TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर हिंसा

    कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर हिंसा: खामेनेई की मौत के विरोध में 8 की मौत, कई घायल

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी: ईरान के चारों ओर सैन्य तैनाती और संभावित युद्ध की तैयारी

    ड्रग्स के खतरे को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस की बड़ी योजना

    ड्रग्स के खतरे को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस की बड़ी योजना, झुग्गी बस्तियों और युवाओं की सुरक्षा पर खास फोकस

    NCERT किताब विवाद के बीच केंद्र ने माफी मांगी

    NCERT किताब विवाद के बीच केंद्र ने मांगी माफी , CJI ने काउंसिल पर कड़ा रुख अपनाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग

    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग, बंदरगाह संचालन होगा और सुरक्षित व तेज

    सनातन दृष्टि से ए.आई.

    भारतीय सनातन दृष्टि से ए.आई. समिट की सार्थकता

    भारत में एआई की नई शुरुआत

    भारत में एआई की नई शुरुआत: अपने मॉडल्स से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम

    पीएम मोदी

    AI IMPACT SUMMIT 2026 : भारत बना एआई नवाचार का वैश्विक केंद्र, प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 का किया उद्घाटन

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Tejas mark -1

    वायु सेना का तीसरा तेजस लड़ाकू विमान हादसे का शिकार, पायलट सुरक्षित; हादसे की जांच जारी

    तेजस Mk1-A: बन कर तैया

    तेजस Mk1-A: बन कर तैयार हैं तो फिर Air Force को सौंपे क्यों नहीं गए ? इंजन या HAL की लेट लतीफी- क्या है देरी की असली वजह ?

    भारत में बनाएं जाएंगे स्वदेशी विमान

    फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की ₹3.25 लाख करोड़ डील को जल्द मिल सकती है DAC की मंज़ूरी

    अग्नि-3 एक तैयार और मैच्योर मिसाइल सिस्टम है

    अग्नि -3 का एक और परीक्षण: भारत एक Active Nuclear Missile को बार-बार Test क्यों कर रहा है?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान-इजराइल युद्ध तेज

    ईरान-इजराइल युद्ध तेज: एयरस्ट्राइक, जवाबी मिसाइल हमले और खामेनेई को लेकर बढ़ा सस्पेंस

    दुबई पर हमला

    दुबई पर हमला: जब भरोसे और सुरक्षा की छवि को सबसे बड़ी चुनौती मिली

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी: ईरान के चारों ओर सैन्य तैनाती और संभावित युद्ध की तैयारी

    पीएम कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा का संकेत

    कनाडा ने भारत की ईमानदारी को किया स्वीकार,कार्नी की यात्रा से पहले कूटनीतिक रिश्तों में बदलाव

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी सबसे लंबी रेल सुरंग

    ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगी देश की पहली रेल-रोड सुरंग, असम और पूर्वोत्तर को मिलेगा तेज़ और सीधा संपर्क

    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर हिंसा

    कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर हिंसा: खामेनेई की मौत के विरोध में 8 की मौत, कई घायल

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी: ईरान के चारों ओर सैन्य तैनाती और संभावित युद्ध की तैयारी

    ड्रग्स के खतरे को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस की बड़ी योजना

    ड्रग्स के खतरे को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस की बड़ी योजना, झुग्गी बस्तियों और युवाओं की सुरक्षा पर खास फोकस

    NCERT किताब विवाद के बीच केंद्र ने माफी मांगी

    NCERT किताब विवाद के बीच केंद्र ने मांगी माफी , CJI ने काउंसिल पर कड़ा रुख अपनाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग

    Visakhapatnam Port Authority को मिलेंगे नए 60 टन बीपी टग, बंदरगाह संचालन होगा और सुरक्षित व तेज

    सनातन दृष्टि से ए.आई.

