जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने आंध्र प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया

आंध्र-प्रदेश के दसवीं के परिणाम चौंकाने वाले हैं!

Source: TFI

किसी भी देश की प्रगति के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। शिक्षित लोगों के बिना सफल राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हर व्यक्ति का अधिकार है कि वो बेहतर शिक्षा पाए। लेकिन तब क्या जब पूरी की पूरी शिक्षा व्यवस्था ही चरमराई हुई हो? हम यह बातें आंध्र प्रदेश के संदर्भ में कर रहे हैं, जहां की शिक्षा व्यवस्था की पोल 10वीं बोर्ड के हाल ही में आए नतीजों ने खोलकर रख दी है।

आंध्र प्रदेश की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 2 लाख से अधिक बच्चों के अनुत्तीर्ण होने पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। आंध्र प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (BSEAP) ने सोमवार को कक्षा 10वीं के बोर्ड नतीजे घोषित किए।

33 प्रतिशत छात्र फेल

छात्रों से लेकर अभिभावकों और शिक्षकों के लिए 10वीं बोर्ड के यह नतीजे एक झटके के तौर पर आए हैं। इस साल केवल 67 प्रतिशत छात्र ही परीक्षा पास करने में सफल हो पाए। जिसका मतलब यह हुआ कि तीन में से एक छात्र परीक्षा पास करने में असफल हुआ। 2 लाख से भी अधिक छात्र फेल हो गए।

और पढ़ें: मोदी-नायडू-कल्याण गठबंधन में निहित है आंध्र प्रदेश का भविष्य

2019 के बाद छात्रों के लिए यह पहली बड़ी परीक्षा थी। क्योंकि कोविड महामारी के कारण पिछले दो साल यानी 2020 और 2021 में सार्वजनिक तौर पर या स्कूल स्तर पर कोई परीक्षा आयोजित नहीं हुई थी और सामूहिक रूप से सभी छात्रों को पास कर दिया गया था।

यहां ध्यान देने वाली यह भी है कि इस साल आंध्र प्रदेश ने पिछले 20 वर्षों में अपना सबसे कम SSC पास प्रतिशत दर्ज किया है। यहां तक कि कृष्णा और गुंटूर जैसे जिले जो आंध्र प्रदेश के शिक्षा के केंद्र के तौर पर देखे जाते रहे हैं वो भी SSC में बेहतर प्रदर्शन करने में विफल रहे। बोर्ड नतीजों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि आंध्र प्रदेश में 797 स्कूल ऐसे थे, जिनमें 100% उत्तीर्ण छात्र दर्ज किए गए। वहीं, 71 स्कूलों ऐसे भी रहे, जहां एक भी छात्र पास नहीं हुआ। इन 71 स्कूलों में 31 निजी स्कूल भी शामिल रहे। इनमें से अधिकांश छात्र गणित और विज्ञान जैसे विषयों में अनुत्तीर्ण हुए।

आंध्र प्रदेश बोर्ड के निराशाजनक नतीजों से छात्रों में मायूसी इस कदर छा गई है कि फेल हुए छात्र अब आत्महत्या कर अपनी जान तक दे रहे हैं। सोमवार को परिणाम घोषित होने से लेकर 10 जून तक आंध्र प्रदेश में चार छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। चार आत्महत्याओं के यह मामले प्रकाशम, अनंतपुर, अन्नामाया और विशाखापत्तनम जिलों से सामने आए हैं।

सरकार पर उठे सवाल

वहीं, आंध्र प्रदेश के 10वीं बोर्ड के आए इन नतीजों पर राजनीति भी शुरू हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने खराब परिणामों के लिए जगन सरकार को दोषी ठहराया। TDP सुप्रीमो ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए पूछा कि आखिर सरकारी स्कूलों में उनके बहुचर्चित नाडु-नेदु कार्यक्रम के बावजूद इतनी उच्च विफलता दर कैसे है?

और पढ़ें: क्या मंदिरों को मुक्त करने की राह पर है आंध्र प्रदेश?

चंद्रबाबू नायडू आगे बोले कि आंध्र प्रदेश में TDP के शासनकाल के दौरान परीक्षा में सफलता दर 90 से 95 फीसदी तक थी लेकिन अब YSRC सरकार में यह घटकर 67% रह गई है। उन्होंने कहा कि गिरता स्तर स्कूली शिक्षा की दयनीय स्थिति को दर्शाता है।

आंध्र प्रदेश में 10वीं बोर्ड के यह नतीजे मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के उन दावों की पोल खोलते हैं, जिनमें वो शिक्षा प्रणाली में सुधार की बातें कहते हैं। परंतु इन सबके बावजूद जगन सरकार इसे नाकामी के तौर पर लेने के बजाए कोविड महामारी जैसे बहानों का इस्तेमाल कर अपनी विफलता छिपाने की कोशिश कर रही हैं।

अंग्रेजी को जबदरस्ती थोपा

दरअसल, आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री बोत्सा सत्यनारायण ने SSC के खराब परिणामों की वजह कोविड महामारी को बताया है। लेकिन यहां सवाल यही है कि इन नतीजों के पीछे की असल वजह क्या है? कोरोना महामारी या जगन सरकार की खराब नीति?

दरअसल, जगन सरकार ने आंध्र प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए। वो बदलाव अब उन पर ही भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। इनमें से ही एक कदम था अंग्रेंजी को जबरदस्ती थोपना। जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अंग्रेंजी को जबरदस्ती थोपा।

और पढ़ें: आंध्र प्रदेश: जिन्ना टावर पर तिरंगा फहराने की कोशिश करने वाले हिंदू युवकों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

सरकार ने यह कहते हुए अंग्रेंजी को प्राथमिकता दी कि सरकारी नौकरियों से लेकर कामकाज तक में अंग्रेंजी बेहद जरूरी होती है। वहीं, दूसरी ओर विशेषज्ञ मानते हैं कि छात्र अपनी मातृभाषा में पाठ्यक्रम को जल्दी और बेहतर तरीके से समझते हैं। यही वजह है कि मोदी सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति मातृभाषा से ज्ञान प्रदान करने को बढ़ावा देती है।

जगन सरकार की इन गलत नीतियों ने कैसे लाखों छात्रों के भविष्य को खराब कर दिया, यह बोर्ड नतीजों ने उजागर कर दिया है।

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें।

Exit mobile version