प्रशांत किशोर ने केसीआर को आखिर सांप का तेल बेच ही डाला

PK ने सबको 'पीके' ही बना दिया है!

प्रशांत किशोर केसीआर

Source- TFIPOST

बबुआ पीके हो का? निश्चित रूप से प्रशांत किशोर के साथ आने वाले हर नेता को आज इसी सवाल का सामना करना पड़ रहा होगा क्योंकि मौकापरस्त और बरसाती मेंढक का पर्याय बन चुके पीके अब और नेताओं को भी पीके समझने लगे हैं। हालिया उदाहरण हैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव (केसीआर) जिन्हें प्रशांत किशोर की स्कीम ने अपने मायाजाल में फंसा लिया है और वो खुद “आ बैल मुझे मार” वाली परिधि में ढ़ल चुके हैं। केसीआर अपनी पार्टी को क्षेत्रीय राजनीति से निकालकर राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने की कोशिश कर रहे हैं और प्रशांत किशोर उन्हें ऐसा करने के लिए लुभा रहे हैं। अब गाडी कहां जाकर रूकती है या ठुकती है यह काल के गाल में छिपा हुआ है।

दरअसल, टीआरएस के स्थापना दिवस समारोह के दौरान, पार्टी ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया था कि पार्टी “राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।” राव ने खुद कहा कि टीआरएस को “रचनात्मक भूमिका” निभाने और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक शून्य को भरने की जरूरत है। टीआरएस ने शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य और आर्थिक क्षेत्रों में देश में सकारात्मक बदलाव लाने का भी संकल्प लिया और फिर, बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता के बारे में टिप्पणियों के साथ भाजपा को निशाने पर लेने का मन भी बनाया है, जिसपर काम शीघ्र प्रारंभ हो जाएगा।

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IPAC के साथ हुआ है केसीआर का गंठजोड़

इससे यह तो स्पष्ट है कि केसीआर टीआरएस की उपस्थिति को राष्ट्रीय बनाना चाहते हैं और अखिल भारतीय पार्टी बनाना चाहते हैं। इन सपनों को हवा देने बैठे हैं पीके, जिन्होंने न जाने कितनों को पीएम बनाने के मुंगेरी लाल के हसीन सपनों को दिखाया और उसकी एवज में अपनी संस्था I-PAC का नाम बढ़ाया और बहुत कुछ कमाया। अब यह सपने की गाडी तेलंगाना पहुंच गई है जहां केसीआर ने कुछ दिन पूर्व ही प्रशांत किशोर से मुलाकात की थी। रविवार को टीआरएस ने इस संदर्भ में आधिकारिक पुष्टि के साथ कहा कि उसने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे किशोर ने खुद स्थापित किया था।

यूं तो राष्ट्रीय स्तर पर पैर पसारने वाले मुद्दे पर टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने इस बात से किनारा किया कि प्रशांत किशोर का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “पीके IPAC संस्थापक हैं लेकिन मुझे नहीं पता कि इसे कौन चला रहा है। पीके ने हमें I-PAC से परिचित कराया और यह हमारे साथ काम कर रहा है।”

ज्ञात हो कि पीके वो व्यक्ति है जो एक के बाद एक करके अनेकों नेताओं को विपक्षी चेहरा बनाने का प्रलोभन देते जा रहे हैं और यह सभी नेता उस जाल में फंसते जा रहे हैं। भाजपा-कांग्रेस के अतिरिक्त तीसरे मोर्चे के रूप में पीके अबतक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसे नेताओं को इस प्रलोभन को दिखा भी चुके हैं और बहुत कुछ हथिया भी चुके हैं। हाल के घटनाक्रमों से, ऐसा लगता है कि अगला नंबर केसीआर का है जो अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं की दिशा में काम करने के लिए किशोर पर भरोसा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, पीके के पिछले रिकॉर्ड्स को देखा जाए तो इस बार कुछ बड़ी अड़चनें हैं।

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पीके की जाल में फंस रहे हैं नेता

बता दें, टीआरएस का ध्येय उसके अनुसार जो उसकी आधिकारिक ववेबसाइट भी बताती है, उसमें लिखा है कि “तेलंगाना राष्ट्र समिति, जिसे टीआरएस पार्टी के नाम से जाना जाता है, की स्थापना 27 अप्रैल 2001 को कलवकुंतला चंद्रशेखर राव (KCR) द्वारा की गई थी। टीआरएस पार्टी का एकमात्र उद्देश्य तेलंगाना को एक अलग राज्य का दर्जा हासिल कराना था। इसके साथ तेलंगाना के लिए आकांक्षाओं को साकार करने के लिए अडिग भावना स्थापित करना, टीआरएस पार्टी ने तेलंगाना के लिए राज्य का दर्जा हासिल करने के लिए निरंतर आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

अब जब उस पार्टी का ध्येय ही तेलंगाना का गठन होना था और उसके बाद केसीआर उस राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री भी बन गए तो उसकी क्षेत्रीय महत्वकांक्षाएं तो कब की पूरी हो चुकी हैं, ऐसे में अब केसीआर राष्ट्रीय स्तर के नेता बनने की कोशिश में लगे हुए हैं। यह पीके के पीएम मैटेरियल वाला वो घोल है जो वो सभी नेताओं को पिलाते जा रहे हैं  और यह नेता उसे सहर्ष स्वीकार करते हुए पीते जा रहे हैं जैसे यही कल को पीएम बन जाएंगे। उन्हें शायद यह नहीं पता कि कथित राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की यह चालें सिर्फ अपने घर भरने और I-PAC को संवारने के लिए की जा रही हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पीके और KCR के इस गंठजोड़ और ‘स्नेक ऑयल’ के बीच काफी समानता है।

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ध्यान देने वाली बात है कि स्नेक ऑयल एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल भ्रामक मार्केटिंग , स्वास्थ्य देखभाल, धोखाधड़ी या किसी घोटाले के लिए किया जाता है। इसी तरह, “स्नेक ऑयल सेल्समैन” एक सामान्य अभिव्यक्ति है जिसका उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो कुछ बेकार या कपटपूर्ण इलाज, उपाय या समाधान को बेचता है, बढ़ावा देता है या सामान्य प्रस्तावक है। प्रशांत किशोर के परिप्रेक्ष्य में भी ये सारी बातें एकदम सटीक बैठती नजर आ रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आखिरकार प्रशांत किशोर ने केसीआर को ‘स्नेक ऑयल’ बेच दिया है।

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