कुछ वर्षों के बाद, आपके पास टीवी तो होगा लेकिन आप इसे चालू नहीं करेंगे

टेलीविजन का अस्तित्व कभी नहीं होगा खत्म !

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Source- TFIPOST.in

संचार हमेशा ही मनुष्य के जीवन का अहम हिस्सा रहा है। एक-दूसरे तक अपनी बात पहुंचाने के लिए संचार की आवश्यकता होती है। पहले के समय की बात की जाए तो संचार के लिए तकनीक उपलब्ध नहीं थी। पुराने समय में कबूतरों के जरिए संदेश पहुंचाए जाते थे। चिट्ठियों के माध्यम से लोग एक दूसरे तक अपनी बात पहुंचाते थे।

फिर वक्त बदला और जनसंचार के लिए अन्य माध्यमों की आवश्यकता महसूस होने लगी। फिर हुआ समाचार पत्र का आविष्कार। समाचार पत्रों के माध्यम से लोग खबरें पढ़कर देश-दुनिया का हाल जानने लगे। बदलते वक्त के साथ तकनीक में और बदलाव हुआ और फिर आया रेडियो का दौर। खबरें पहुंचाने के साथ रेडियो लोगों के मनोरंजन का भी साधन बन गया। रेडियो के आने से लोग खबरें पढ़ने की जगह सुनने लगे। गाने सुनने लगे। इस पर कई तरह के कार्यक्रम आने लगे। कुछ इस तरह रेडियो लोगों के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। एक दौर ऐसा था जब रेडियो सुने बिना लोगों का दिन पूरा नहीं होता था।

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वक्त के साथ परिवर्तन 

परंतु फिर बदलते वक्त के साथ इसमें भी बदलाव आया और रेडियो की जगह टेलीविजन ने ले ली। मनोरंजन जगत में टेलीविजन को क्रांतिकारी बदलाव माना गया। टेलीविजन ने धीरे-धीरे ही परंतु अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी। फिर एक समय ऐसा आया जब टेलीविजन की दीवानगी काफी अधिक बढ़ गई। टेलीविजन के महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि आज के समय में हर घर में कुछ हो ना हो परंतु टेलीविजन अवश्य ही होता है। कभी टेलीविजन की उत्पत्ति भारी भरकम इडियट बॉक्स के तौर पर हुई थी। फिर इसमें अनेकों बदलाव हुए। ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन टेलीविजन आया और इसने पतले एलईडी से लेकर स्मार्ट टीवी तक का सफर तय किया। आज के समय में टेलीविजन महज हमारे बोलने भर तक से चल जाता है।

परंतु जिस टेलीविजन के सामने कभी पूरा परिवार एक साथ बैठा करता था वो अब धीरे-धीरे अकेला होता चला जा रहा है। स्मार्टफोन लोगों को टेलीविजन से दूर कर रहा है। टेलीविजन का महत्व कम हो रहा है और इस कारण इसका अस्तित्व भी खतरे में पड़ता दिख रहा है। आज के समय में हाल ऐसा हो रहा है कि घर में टेलीविजन चल तो रहा होता है और पूरा परिवार उसके आगे बैठा हो, तब भी हर किसी के हाथों में अपना स्मार्टफोन होता है और लोग उसमें ही मग्न नजर आते है।

स्मार्टफोन ने लोगों की जिंदगी को बहुत ही आसान बना दिया। अब स्मार्टफोन केवल करीबियों से बात करने तक ही सीमित नहीं रह गया। बल्कि यह लोगों के मनोरंजन का बहुत बड़ा साधन बन गया है। आज के समय में लोग अपने दिन का अधिकतर समय स्मार्टफोन पर ही गुजारते है। देखा जाए तो आजकल लोगों की जिंदगी भाग-दौड़ से भरी हो गई है। किसी के पास समय नहीं है कि टेलीविजन के आगे घंटों वो चीजें देखने के लिए बैठे जो उन्हें आसानी से अपने स्मार्टफोन में भी मिल जाएगी। लोग आराम से सफर करते हुए मेट्रो में, बस में बैठकर, ऑफिस में हो या फिर कहीं और, वे अपने स्मार्टफोन निकालकर इससे भरपूर मनोरंजन ले सकते है।

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समाप्त होता जा रहा है टेलीविज़न का महत्व

ओटीटी के बढ़ते प्रभाव ने भी टेलीविजन के महत्व को कम कर दिया। आज के समय में कई ओटीटी प्लेटफॉर्म है, जिन पर भर-भरकर कंटेंट मौजूद होता है। यह लोगों का मनोरंजन करने के लिए पर्याप्त है। यहां तक कि टेलीविजन पर आने वाले तमाम कार्यक्रम तक ओटीटी पर लोग देख सकते है, वो भी प्रसारण से पहले ही। उदाहरण के लिए अगर कोई नाटक रात को 9 बजे प्रसारित होना है तो उससे 10 या 12 घंटे पहले ही इन्हें ओटीटी प्लेटफॉर्म पर टेलीकास्ट कर दिया जाता है। इन सबके अलावा ओटीटी पर टेलीविजन से भी अधिक कंटेंट ढेरो फिल्म और वेब सीरीज के रूप में कंटेंट मौजूद होता है। केवल इतना ही नहीं कई ओटीटी प्लेटफॉर्म तो ऐसे भी है, जो फ्री में अपने दर्शकों को भरपूर कंटेंट उपलब्ध कराते है। ऐसे में दर्शकों का रुझान ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर काफी ज्यादा बढ़ने लगा है।

स्मार्ट टीवी का क्रेज भी इन दिनों लोगों में काफी बढ़ता दिखने लगा है। स्मार्ट टीवी के माध्यम से भी टेलीविजन पर वो सारा कंटेंट देखा जा सकता है, जो लोग स्मार्टफोन में देखते है। बड़ी संख्या में लोग आज स्मार्ट टीवी खरीद रहे है। इससे बिना टीवी का रिचार्ज कराए ही लोग अपने फोन की तरह बड़ी स्क्रीन पर तमाम चीजें देख सकते है। यह भी एक टेलीविजन के घटते प्रभाव की वजह बन रहा है।

इन सब कारणों ने वो दिन अब दूर नहीं दिखता जब टेलीविजन का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। हालांकि इसका अस्तित्व खत्म नहीं होगा। जैसे कि रेडियो के आने के बाद अखबार का प्रभाव कम अवश्य हुआ। परंतु आज भी अखबार अस्तित्व में बना हुआ है। कई लोग आज भी अखबार पढ़ना पसंद करते है। ऐसे ही टेलीविजन के आने से रेडियो का असर भी कम हुआ। हालांकि आज भी कई रेडियो प्रेमी ऐसे है, जो इसे सुनते है। ठीक ऐसे ही टेलीविजन भी अपने अस्तित्व में तो रहेगा। यह लोगों के घरों में भी मौजूद रहेगा। परंतु केवल एक शो पीस बनकर। कोई इन्हें खोलेगा नहीं।

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