    भारतीय सनातन दृष्टि से ए.आई. समिट की सार्थकता

    भारत में एआई की नई शुरुआत

    भारत में एआई की नई शुरुआत: अपने मॉडल्स से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम

    पीएम मोदी

    AI IMPACT SUMMIT 2026 : भारत बना एआई नवाचार का वैश्विक केंद्र, प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 का किया उद्घाटन

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Tejas mark -1

    वायु सेना का तीसरा तेजस लड़ाकू विमान हादसे का शिकार, पायलट सुरक्षित; हादसे की जांच जारी

    तेजस Mk1-A: बन कर तैया

    तेजस Mk1-A: बन कर तैयार हैं तो फिर Air Force को सौंपे क्यों नहीं गए ? इंजन या HAL की लेट लतीफी- क्या है देरी की असली वजह ?

    भारत में बनाएं जाएंगे स्वदेशी विमान

    फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की ₹3.25 लाख करोड़ डील को जल्द मिल सकती है DAC की मंज़ूरी

    अग्नि-3 एक तैयार और मैच्योर मिसाइल सिस्टम है

    अग्नि -3 का एक और परीक्षण: भारत एक Active Nuclear Missile को बार-बार Test क्यों कर रहा है?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान-इजराइल युद्ध तेज

    ईरान-इजराइल युद्ध तेज: एयरस्ट्राइक, जवाबी मिसाइल हमले और खामेनेई को लेकर बढ़ा सस्पेंस

    दुबई पर हमला

    दुबई पर हमला: जब भरोसे और सुरक्षा की छवि को सबसे बड़ी चुनौती मिली

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी

    यूएसएस फोर्ड की रहस्यमय गायबगी: ईरान के चारों ओर सैन्य तैनाती और संभावित युद्ध की तैयारी

    पीएम कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा का संकेत

    कनाडा ने भारत की ईमानदारी को किया स्वीकार,कार्नी की यात्रा से पहले कूटनीतिक रिश्तों में बदलाव

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी सबसे लंबी रेल सुरंग

    ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगी देश की पहली रेल-रोड सुरंग, असम और पूर्वोत्तर को मिलेगा तेज़ और सीधा संपर्क

    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    CroreBet India Review 2026: Sports Betting, Casino Games & Bonuses Explained

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    Top Bonus Rounds in Ice Fishing Game Review: What Indian Players Love Most

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

8,00,000 वर्षों के बाद भी जिनके लौटने का त्योहार मनाया जाता रहे, उन्हें कहते हैं रघुकुल नायक प्रभु श्री राम

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के व्यक्तित्व की कल्पना कर लीजिए!

Animesh Pandey द्वारा Animesh Pandey
24 October 2022
in प्रीमियम
bhagwan ram
Share on FacebookShare on X

कुछ तो बात होगी ऐसे शासक में, जिनके अपने राज्य लौट आने के उत्सव को युगों-युगों बाद भी वैभव और भव्यता से मनाया जाता है। दीपावली जो ‘अंधकार पर प्रकाश की जीत’ को दर्शाता है। परंतु दीपावली का एक और पक्ष भी है– ये उत्सव है एक शासक के घर लौट आने का, जिन्हें उनके राज्य से भाग्य के चक्र ने वंचित कर दिया और जिसके नगर आगमन पर सम्पूर्ण नगरवासियों ने ऐसा उत्सव मनाया कि आज भी युगों-युगों के बाद इस उत्सव को उतनी ही भव्यता के साथ मनाया जाता है जितना उस समय मनाया जाता था। कोई तो अद्भुत बात थी उन शासक में…

स्वागत है आपका TFI प्रीमियम में, इस लेख में हम आपको अवगत कराएंगे एक कथा से, कथा अयोध्या के राजकुमार, सियावर रामचन्द्र की, जो इक्ष्वाकु वंश का पदभार ग्रहण करने, 14 वर्ष का कष्टदायक वनवास झेलकर और एक धर्मयुद्ध में विजयी होकर अपने नगर अयोध्या लौट आए थे।

संबंधितपोस्ट

तुलसीदास जी की कहानी: एक ऐसे भक्त, जिन्होनें राम कथा को घर-घर पहुँचाया

राम नवमी: दक्षिण एशिया का प्रमुख त्योहार, जानें रामायण के विश्वव्यापी प्रसार की कहानी

अयोध्या में भूटान के प्रधानमंत्री का विशेष दौरा: रामलला के किए दर्शन, भारत-भूटान मित्रता को नई ऊंचाई

