए। और ऐसी-वैसी जॉइनिंग नहीं, तीनों नई दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए जिसके बाद आम आदमी पार्टी की जड़ें हिल गई हैं।

यह आम आदमी पार्टी की नई नीति है जो पार्टी को पैसा देगा उसकी चांदी होगी और जो फ़कीर होगा उसको फटकार मिलेगी।  पार्टी छोड़ने की प्रमुख वजह  अनूप केसरी ने पुराने और ईमानदार कार्यकर्ताओं के साथ धोखा और अनदेखी बताई है। केसरी ने बताया कि पंजाब चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद आप की दिल्ली की टीम यहां प्रदेश में आकर बैठ गई। जिन्हें यहां की भौगोलिक परिस्थितियों का अता पता नहीं था और न ही संगठन का ज्ञान था। इसके बाद दिल्‍ली से आए नेता अपनी चलाने लगे।” यह कोई नई बात नहीं है, आम आदमी पार्टी के नाम में ही आम आदमी रह गया है, शेष सभी लोग धन के पुजारी हैं, दिल्ली के भ्रष्टाचार की तो कोई तोड़ ही नहीं है इस मामले में, फिर चाहे स्कूल-कॉलेज बनाने के बजाय उनका रंग-रोगन कराना हो या फिर मोहल्ला क्लिनिक के नाम पर खाली कमरों का डब्बा बना उसका उद्घाटन कर देना हो या फिर सबसे बड़ा विज्ञापन घोटाला हो, इन सभी में महारथ हासिल कर चुके “आप” नेता और उनके असली चरित्र को अन्य राज्यों के लोग और उनके संगठन के पदाधिकारी भांप चुके हैं।

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यह तो कुछ नहीं पार्टी के राज्य इकाई के मुखिया का इस प्रकार पार्टी छोड़ देना, आम आदमी पार्टी की दिल्ली की कोर टीम को सख्ते में है। हताश हुए पार्टी के दूसरे नंबर के नेता दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपने दुःख के खून के घूँट पीते हुए शनिवार सुबह ही प्रेस वार्ता कर ली, जिसमें उन्होंने भर-भरकर पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के बारे में कटाक्ष, संगीन आरोप मढ़े गए जैसा हमेशा से यह करते आए हैं। सिसोदिया ने कहा कि रात को 12 बजे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आप पार्टी के ऐसे व्यक्ति को भाजपा में शामिल करते हैं, जिसके खिलाफ पार्टी को शिकायतें मिली हुई हैं कि वे महिलाओं से गंदी बातें करते थे।” बस यही राग अलापने की आदत पड़ गई है आप नेताओं को, कोई भी पार्टी छोड़ता नहीं उसके चरित्र पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं जैसे कि कोई मज़ाक हो। ऐसे में यही आप नेता कल को माफ़ी भी मांगते दिखेंगे जैसे पहले भाजपा नेताओं के विरुद्ध अनर्गल आरोप मढ़ते थे और बाद में मानहानि केस में फंसते ही लिखित माफ़ी मांगते थे। शीघ्र यह दौर पुनः देखने मिल सकता है।

राजनीति बदलने वालों ने राजनीति का स्तर इस हद तक गिरा दिया है कि  अब आम आदमी पार्टी को जगह नहीं मिल रही की कहाँ जाकर सर छुपाएं। जिस प्रकार राज्य इकाई में ऐसी टूट दिखनी शुरू हो गई है, एकमात्र विपक्षी पार्टी बनने का “आप” का सपना, एक स्वप्न बनकर ही रह जाएगा। शेष हिमाचल प्रदेश में तो यह आप के अंत की शुरुआत है, आने वाले दिनों में और भी साथी रूठेंगे और फिर टूटेंगे और फिर छूटेंगे।

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