अहमद पटेल ने तीस्ता को दिए थे 30 लाख, मोदी सरकार को गिराने और BJP नेताओं को फंसाने का था षड्यंत्र

'इस पूरे षड्यंत्र की मास्टरमाइंड थीं सोनिया गांधी!'

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Source- TFIPOST.in

आप सब जानते हैं कि गुजरात में वर्ष 2002 में क्या हुआ। एक अरसे तक तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध तरह तरह के षड्यंत्र रचे गए। उन्हें टारगेट किया गया। उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ना दी गई। उनके विरुद्ध दिन-रात ज़हर उगला गया। उन्हें क्या-क्या नहीं बोला गया। पूरा इकोसिस्टम मोदी के पीछे पड़ा था। तमाम जांच प्रक्रियाओं में मोदी को क्लीन चिट मिलती चली गई।

लेकिन लिबरलों को चैन नहीं पड़ा। वो मोदी को कोसते रहे। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी मामलों में मोदी को क्लीन चिट दे दिया। इसके बाद धीरे धीरे वो परतें खुलनी शुरू हुईं जिन्हें बहुत गहरी साज़िश के तहत बनाया गया था। धूर्त लोग हिंसा और अराजकता के माहौल को अपने लिए एक सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करते हैं। सोनिया गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी ने वही किया था। मोदी के विरुद्ध साज़िश की- गुजरात सरकार का तख्तापलट करने के षड्यंत्र के पीछे सबसे बड़ी मास्टरमाइंड सोनिया गांधी ही थी।

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तीस्ता और अहमद पटेल तो मोहरे हैं

स्वयंभू सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है। अपने कारनामों से वो हमेशा मीडिया में छाई ही रहती हैं। 2002 के बाद उन्होंने जो किया वो किसी से छिपा नहीं है। मज़हब के नाम पर नोट बनाने के व्यापार को इन्होंने नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया। लेकिन अब जो खुलासा हुआ है वो और ज्यादा डरावना है। दरअसल, अपने कारनामों की वज़ह से तीस्ता सीतलवाड़ जेल में हैं। लेकिन उन्हें जमानत चाहिए। इसके लिए उन्होंने जमानत याचिका दायर कर दी। जमानत की सुनवाई के दौरान SIT ने कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल किया है। इस एफिडेविट में जो लिखा है उसे जानना और उसके मायने समझना आपके लिए बहुत आवश्यक है। SIT ने बताया कि “2002 में गुजरात सरकार का तख्तापलट करने के षड्यंत्र को अंजाम देने की जिम्मेदारी तीस्ता सितलवाड़ पर थी। तीस्ता को इसके लिए अहमद पटेल ने 30 लाख रुपये दिए और 5 लाख रुपये की पहली किस्त दी गई, इसके बाद 25 लाख की दूसरी किस्त।”

अहमद पटेल, सोनिया गांधी के खासमखास थे। सोनिया गांधी अपने सभी काम अहमद पटेल से ही करवाती थी और इन सब कड़ी को देखा जाए तो यह बिल्कुल साफ है कि गुजरात में राज्य सरकार का तख्तापलट करने का जो षड्यंत्र रचा गया। जिसमें तीस्ता सीतलवाड़ ने 30 लाख रुपये दिए। इसकी मास्टर माइंड सोनिया गांधी ही थी। SIT ने अपने एफिडेविट में आगे कहा है कि “तीस्ता सीतलवाड़ को पैसों के साथ-साथ राजनीतिक पद का लालच भी दिया गया। तीस्ता का काम था कि किसी तरह से सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेताओं को दंगों के आरोपों में फंसाना।” सत्ताधारी पार्टी गुजरात में उस वक्त भाजपा की थी। साज़िशकर्ता चाहते थे कि भाजपा के नेताओं के नाम दंगों में घसीटे जाएं और उन्हें जेल भेजा जाए।

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जब मोदी के विरुद्ध तमाम तरह की बयानबाजी की गई और साथ ही साथ तमाम आरोप भी लगाए गए। यहां तक कहा गया कि मोदी ने दंगों को रोका नहीं। वामपंथी ईकोसिस्टम उस वक्त और ज्यादा मजबूत हुआ करता था। राजदीप सरदेसाई हो, बरखा दत्त हो या फिर करण थापर हो। इन सब तथाकथित पत्रकारों ने सीधे-सीधे मोदी को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन अब साफ है कि तीस्ता जो भी कर रही थी वो सत्ता के लालच और पैसों के लिए कर रही थी। SIT ने अपने एफिडेविट में आगे कहा है कि “तीस्ता सीतलवाड़ ने एक बार कहा था कि शबाना और जावेद को पार्टी क्यों राज्यसभा भेज रही है, मुझे क्यों नहीं भेज रही।”

यानी कि तीस्ता राज्यसभा जाने के लिए यह सबकुछ कर रही थी। ऐसे में अब एक बात बिल्कुल साफ है कि मोदी को फंसाने के लिए, राज्य की भाजपा सरकार को गिराने के लिए जो षड्यंत्र रचे गए। जो साज़िशें रची गईं। वो किसी एनजीओ या फिर किसी व्यक्ति ने नहीं रची थी। बल्कि इनमें सीधा-सीधा कांग्रेस पार्टी का हाथ दिख रहा है। तीस्ता सीतलवाड़ या फिर अहमद पटेल इस बड़े गेम के छोटे-छोटे मोहरे भर हैं। भाजपा का आरोप है कि इस पूरे षड्यंत्र की मास्टरमाइंड सोनिया गांधी ही हैं। अब देखना होगा कि SIT की जांच आगे किस दिशा में जाती है।

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