और लोड करें

श्रीराम के लौटने पर अयोध्यावासियों का उत्साह

अपने प्रभु श्रीराम के लोटने पर उनके स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। साफ-सफाई और स्नान-ध्यान के बाद लोगों ने अपनी दुकानों और घरों के आगे रंगोली बनानी शुरू कर दी थी। हालांकि दीपावली के एक दिन बाद अन्नकूट का आयोजन होता है, फिर भी प्रभु श्रीराम के लिए अयोध्यावासियों ने अपने घरों में विशेष पकवान तैयार किए। साथ ही हाटों में भी मिठाई के दुकानों में लगातार मिष्ठान क्रय करने वालों की भीड़ लगी रही।

लोगों ने शाम को दिए जलाने के लिए दीयों को धोकर साफ किया। शाम होते ही महिलाएं और पुरुष नये वस्त्र पहनकर घरों के बाहर दीप प्रज्वलित करते दिखे। प्रभु श्रीराम के लंका विजय और उनके अयोध्या आगमन का उल्‍लास लोगों के चेहरों पर देखते ही बन रहा था।

परंतु ऐसा भी क्या किया था श्रीराम ने? वे केवल एक प्रांत के शासक ही तो थे या फिर ये कथा इससे भी आगे की थी? अयोध्यापति, सियावर रामचन्द्र केवल एक मानव मात्र होते तो उनके नगर लौटने पर ऐसा हर्षोल्लास क्यों? कुछ तो बात अवश्य थी जो केवल उस समय ही नहीं, त्रेता युग से लेकर आज भी, 2022 तक लगभग 8 लाख वर्षों से निरंतर उनके घर लोटने के दिवस को हम बड़े भव्यता से मनाते हैं, और ये मंगल ध्वनि चहुंओर गूंजती है, ‘जय रघुवंशी अयोध्यापति रामचन्द्र की जय, सियावर रामचन्द्र की जय!’

और पढ़ें- प्रत्येक भारतीय को अवश्य पढ़नी चाहिए कल्हण की महान कृति राजतरंगिणी

एक परमप्रतापी योद्धा

जिस परमप्रतापी योद्धा को दीक्षा देने में स्वयं इतिहास के दो सबसे कट्टर शत्रुओं में से एक, महर्षि विश्वामित्र एवं महर्षि वशिष्ठ दोनों समक्ष आए, उसमें कुछ तो बात रही होगी। गुरुकुल में महर्षि वशिष्ठ ने श्रीराम को पाठ पढ़ाया, तो युद्धकला की दीक्षा महर्षि विश्वामित्र ने दी, अन्यथा ताड़का जैसी राक्षसी का वध दो नन्हें किशोर कैसे करते?

परंतु भाग्य का फेर भी देखिए कि परिस्थितियां इनके पक्ष में होते हुए भी इन्हें राजगद्दी नहीं मिली। लोग राम को बहुत चाहते थे। उनकी मृदुल, जनसेवायुक्‍त भावना और न्‍यायप्रियता के कारण उनकी विशेष लोकप्रियता थी। राजा दशरथ वानप्रस्‍थ की ओर अग्रसर हो रहे थे। अत: उन्‍होंने राज्‍यभार राम को सौंपने का सोचा। जनता में भी सुखद लहर दौड़ गई की उनके प्रिय राजा, उनके प्रिय राजकुमार को राजा नियुक्‍त करने वाले हैं। राज्य नियमों के अनुसार राजा का ज्येष्ठ पुत्र ही राजा बनने का पात्र होता है अत: श्री राम का अयोध्या का राजा बनना निश्चित था। कैकेयी जिन्होंने दो बार राजा दशरथ की जान बचाई थी और दशरथ ने उन्हें यह वर दिया था कि वो जीवन के किसी भी पल में उनसे दो वर मांग सकती हैं। राम को राजा बनते हुए और भविष्य को देखते हुए कैकेयी चाहती थी कि उनका पुत्र भरत ही अयोध्या का राजा बने, इसलिए उन्होंने राजा दशरथ द्वारा राम को १४ वर्ष का वनवास दिलाया और अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राज्य मांग लिया। वचनों में बंधे राजा दशरथ को विवश होकर यह स्वीकार करना पड़ा। श्री राम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन किया। श्री राम की पत्नी देवी सीता और उनके भाई लक्ष्मण जी भी वनवास गये थे।

