प्रमोद सावंत की दो टूक- अवैध धर्मांतरण कराने वालों पर गिरेगी गाज

गोवा के अस्तित्व को बचाने में जुटे सावंत !

Sawant

Source- TFIPOST.in

आप सभी तो जानते ही होंगे कि प्रकृति हर समय एक सी नहीं रहती है यह एक शास्वत सत्य है ! राजनीति के मामले में भी कुछ ऐसा ही है, जहाँ गोवा ने मार्च 2019 में अपने सबसे बड़े नेता के रूप में डॉ मनोहर पर्रिकर को खो दिया था तो उनकी मृत्युपर्रान्त तत्काल ही 2 दिनों के भीतर गोवा के नए मुख्यमंत्री के रूप में तत्कालीन स्पीकर गोवा विधानसभा, डॉ प्रमोद सावंत का चुनाव कर लिया गया और पर्रिकर के बाद राज्य की ज़िम्मेदारी सावंत के कंधों पर आ गई। यूं तो सावंत का यह कार्यकाल कुछ खासा सुर्खियां नहीं बटोर सका पर दूसरा कार्यकाल हाथ आते ही सावंत की धुंआधार पारी ने उनके करिश्माई व्यक्तित्व को निखार दिया है।

डॉ प्रमोद सावंत गोवा में धर्मांतरण का गिरोह चलाने वालों पर अब सख्ती से पेश आने के साथ ही उनपर कार्रवाई करने में जुट चुके हैं। इससे प्रमोद सावंत ने एक अलोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में की गई अपनी शुरुआत को एक सुपर लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में समाप्त करने का ध्येय बना लिया है, अर्थात यह तो सावंत की शुरुआत है, आने वाले दिनों में बहुत कुछ देखने को मिलने वाला है।

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अवैध धर्मांतरण पर तत्काल कार्रवाई

दरअसल, हालिया प्रकरण धर्मांतरण से जुड़ा है जिसके लिए गोवा बीते कई दिनों से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। राज्य में बड़े स्तर पर धर्मांतरण में संलिप्त गिरोह के बढ़ने की शिकायतें चरम पर है। इसी बीच गुरुवार को एक ऐसी कार्रवाई हुई जिसने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत के वचनबद्ध होने को प्रमाणित कर दिया। राज्य की मापुसा पुलिस ने गुरुवार शाम को एक पादरी, डोमिनिक डिसूजा और उसकी पत्नी जोन को सोडिम, को सिओलिम से गिरफ्तार किया था। दोनों के विरुद्ध “जबरन धर्मांतरण” की शिकायत थी और इसी के आधार पर दंपति पर मामला दर्ज किया गया और उनकी गिरफ़्तारी की गई।

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यह कार्रवाई इसलिए अहम हो जाती है कि, डॉ प्रमोद सावंत के पिछले कार्यकाल में उन्हें पूरा कार्यकाल नहीं मिला था और कहीं न कहीं वो अपेक्षाओं के अनुरूप काम भी नहीं कर पाए थे। इसी क्रम में जब इस बार चुनाव हो रहे थे तो उनकी विदाई की खबरें भी आ रही थीं पर पार्टी आलाकमान ने उन्हें एक बार और मौका देते हुए गोवा की जनता की सेवा करने के लिए चुना और एक बार फिर से उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई।

इस बार ध्येयनिष्ठ होकर सावंत ने भी मन बना लिए कि बीते को बिसार कर आगे के काम पर लगते हैं और अब एक एक्टिव और तल्ख़ तेवर वाले मुख्यमंत्री के रूप में अपनी छवि को उभारते हैं। बस फिर क्या था,  डॉ प्रमोद सावंत ने एक के बाद एक निर्णय लेने शुरू किए और राज्य में सबसे बड़ी समस्या धर्मांतरण से निजात पाने के लिए एक्शन प्लान बना लिया, बाकि “रेस्ट इज़ द हिस्ट्री” सावंत ने अपनी छवि को अब उभारने के साथ ही यह भी जता दिया है कि गोवा में धर्मांतरण का रैकेट चलाने वालों के लिए प्रमोद सावंत का दूसरा कार्यकाल “काल” साबित होने जा रहा है।

बता दें, गुरुवार को हुई कार्रवाई में आरोपी की पहचान पादरी डोमिनिक डिसूजा और उसकी पत्नी जोन मस्कारेनहास के रूप में हुई है, जो फाइव पिलर्स चर्च के रूप में एक स्व-शीर्षक ईसाई संप्रदाय चलाते हैं, जिसे उन्होंने स्थापित किया था। पुलिस ने धारा 153 ए, (धर्म पर हमले या हमले) 295 ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) के साथ-साथ ड्रग्स एंड रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है।

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लगातार मिल रही शिकायतों के बाद गोवा की मापुसा पुलिस ने पति-पत्नी को डिटेन कर एंटी कन्वर्जन लॉ के तहत कर रही कार्रवाई की है। ग्रामीणों ने पहले आरोप लगाया था कि डोमनिक बिना अनुमति के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर रहा था और गांव में शांति भंग कर रहा था। वह प्रार्थना सेवाओं में खलल डालता था। इस सबसे यह सिद्ध हुआ कि राज्य के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत की धर्मांतरण के विरुद्ध ज़ीरो टॉलरेंस नीति केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं, अब वो आरोपितों पर शिकंजा कसने के लिए अमल में भी लाई जाने लगीं हैं। सारगर्भित बात यही है कि, एक अलोकप्रिय मुख्यमंत्री से एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री तक का सफर तय करते हुए दिवंगत नेता डॉ मनोहर पर्रिकर के बाद डॉ प्रमोद सावंत, राज्य के कद्द्वार और बड़े चेहरे के रूप में उभर चुके हैं और आने वाला भविष्य इसके सभी प्रमाण सामने रखने वाला है।

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