Shabd kise kahate hain? शब्द की परिभाषा और प्रकार/भेद, शब्द विचार

Shabd aur Pad mein kya antar hai?

शब्द किसे कहते हैं? शब्द की परिभाषा और प्रकार/भेद, शब्द विचार

नमस्कार दोस्तों आज हम आपकों शब्द किसे कहते है? शब्द की परिभाषा और प्रकार/भेद, शब्द विचार के बारे में बताएंगे। अक्सर परीक्षाओं में इस तरह के शब्द पूछे जाते है, जिसकी जानकारी होना बहुत जरुरी है। आज हम इस लेख के माध्यम से (Shabd kise kahate hain) शब्द की सम्पूर्ण जानकारी आपकों देंगे। इसलिए इस लेख को अंत तक जरुर पढ़े।

शब्द किसे कहते हैं? Shabd kise kahate hain

एक या एक से अधिक वर्णों से बनी स्वतंत्र सार्थक ध्वनि को शब्द कहा जाता है। किसी भाषा में अनेक सार्थक शब्दों का प्रयोग होता है। तब वह एक पूर्ण वाक्य का रूप लेता है।यह स्थाई न होकर परिवर्तनशील होते हैं। यह समाज परिवेश और आवश्यकता के अनुसार जुड़ते रहते हैं तथा विलुप्त होते जाते हैं।

जैसे – सेर , सवा सेर , कुंटल , तोला , मासा , आदि का प्रयोग किया जाता था आज वह प्रयोग में नहीं है।

मनुष्य को अपने विचारों के आदान-प्रदान के लिए शब्द तथा भाषा की आवश्यकता होती है।शब्द भाषा की एक छोटी इकाई है।इसका निर्माण दो या अधिक वर्णनों को जोड़कर होता है।ठीक वैसे ही दो या दो से अधिक शब्दों के जोड से भाषा का निर्माण होता है।
क, च, अ आदि ध्वनियाँ के रुप हैं पर इनका कोई अर्थ नहीं होता है। लेकिन कमल, चमच्च शब्दों में ये ध्वनियाँ ही अन्य ध्वनियों के संयोग से ऐसे ध्वनि समूहों की रचना करती हैं जिनका कोई अर्थ होता हैं और ऐसी सार्थक ध्वनि या ध्वनि समूह ही शब्द कहलाते हैं।

Shabd kise kahate hain evm shabd ke bhed

शब्द के दो भेद हैं।
(1) सार्थक शब्द
(2) निरर्थक शब्द

1. सार्थक शब्द (sarthak Shabd kise kahate hain) :- जिन शब्दों के अर्थो को ग्रहण किया जाता हो, उन्हें सार्थक शब्द कहा जाता हैं।
जैसे :- सब्जी, दूध, रोटी, पानी, सामने, पता इत्यादि

2. निरर्थक शब्द (Nirarthak Shabd kise kahate hain) :- जिन शब्दों के अर्थों को ग्रहण नहीं किया जाता उन्हें निरर्थक शब्द कहा जाता हैं। इनका प्रयोग सदैव सार्थक शब्दों के साथ होता हैं। तथा यह इनके साथ लगकर अपना अर्थ निकलवा लेते हैं। जैसे :- अता, आमने, ताछ, वाय

शब्दों का वर्गीकरण :-

शब्दों का वर्गीकरण ( शब्द किसे कहते हैं विभिन्न आधार )
शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जाता है

1.व्युत्पत्ति/रचना के आधार पर
2.स्रोत/उत्पत्ति के आधार पर
3.अर्थ के आधार पर
4.व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर
5.प्रयोग के आधार पर

1.व्युत्पत्ति/रचना के आधार पर शब्द-भेद –

शब्दों को कई प्रकार से बनाया जाता हैं।वहीं कुछ शब्दों को एक से अधिक शब्दों को जोड़कर बनाया जाता हैं। रचना के आधार पर शब्दों के तीन भेद होते हैं:

रूढ़/मूल शब्द

जिन शब्दों के खंड करने पर कोई अर्थ न निकलता हो और जो पूर्ण रूप से स्वतंत्र हो, रूढ़ शब्द कहलाते हैं।
जैसे: कल, कपड़ा, आदमी, घर, घास, पुस्तक, घोड़ा आदि।

यौगिक शब्द

यौगिक शब्द वह होते हैं जो दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से मिलकर बने होते हैं।

जैसे:
देश + भक्ति = देशभक्ति
विद्या + आलय = विद्यालय
योगरूढ़ शब्द
जो शब्द यौगिक तो होते हैं,पर वह सामान्य अर्थ को न प्रकट करके विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं, उन्हें योगरूढ़ कहा जाता हैं।
जैसे: पीतांबर, नीलकंठ, पंकज, आदि।

