गुजरात की चतुर जनता ने केजरीवाल के फ्री-फ्री वाले ढोंग को ध्वस्त कर दिया

दिल्ली की फ्री योजना का जाल देखकर गुजराती गए संभल !

kejariwaal

Source- TFIPOST.in

क्या आपको फ्री बिजली चाहिए? क्या आपको मुफ्त का पानी चाहिए? क्या आप चाहते हैं कि आपके बस के सफर का किराया सरकार भरे? इन सभी प्रश्नों के उत्तर में भले ही दिल्ली और पंजाब की जनता ने हाँ कहा हो लेकिन गुजरातियों ने हाथ और सर न में हिला दिए हैं.

 

गुजरात में चुनाव होने को हैं और केजरीवाल की पार्टी दिल्ली और पंजाब के बाद अब गुजरातियों को भी मुफ्त बिजली और पानी की सुविधा का लड्डू  खिलाकर अपने पक्ष में करना चाह रही है लेकिन गुजराती कहाँ कम हैं. सीधा मुंह पर ही मना कर दिया. लेकिन फ्री का माल भी किसी को बुरा लगता है क्या? शायद नहीं लेकिन शायद गुजराती इस बात को अच्छे से जानते और समझते हैं कि इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं जिसकी कोई कीमत न हो. केजरीवाल जी एक हाथ से फ्री बिजली पानी दे रहे हैं तो दुसरे हाथ से क्या ले लेंगे किसी को पता भी नहीं चलेगा. वे यह भी समझते हैं कि बिजली पानी की कीमत अपने प्राण देकर चुकानी  पड़े उससे तो अच्छा है कि पैसे से ही हिसाब किताब पुरा कर लिया जाये.

और पढ़ें: सिसोदिया का ‘भ्रष्टाचार’ सामने लाने के पीछे केजरीवाल का बड़ा षड्यंत्र है

गुजराती जनता दिल्ली और पंजाब से अलग

इन तीनों राज्यों की सोच, आर्थिक स्थिति और इनमें बसने वाले समाज पर एक नज़र डालें. दिल्ली में लुटियन दिल्ली और तुकलकाबाद जैसे एक दो इलाकों को छोड़कर देखा जाये तो छोटे छोटे संकुल घरों में रहने वाले दिल्ली के लोग अधिकतर नौकरी पेशा हैं जो जहाँ जितना हो सके उतना बचाना पसंद करते हैं वहीं दूसरी तरफ पंजाब एक कृषि प्रधान समाज है जहाँ एक बार फिर लोगों की थोड़ी बचत हो जाये तो अच्छा है. यही कारण है कि केजरीवाल पार्टी का बिजल-पानी कार्ड इन दोनों राज्यों में चल गया वहीं दूसरी तरफ गुजरात के बड़े बड़े शहर अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत आदि काफी विकसित हैं और गुजरात के अधिकतर लोग अपना स्वयं का व्यवसाय करते हैं और एक बनिया जानता है कि “संसार मे हर चीज़ की कीमत होती है”. और वह बनिया हर कीमत अदा करने को तैयार रहता है.

यदि इन तीनों राज्यों की जीडीपी पर एक नज़र डाली जाये तो, वर्ष 2020 -21 के लिए पंजाब का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 5.41 लाख करोड़, दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 15.98 लाख करोड़ और गुजरात का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2020 -21  के लिए लगभग 16,58,865 करोड़ रुपये रहा है. आंकड़ों के अनुसार गुजरात का सकल राज्य घरेलू उत्पाद बाकी दोनों राज्यों से अधिक है. दिल्ली के आंकड़े 15 लाख करोड़ तक भी केवल इसलिए पहुँच सके हैं क्यूंकि दिल्ली पर विश्वभर की नज़र है, दिल्ली को केंद्र सरकार से पैसा मिलता है और दिल्ली का क्षेत्रफल और आबादी गुजरात से बहुत कम है. यदि दिल्ली क्षेत्रफल और जनसँख्या में गुजरात जितनी बड़ी होती तो शायद आज तक फ्री के बिजली-पानी से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी होती.

और पढ़ें: सत्येंद्र जैन अगर पद्म विभूषण के हकदार हैं तो केजरीवाल को उनकी नौटंकी के लिए ऑस्कर मिलना चाहिए

यदि आपने केजरीवाल के पिछले सभी चुनाव प्रचार सुने हैं तो उनके चुनाव घोषणापत्र में और कुछ मिले न मिले लेकिन फ्री बिजली- पानी ज़रूर मिलेंगे. किस राज्य में किस चीज़ की आवश्यकता है यह जानने के बजाये केजरीवाल जी का मानना है कि सभी बिजली- पानी का बिल भरने में असमर्थ हैं इसलिए व्ही लॉलीपॉप दिखाकर सभी को खुश कर अपनी टीम में शामिल कर लिया जाए. मंत्री जी का यह कार्ड हमेशा चल भी जाता है. शायद यही कारण है कि जब गुजरातियों ने उनके फ्री बिजली- पानी को ठुकरा दिया तो केजरीवाल चुनाव घोषणा पत्र रह गए और उनसे कुछ पल तो कुछ कहते न बना.

अब हमारा और गुजरातियों का केजरीवाल जी से केवल एक ही प्रश्न है कि “गुजराती क्यों उन्हें वोट दे? वो क्या ऐसा करेंगे जो गुजरात के उत्थान में काम आएगा? क्या वह गुजरात की परेशानियों को जानते और समझते हैं? गुजरात के लिए उनका दृष्टिकोण क्या है?” यदि इन सभी प्रश्नों का उत्तर केजरीवाल जी के पास नहीं है तो गुजरात के चुनाव में जीतना उनके लिए केवल एक स्वप्नमात्र ही रह जाएगा.

और पढ़ें: पंजाब में AAP की जीत केजरीवाल को पार्टी से बाहर कर सकती है

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें।

Exit mobile version