राम के पिता दशरथ ने रानी कैकेयी को उनकी किन्हीं दो इच्छाओं को पूरा करने का वचन (वर) दिया था। कैकेयी ने दासी मन्थरा के बहकावे में आकर इन वरों के रूप में राजा दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। पिता के वचन की रक्षा के लिए राम ने प्रसन्न मन से चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया। अब लक्ष्मण क्रोध की प्रतिमूर्ति थे, परंतु वे अपने भ्राता के लिए कुछ भी करने को तैयार थे। यहीं पर श्रीराम का प्रभाव देखिए। लोग कहते हैं कि श्रीराम नारीविरोधी थे, उन्हें कभी स्त्रियों के साथ न्याय नहीं किया, पर कोई ये उल्लेख नहीं करता कि वे कभी अपनी भार्या सीता को वन गमन का कष्ट नहीं देना चाहते थे, उसके बाद भी उन्होंने उनके साथ ये संकल्प पूर्ण करने का निर्णय किया। उनके लिए जहां उनके ‘आर्य’, वहीं वह जाएंगी।

और पढ़ें- हिंदू त्योहारों के समय हिलोरे मारने लगती है भारतीय अर्थव्यवस्था

भावुक दृष्य

सोचिए कि वह कितना भावुक दृष्य रहा होगा कि एक ओर श्रीराम की ख्याति से प्रभावित और उनके बल से परिचित उनकी प्रजा अपने राम के राजतिलक के लिए उत्साहित हो और दूसरी ओर उनके राम अपने पिता के दिए वचनों के पालन हेतु वन प्रस्थान के लिए सज्ज हों। उनके राम जिन्होंने आयोध्या के इर्द-गिर्द के तपोवन को राक्षसों के उत्पात से मुक्त करवाया था, जिन्होंने असंख्य साधुओं को मार डालने वाली ताड़का जैसी राक्षसी का अंत किया, वो राम वन गमन के लिए प्रस्तुत थे, यह उनकी प्रजा के लिए अति दुखदायी था। अपने राम को तो प्रजा ने राजा मान ही लिया था, भला वो कैसे न दुखी होती। यह राम का प्रभाव ही था कि उन्हें अपना राजा मान चुकी प्रजा अपने राजा राम के साथ वन जाने तक को तैयार हो गयी और इसके लिए वो राम के पीछे-पीछे जाने लगी। अंत में राम को पूरी प्रजा को संबोधित करना पड़ा कि वे अयोध्या लोट जाएं, राम को राजा के रूप में स्वीकार चुकी प्रजा ने राम की बात तो मान ली लेकिन वनवासी हो चुके राम को ही अपना राजा मानती रही।

परंतु श्रीराम के कष्ट वहीं पर समाप्त नहीं हुए। अरण्यकांड के अनुसार, श्रीराम ने चित्रकूट से प्रयाण किया तथा वे अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे। अत्रि ने राम की स्तुति की और उनकी पत्नी अनसूया ने सीता को पतिव्रत धर्म के मर्म समझाये। वहां से श्रीराम ने आगे प्रस्थान किया और शरभंग मुनि से भेंट की। शरभंग मुनि केवल राम के दर्शन की कामना से वहां निवास कर रहे थे अतः राम के दर्शनों की अपनी अभिलाषा पूर्ण हो जाने से योगाग्नि से अपने शरीर को जला डाला और ब्रह्मलोक को गमन किया, और आगे बढ़ने पर राम को स्थान-स्थान पर हड्डियों के ढेर दिखाई पड़े जिनके विषय में मुनियों ने राम को बताया कि राक्षसों ने अनेक मुनियों को खा डाला है और उन्हीं मुनियों की हड्डियां हैं। आज के परिप्रेक्ष्य में ये राक्षस आतंकी ही थे जिनका संहार राम करते जा रहे थे।