2.स्रोत/उत्पत्ति के आधार पर शब्द-भेद –

स्रोत के आधार पर शब्दों के चार भेद हैं:

तत्सम
तत्सम का अर्थ होता है – उसके समान। संस्कृत भाषा से जो शब्द ज्यों के त्यों हिंदी में आ गए हैं ।उन्हं तत्सम शब्द कहा जाता है।
जैसे: अग्नि, क्षेत्र, रात्रि, सूर्य, मातृ, पितृ, आदि।

तद्भव
वह संस्कृत शब्द जो रुप बदलने के बाद हिन्दी में आएं हो उन्हे तद्भव शब्द कहते हैं।
जैसे: आग (अग्नि), खेत (क्षेत्र), रात (रात्रि), सूरज (सूर्य) आदि।

देशज
वह शब्द जो क्षेत्रीय प्रभाव के कारण परिस्थिति व आवश्यकतानुसार बनकर प्रचलित हुएं हो वह देशज कहलाते हैं।
जैसे- गाड़ी, थैला, पेट, खटखटाना ,मेहरारू आदि।

विदेशज

विदेशी जातियों के संपर्क में आने के बाद उनकी भाषा के बहुत से शब्द हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं।जिन्हें विदेशी अथवा विदेशज कहा जाता हैं।
जैसे: स्कूल, अनार, आम, कैंची, अचार, पुलिस, टेलीफोन, रिक्शा आदि।

3.प्रयोग के आधार पर शब्द-भेद –

प्रयोग के आधार पर शब्द के निम्नलिखित दो भेद होते है-1.विकारी शब्द 2.अविकारी शब्द

1-विकारी शब्द के चार भेद होते है

विकारी शब्द (Vikari Shabd kise kahate hain): जिन शब्दों के रूप में परिवर्तन होता रहता हो वे विकारी शब्द कहे जाते हैं ।
जैसे-कुत्ता, कुत्ते, कुत्तों, मैं मुझे, हमें अच्छा, अच्छे इनमें संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया विकारी शब्द हैं।

अविकारी शब्द के चार भेद होते है

अविकारी शब्द (Avikari Shabd kise kahate hain): वह शब्द जिनके शब्दों के रूपों में कोई परिवर्तन ना होता हो वे अविकारी शब्द कहे जाते हैं।

जैसे-यहाँ, किन्तु, नित्य और, हे अरे आदि। इनमें क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक आदि हैं।

4.अर्थ की दृष्टि से शब्दों का वर्गीकरण –

शब्द वाक्य में प्रयोग होकर भाषा का रूप लेता है। एक ही शब्द वाक्यों में अलग-अलग अर्थ की प्रतीति कराता है। इस दृष्टि से हम शब्दों को चार प्रकार से अध्ययन करेंगे।

एकार्थी शब्द
अनेकार्थी शब्द
विलोम या विपरीतार्थक शब्द
पर्यायवाची या समानार्थी शब्द

एकार्थी शब्द
जहां शब्द का एक ही अर्थ निकलता हो उन्हें एकार्थी शब्द कहते है।
जैसे :- सड़क, जूता, नदी,आदमी

अनेकार्थी शब्द
वह शब्द जिसके अधिक अर्थ निकलते हो उसे अनेकार्थी शब्द कहते हैं।
कनक – सोना , धतूरा।
कर – हाथ , टैक्स , किरण

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विलोम शब्द का विपरीतार्थक शब्द

जो शब्द के विपरीत या उल्टे होते हैं विपरीतार्थक या विलोम शब्द कहलाते हैं।
जैसे –
सीधा – उल्टा , ऊंच-नीच

पर्यायवाची या समानार्थी शब्द

जिन शब्दों के अर्थ समान होते हैं।वहीं एक ही शब्द के अनेक समानार्थी शब्द होते हैं वह पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।
सूर्य – दिनकर , दिवाकर , सूरज , भास्कर
कमल – सरोज , पंकज , नीरज।

5. व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर –

सभी भाषाओं का अपना एक व्याकरण होता है। जिसके द्वारा वह उसकी दृष्टि से ही शब्द और भाषा का अध्ययन करता है । व्याकरण के अंतर्गत हम उस भाषा के शब्दों पद, पदबंध आदि का पूरे नियम के साथ अध्ययन करते हैं।

इसे दो विभिन्न भागों में बांटा गया है 1. विकारी तथा 2. अविकारी।

आशा करते है कि (Shabd kise kahate hain) शब्द की सम्पूर्ण जानकारी पर यह लेख आपको पसंद आया होगा एवं ऐसे ही रोचक लेख पढ़ने के लिए हमसे फेसबुक के माध्यम इस जुड़े।

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