मुख्तार अब्बास नक़वी भाजपा पर बोझ हैं?

अल्पसंख्यक मंत्रालय की इस देश में कोई ज़रूरत नहीं है।

Mukhtar Abbas Naqvi- A burden on the BJP

Source: TFI

मुख्तार अब्बास नक़वी को आखिरकार मोदी सरकार ने कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मंत्री रहे मुख्तार अब्बास नक़वी की विदाई उनका कार्यकाल ख़त्म होने के बाद हुई। ऐसा नहीं है कि भाजपा अगर चाहती तो नक़वी को मंत्रालय में नहीं रख सकती थी। भाजपा ऐसा कर सकती थी, लेकिन नहीं किया। भाजपा चाहती तो मुख्तार अब्बास नक़वी को राज्यसभा भेजकर सांसद बना देती और वो मंत्री बने रहते। लेकिन भाजपा ने ऐसा नहीं किया। और ऐसा नहीं करना सबसे सही फैसला था। इसके पीछे की वज़ह यह है कि मुख्तार अब्बास नक़वी भाजपा के लिए एक बोझ से ज्यादा कुछ नहीं थे। यह कहने के पीछे हमारे पास कई तर्क हैं।

सबसे पहला यह कि उन्हें भाजपा का मुस्लिम चेहरा बताया जाता है। सवाल यह है कि भाजपा को मुस्लिम चेहरे की ज़रुरत क्या है? असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का मुस्लिम चेहरा कौन है? कांग्रेस पार्टी का ईसाई चेहरा कौन है? समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण चेहरा कौन है? जेडीएस का लिंगायत चेहरा कौन है? इससे यह साबित होता है कि किसी धर्म विशेष के व्यक्ति को जबर्दस्त पार्टी में रखना और उसे मंत्री बनाना ज़रूरी नहीं है। अगर उस व्यक्ति की पार्टी में आस्था है तो वो बिना किसी पद के लिए पार्टी के साथ रह सकता है। भाजपा जोकि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है उसे किसी धर्म विशेष के चेहरे की ज़रूरत नहीं है।

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दूसरा बिंदु यह है कि मुख्तार अब्बास नक़वी कभी भी भाजपा के लिए वोट लाने वाले नेता के तौर पर नहीं रहे। मुख्तार अब्बास नक़वी बस एक मुस्लिम चेहरे के तौर पर बने रहे। अटल विहारी बाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे- बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने भी उन्हें मंत्री बनाया लेकिन वो कभी भी जननेता नहीं बन सके। जननेता तो छोड़िए मुस्लिम मतदाता भी उनके पीछे खड़ा नहीं हुआ। ऐसे में यह बिल्कुल साफ है कि वो कभी भी अपनी दम पर बीजेपी को वोट नहीं दिलवा सकते थे।

तीसरा बिंदु यह है कि मुख्तार अब्बास नक़वी को पार्टी में बस इसलिए रखा गया था मानो पार्टी यह साबित करना चाहती है कि वो संपूर्ण तौर पर हिंदूवादी पार्टी नहीं है। इसलिए ‘मुख्तार अब्बास नक़वी’ को रखो और उन्होंने मंत्रालय भी दो। लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम से साफ हो गया है कि नक़वी जी चाहें तो भाजपा में बने रहें लेकिन मंत्री भी बनें यह कोई ज़रूरी नहीं है।

चौथा बिंदु यह है कि मुख्तार अब्बास नक़वी एक नेता के तौर पर असफल हैं क्योंकि वो एक नेता हैं ही नहीं। दरअसल, इस दौर में एक अच्छा नेता होने के लिए सबसे पहले आपको एक अच्छा वक्ता होना पड़ता है, लेकिन माफ कीजिए सच यह है कि मुख्तार अब्बास नक़वी बहुत ख़राब वक्ता हैं।

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पांचवां बिंदु यह है कि भाजपा को मुख्तार अब्बास नक़वी के बजाय शाहनवाज हुसैन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। शाहनवाज हुसैन एक चतुर राजनेता हैं। भाजपा-जेडीयू की सरकार ने शाहनवाज हुसैन को बिहार में मंत्री भी बनाया है। ऐसे में शाहनवाज हुसैन नक़वी का एक अच्छा विकल्प हैं।

छठा बिंदु यह है कि अल्पसंख्यक मंत्रालय क्या सिर्फ रोजगार देने के लिए बनाया गया है। जहां एक धर्म विशेष के नेता को ही मंत्री बनाया जाएगा और उसे ही रोजगार दिया जाएगा। ऐसे में मुख्तार अब्बास नक़वी को हटाकर पीएम मोदी ने संदेश दे दिया है कि भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ सरकार चलाने के लिए सरकार नहीं चलानी है बल्कि बदलाव के लिए सरकार चलानी है। एक और बड़े बदलाव की हमें प्रतीक्षा है कि  कब अल्पसंख्यक मंत्रालय को ख़त्म किया जाएगा।

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