राम और आगे बढ़े और पथ में सुतीक्ष्ण, अगस्त्य आदि ऋषियों से भेंट करते हुए दण्डक वन में प्रवेश किया जहां पर वे जटायु से मिले। राम ने पंचवटी को अपना निवास स्थान बनाया। इसी बीच पंचवटी में विचरण करते हुए रावण की बहन शूर्पणखा की दृष्टि श्रीराम पर पड़ी और वह इतनी मोहित हुई कि उसने आकार राम से प्रणय निवेदन-किया। यहीं पर लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के नाक और कान काटने का प्रसंग आता है।

और पढ़ें- 6 बार भाग्य ने ‘सशक्त राष्ट्र’ बनने में भारत का साथ नहीं दिया परंतु एक बार वह हमारे साथ आया और…

प्रतिशोध से भरी शूर्पणखा

प्रतिशोध से भरी शूर्पणखा ने खर-दूषण से सहायता की मांग की और वह अपनी सेना के साथ लड़ने के लिए आ गया। लड़ाई में राम ने खर-दूषण और उसकी सेना का संहार कर डाला। क्या आपको ज्ञात है कि श्रीराम ने केवल नाराच बाणों की सहायता से अपने से कई गुना शक्तिशाली खर, दूषण, त्रिशिरा एवं 14000 अन्य राक्षसों की सेना का विध्वंस करने में सफलता पायी, वो भी मात्र 72 मिनटों में? अद्भुत, अविश्वसनीय उपलब्धि थी ये, जय श्री राम!

ध्यान देने योग्य यह है कि राम अपने वनगमन के बाद अलग-अलग वनों में निवास करते रहे अनेक वीरतापूर्ण कार्य किए। उनकी कीर्ति चहुंओर फैलती रही, अयोध्यावासियों तक उनके कार्य और उनकी कीर्ति अलग-अलग माध्यमों से पहुंचती रही, चाहे वो माध्यम भाट चारण हो, कवि और लेखक हों जो गा गाकर अयोध्यावासियों को राम की वीरता के किस्से बताते रहे। ऐसे में प्रजा अपने राम से और अधिक प्रभावित होती रही।

तद्पश्चात शूर्पणखा ने जाकर अपने भाई रावण से शिकायत की। रावण ने बदला लेने के लिए मारीच को स्वर्णमृग बनाकर भेजा, देवी सीता ने इस स्वर्णमृग को पाने की इच्छा राम के सामने रखी। लक्ष्मण को सीता की रक्षा की आज्ञा देकर राम स्वर्णमृग रूपी मारीच को मारने के लिए उसके पीछे चले गये। मारीच राम के हाथों मारा गया पर मरते-मरते मारीच ने राम की ध्वनि निकालकर ‘हा लक्ष्मण’ का क्रन्दन किया जिसे सुनकर सीता ने आशंकावश लक्ष्मण को राम के पास भेज दिया। लक्ष्मण के जाने के बाद अकेली देवी सीता का रावण ने छलपूर्वक हरण किया और उन्हें लंका ले गया। रास्ते में जटायु ने सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध भी किया और रावण ने तलवार के प्रहार से उसे अधमरा कर दिया।

सीताहरण से श्रीराम अत्यन्त दुःखी हुए और विलाप करने लगे। रावण ने सीता का हरणकर एक महापाप किया था। श्रीराम और लक्ष्मण देवी सीता की खोज में निकल पड़े। इनका मिलन सुग्रीव के मंत्री, और रुद्रावतार, हनुमान जी से हुआ, जिन्होंने माता सीता की रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पण करने का संकल्प ले लिया। जब जाम्बवनजी ने हनुमान को उसकी अद्वितीय शक्तियों का आभास कराया, तो वह तुरंत लंका की ओर प्रस्थान किया। जब हनुमान अशोकवाटिका में पहुंचे तो रावण सीता को धमका रहा था। रावण के जाने पर त्रिजटा ने सीता को सान्तवना दी। एकान्त होने पर हनुमान जी ने सीता माता से भेंट करके उन्हें राम की मुद्रिका दी। हनुमान ने अशोकवाटिका का विध्वंस करके रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर दिया। मेघनाथ हनुमान को नागपाश में बांध कर रावण की सभा में ले गया। रावण के प्रश्न के उत्तर में हनुमान ने अपना परिचय राम के दूत के रूप में दिया। रावण ने हनुमान की पूँछ में तेल में डूबा हुआ कपड़ा बांध कर आग लगा दिया इस पर हनुमान ने लंका का दहन कर दिया।

