“भारत से आईफोन का निर्यात दोगुना हुआ”, आईफोन मैन्युफैक्चरिंग में कैसे आगे बढ़ रहा है भारत

आईफोन में अब चीन की बादशाहत को भारत चुनौती दे रहा है।

The next decade of iPhone manufacturing belongs to India

Source- TFI

iPhone Export India: अगर हम आपसे ये कहें कि भारत आईफोन निर्माण का हब बन रहा है। हम यह कहें कि वो समय अब काफी निकट आ गया है जब सबसे अधिक आईफोन भारत में ही बनेंगे, तो आप शायद हमारी बातों पर यकीन न करें। परंतु ऐसा ही हो रहा है। वर्तमान समय में भारत आईफोन के निर्माण के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरता हुआ दिखाई दे रहा है और आईफोन के निर्माण के मामले में अब चीन का दबदबा अंत की ओर अग्रसर है। हाल ही में ब्लूमबर्ग ने बताया है कि एपल इंक ने अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत से 2.5 अरब डॉलर से भी अधिक आईफोन का निर्यात (iPhone Export India) किया है। ये राशि पिछले वित्तीय वर्ष की कुल राशि से लगभग दोगुनी है।

जरा सोचिए, कुछ वर्षों पूर्व का समय ऐसा भी था जब हम विदेशी आईफोन खरीदते थे। परंतु अब समय से इस तरह करवट ली है कि आज न केवल भारत में आईफोन बन रहे हैं बल्कि दुनियाभर में भारत से इनका निर्यात (iPhone Export India) भी किया जा रहा हैं। आप सोच रहे होंगे भला भारत इस रेस में चीन को कैसे टक्कर दे रहा है और उसे पछाड़ने की तैयारी कर रहा है? आखिर भारत ने चीन की किस कमजोरी कड़ी को पकड़ा? आइये जानते हैं।

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चीन से बाहर निकल रही कंपनियां

देखा जाये तो एपल ने वर्ष 2017 में आईफोन एसई के साथ भारत में आईफोन के  निर्माण का कार्य आरम्भ किया था। परंतु वर्ष 2022 तक भारत में पुरानी पीढ़ी के आईफोन ही अधिकतर बनते थे। वहीं सितंबर 2022 में नए iPhone 14 को असेंबल करना शुरू किया था। भारत के आईफोन निर्माण में दो मैन्यूफैक्चरिंग पार्टनर- फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन के प्लांट कार्य कर रहे हैं। वहीं पेगाट्रॉन तीसरा पार्टनर है।

वर्तमान समय में चीन के हालात काफी खराब दिख रहे हैं। चीन में चल रही कई परेशानियों जैसे जीरो कोविड पॉलिसी, तमाम प्रदर्शन, विनिर्माण उद्योग में व्यवधान आदि के चलते वहां की सप्लाई चैन काफी प्रभावित हुई है, जिस कारण चीन के कई व्यापार में गिरावट देखने को मिल रही है। देखा जाये तो कुछ पश्चिमी टेक कंपनियां ने भी चीन से अपना मुंह मोड़ लिया हैं, जिसका लाभ भारत को मिलता दिख रहा है। क्योंकि भारत एक बड़ा बाजार होने के साथ ही व्यापार करने के लिए सुरक्षित जगह भी है।

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iPhone Export India: भारत में आईफोन का उत्पादन

वहीं डिजीटाइम्स की रिसर्च के अनुसार वर्ष 2027 तक भारत एपल के 50 प्रतिशत आईफोन का उत्पादन कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इस साल यानी 2023 के अंत तक कुल आईफोन उत्पादन का 25 प्रतिशत और 2025 तक 40 प्रतिशत तक का अनुमान लगाया जा चुका है। एपल ने बीते साल भारत में अपने नवीनतम iPhone मॉडल को असेंबल करने का कार्य आरंभ किया था। भारत आने वाले दशक में आईफोन के उत्पादन का केंद्र बनने के साथ-साथ चीन को टक्कर देने के लिए भी तैयार है।

एक समय ऐसा था जब चीन काफी बड़े स्तर पर आईफोन का उत्पादन करता था, परंतु अब स्थिति बदल रही है। तकनीकी-केंद्रित ताइवानी दैनिक समाचार पत्र डिजीटाइम्स की अनुसंधान इकाई के विश्लेषक ल्यूक लिन के अनुसार, एपल डिवाइसेस के लिए चीन को  मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी प्रमुख भूमिका खोने का खतरा है। उन्होंने उम्मीद जतायी है कि भारत और वियतनाम चीन के बाहर अपनी विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक स्थानांतरित करने के एपल के प्रयासों के “सबसे बड़े लाभार्थी” हो सकते हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप और विस्ट्रॉन कॉर्प ने मार्च 2023 को समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष के पहले नौ माह में विदेश में $1 बिलियन से अधिक आईफोन मार्क्ड उपकरणों का उत्पादन करके उन्हें बाजार तक भी पहुंचा दिया है। ब्लूमबर्ग की मानें तो पेगाट्रॉन कॉर्प जनवरी के अंत तक लगभग 500 मिलियन डॉलर के गैजेट दूसरे देशों में भेजने को भी तैयार है।

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चीन की कम होती भागीदारी

बीते माह अल जज़ीरा में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन पहले 44 से 47 प्रतिशत तक Apple के प्रोडक्ट का उत्पादन किया करता था। इसके चलते वह पहले स्थान पर था, लेकिन साल 2020 में बीजिंग की भागीदारी 41 प्रतिशत तक गिर गई थी। वहीं वर्ष 2021 में आते-आते यह आंकड़ा गिरकर 36 प्रतिशत तक पहुँच गया था। DigiTimes की एक रिपोर्ट के अनुसार, Apple और Samsung के साथ-साथ अन्य दूसरी स्मार्टफोन ब्रांड की भी चीन में अपनी संयुक्त विनिर्माण क्षमता को वर्ष 2027 तक 50 प्रतिशत तक कम करने की उम्मीद जताई जा रही है।

देखा जाये तो सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स साल 2019 के बाद से अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन निर्माण क्षमता को चीन से बाहर मुख्य रूप से वियतनाम में स्थानांतरित कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन में सैमसंग स्मार्टफोन का उत्पादन अगले पांच वर्षों में समाप्त होने का अनुमान लगाया जा रहा है, क्योंकि 2027 तक वियतनाम और भारत की असेंबली कार्य में भागीदारी क्रमशः 35 प्रतिशत से 40 प्रतिशत और 40 प्रतिशत से 45 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में आने वाले समय में भारत आईफोन निर्माण के मामलेम में चीन को मात देकर आगे निकलने वाला है।

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