हनुमान सीता के पास पहुंचे। सीता ने अपनी चूड़ामणि दे कर उन्हें विदा किया। वे लौटकर समुद्र पार आकर सभी वानरों से मिले और सभी वापस सुग्रीव के पास चले गये। हनुमान के कार्य से राम अत्यन्त प्रसन्न हुये। राम वानरों की सेना के साथ समुद्रतट पर पहुँचे। उधर विभीषण ने रावण को समझाया कि राम से बैर न लें इस पर रावण ने विभीषण को अपमानित कर लंका से निकाल दिया। विभीषण राम के शरण में आ गया और राम ने उसे लंका का राजा घोषित कर दिया। राम ने समुद्र से रास्ता देने की विनती की। विनती न मानने पर राम ने क्रोध किया और उनके क्रोध से भयभीत होकर समुद्र ने स्वयं आकर राम की विनती करने के पश्चात् नल और नील के द्वारा पुल बनाने का उपाय बताया।

जाम्बवन्त जी के आदेश से नल-नील दोनों भाइयों ने वानर सेना की सहायता से समुद्र पर पुल बांध दिया। श्री राम ने रामेश्वरम की स्थापना करके भगवान शंकर की पूजा की और सेना सहित समुद्र के पार उतर गये। समुद्र के पार जाकर राम ने डेरा डाला। पुल बंध जाने और राम के समुद्र के पार उतर जाने के समाचार से रावण मन में अत्यन्त व्याकुल हुआ। मन्दोदरी के द्वारा राम से बैर न लेने के लिये समझाने पर भी रावण का अहंकार नहीं गया। इधर राम अपनी वानरसेना के साथ मेरु पर्वत पर निवास करने लगे। अंगद राम के दूत बन कर लंका में रावण के पास गये और उसे राम के शरण में आने का संदेश दिया किन्तु रावण ने नहीं माना।

शान्ति के सारे प्रयास असफल हो जाने पर युद्ध आरम्भ हो गया। लक्ष्मण और मेघनाद के मध्य घोर युद्ध हुआ। शक्तिबाण के वार से लक्ष्मण मूर्छित हो गये। उनके उपचार के लिये हनुमान सुषेण वैद्य को ले आये और संजीवनी लाने के लिये चले गये। गुप्तचर से समाचार मिलने पर रावण ने हनुमान के कार्य में बाधा के लिये कालनेमि को भेजा जिसका हनुमान ने वध कर दिया। औषधि की पहचान न होने के कारण हनुमान पूरे पर्वत को ही उठा कर वापस चले। मार्ग में हनुमान को राक्षस होने के सन्देह में भरत ने बाण मार कर मूर्छित कर दिया परन्तु यथार्थ जानने पर अपने बाण पर बैठा कर लंका भेज दिया। सही समय पर हनुमान औषधि लेकर आ गये और सुषेण के उपचार से लक्ष्मण स्वस्थ हो गये।

रावण ने युद्ध के लिये कुम्भकर्ण को जगाया। कुम्भकर्ण ने भी रावण को राम की शरण में जाने की मन्त्रणा दी, जिसमें वे निष्फल रहे, जिसके पश्चात युद्ध में कुम्भकर्ण ने राम के हाथों परमगति प्राप्त की। लक्ष्मण ने मेघनाद से युद्ध करके उसका वध कर दिया। राम और रावण के मध्य भयंकर युद्ध हुआ और अन्त में अधर्मी रावण राम के हाथों मारा गया। विभीषण को लंका का राज्य सौंप कर रामजी ने, सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पकविमान पर चढ़ कर अयोध्या के लिये प्रस्थान किया।

और पढ़ें- औरंगजेब ने जो फिल्म दिखाई उसकी ‘स्क्रिप्ट’ तो अकबर ने तैयार की थी, वो ‘महान’ नहीं ‘क्रूर’ था!

युगों-युगों के बाद भी दीपावली की धूम

ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि श्रीराम केवल एक कुशल योद्धा नहीं, अपितु पुरुषत्व का प्रतीक रहे हैं, प्रेम के पर्याय, और न्याय के स्तम्भ रहे हैं, जिनका पुनः अयोध्या आगमन उनकी विजय का प्रतीक तो था ही, उनकी प्रजा के लिए महाउत्सव था। उनके अयोध्या आने से उनके नगरवासी को विश्वास हो चुका था कि उनके वर्षों की तपस्या सुफल रही है, तभी तो आज भी युगों-युगों के बाद दीपावली धूम धाम से मनाई जाती है।

बोलो सियावर रामचन्द्र की जय!

और पढ़ें- डाकू रत्नाकर के आदिकवि वाल्मीकि जी बनने की कथा

लक्ष्मी पूजा

अब लक्ष्मी पूजा के बारे में भी बात कर लेते हैं, जिसके घर स्वच्छता हो, सुंदरता हो जिसका घर प्रकाशमय हो वैभव की देवी लक्ष्मी वहीं रुकती हैं, इस तरह कार्तिक अमावस्या को माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है और अंधेरी रात को दीप जलाकर प्रकाशमय कर दिया जाता है। ध्यान दिया होगा आपने कि माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी की भी पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी अगर किसी पर प्रसन्न हो जाएं तो उसे वैभव से परिपूर्ण कर सकती हैं लेकिन प्रश्न यह है कि कोई व्यक्ति कितना धन वैभव प्राप्त कर सकता है और कितने धन से वह संतुष्ट हो सकता है, कहीं उस पर और अधिक धन पाने की इच्छा हावी न होए। यहीं पर गणेश जी की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ किए जाने की सार्थकता दिखती है। गणेशजी बुद्धि के देवता हैं, और बिना बुद्धि के धन रखना घातक भी हो सकता है, इसके साथ ही गणेश जी संतुष्टि को दर्शाते हैं, अथाह धन अर्जित करने की धुन न सवार हो जाए इसके लिए देवी लक्ष्मी के साथ गणेशजी की पूजा की जाती है।

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें.

Tags: Bhagwan Ramअयोध्या के राजादिवालीभगवान राम
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

पासवर्ड को हिंदी में क्या कहते अर्थ एवं प्रकार 

अगली पोस्ट

खनिज क्या है  प्रकार एवं  संरक्षण के उपाय

संबंधित पोस्ट

भारत का अंतरिक्ष धमाका 2026: ISRO के गगनयान मिशन से टूटेगा अमेरिका का घमंड, पाकिस्तान और चीन रहेंगे स्तब्ध
चर्चित

भारत का अंतरिक्ष धमाका 2026: ISRO के गगनयान मिशन से टूटेगा अमेरिका का घमंड, पाकिस्तान और चीन रहेंगे स्तब्ध

3 November 2025

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO, ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विज्ञान और तकनीक में भारत किसी से पीछे नहीं है। मार्च 2026...

क्या नेताजी सचमुच 1945 में मारे गए थे? मुथुरामलिंगा थेवर और गुमनामी बाबा ने खोला रहस्य
इतिहास

क्या नेताजी का निधन सचमुच 1945 विमान हादसे में हुआ था? मुथुरामलिंगा थेवर और गुमनामी बाबा ने खोला रहस्य

31 October 2025

रहस्य जो आज भी जीवित है जब इतिहास की किताबों में लिखा गया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1945 में विमान हादसे में मरे, तो...

कांग्रेस की संघ से डर नीति पर अदालत की चोट: जनता के अधिकार कुचलने की कोशिश पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक
चर्चित

कांग्रेस की संघ से डर नीति पर अदालत की चोट: जनता के अधिकार कुचलने की कोशिश पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक

29 October 2025

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के लिए यह क्षण किसी राजनीतिक झटके से कम नहीं है। राज्य की धारवाड़ बेंच ने सरकार के उस विवादास्पद सरकारी...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05

India’s Swadesi ‘Meteor’: World’s Most Lethal BVR Missile | Gandiv| SFDR | DRDO

00:06:48

Between Rafale and AMCA; Where Does the Su-57 Fit | IAF| HAL | Wings India

00:06:10
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited