108 कलाकार, 108 शिव अवतार, 108 मिनट….. महाशिवरात्रि के अवसर पर महाकुंभ में दिखा कला, आध्यात्मिकता और संगीत का अद्वितीय संगम ‘शिवा फेस्ट’

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

Shiva Fest Mahakumbh 2025

Shiva Fest Mahakumbh 2025

26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के पावन अमृत स्नान के साथ महाकुंभ 2025 का दिव्य समापन हुआ। मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक, यह महाकुंभ सनातन आस्था का अद्भुत जनप्रवाह देखने को मिला। यूपी सरकार ने अनुमान लगाया था कि इस आध्यात्मिक महायात्रा में 45 करोड़ श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे, लेकिन गंगा-यमुना-सरस्वती के इस पावन मिलन ने 65 करोड़ से अधिक भक्तों की उपस्थिति के साथ एक नया इतिहास रच दिया। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर महाकुंभ में एक और दिव्य अध्याय जुड़ा—’शिवा फेस्ट’, जिसमें कला, आध्यात्म और संगीत का त्रिवेणी संगम देखने को मिला। इस पूरे आयोजन की रूपरेखा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीवनी ‘The Monk who became Chief Minister’ के लेखक शांतनु गुप्ता ने तैयार की थी। आयोजन उनकी ही देखरेख में संपन्न हुआ। शांतनु गुप्ता कई दिनों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मेहनत कर रहे थे।

कला, आध्यात्मिकता और संगीत का अद्वितीय संगम ‘शिवा फेस्ट’

इस ऐतिहासिक कला महोत्सव में 108 कलाकारों ने 108 मिनट के भीतर भगवान शिव के 108 दिव्य स्वरूपों को भव्य कैनवास पर उकेरकर सनातन परंपरा को एक नई ऊंचाई दी। इस अनूठी उपलब्धि को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स मेंभी दर्ज किया गया, जिससे महाकुंभ 2025 का यह क्षण अविस्मरणीय बन गया। जिससे यह महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं था, बल्कि सनातन संस्कृति की अद्वितीय आभा और हिंदू सभ्यता की गौरवशाली पहचान का जीवंत प्रमाण भी बना।

 

कला, आध्यात्मिकता और संगीत का अद्वितीय संगम—’शिवा फेस्ट’

महाकुंभ 2025 के पावन अवसर पर महाशिवरात्रि के दिन परमार्थ निकेतन कैंपस में ‘शिवा फेस्ट’ का भव्य आयोजन हुआ। यह केवल एक कला महोत्सव नहीं था, बल्कि आस्था, आध्यात्म और संस्कृति का अद्भुत संगम बना। इस ऐतिहासिक आयोजन में 108 कलाकारों ने 108 मिनट के भीतर भगवान शिव के 108 दिव्य स्वरूपों को भव्य कैनवास पर उकेरते हुए एक नया कीर्तिमान रच दिया। यह उपलब्धि इतनी विशेष थी कि इसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया, जिससे यह आयोजन महाकुंभ 2025 के यादगार क्षणों में शामिल हो गया।

इस पहल का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवनीकार शंतनु गुप्ता ने किया, जबकि आयोजन का सफल संचालन पुष्कर शर्मा द्वारा किया गया। महोत्सव का शुभारंभ स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने किया, जिनके कर-कमलों से जैसे ही काउंटडाउन शुरू हुआ, पूरे परिसर में शिव भक्ति और कला का अनूठा संचार होने लगा। माहौल भक्तिमय हो उठा, मानो स्वयं शिव का आशीर्वाद इस आयोजन पर बरस रहा हो।

‘शिवा फेस्ट’ केवल एक चित्रकला प्रतियोगिता भर नहीं था, बल्कि यह आध्यात्मिकता, कला और संगीत का त्रिवेणी संगम बन गया। जब कलाकार अपनी कूची से भगवान शिव के 108 रूपों को साकार कर रहे थे, तब एक विशेष भजन संकीर्तन मंडली ने 108 मिनट तक शिव भजनों का निरंतर गायन किया। इस पवित्र माहौल में हर कोई भाव-विभोर हो गया, और संपूर्ण परिसर दिव्यता और भक्ति से आलोकित हो उठा।

108 नामों का विशेष महत्व

इस ऐतिहासिक आयोजन को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, ललित कला अकादमी और पतंजलि योगपीठ का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त था, जिससे इसका भव्य स्वरूप और अधिक प्रभावशाली बन गया। प्रसिद्ध चित्रकार करण आचार्य, जिन्होंने अपनी प्रसिद्ध पेंटिंग ‘अग्रेशन शिवा’ से पूरे देश में ख्याति अर्जित की, ने भी इस आयोजन में भाग लिया, जिससे यह फेस्ट कला प्रेमियों के लिए और भी खास बन गया।

‘शिवा फेस्ट’ में प्रसिद्ध चित्रकार करण आचार्य

‘शिवा फेस्ट’ का उद्देश्य केवल एक कला प्रदर्शनी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने और भारतीय कला एवं संस्कृति को एक नई पहचान देने का माध्यम बना। इस आयोजन में भगवान शिव के 108 नामों का विशेष महत्व रहा, क्योंकि प्रत्येक नाम शिव की अनंत शक्ति और गहरी भक्ति का प्रतीक है। कलाकारों ने अपनी कूची के माध्यम से शिव के विभिन्न रूपों को जीवंत कर, उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।

आयोजकों का लक्ष्य इस फेस्ट के माध्यम से भगवान शिव के दिव्य स्वरूपों और उनकी अलौकिक शक्ति को कला के जरिये व्यापक रूप से प्रस्तुत करना था। हर कलाकार ने अपने कैनवास पर आदियोगी, नटराज, महाकाल, भोलानाथ, रुद्र, शिव शंकर जैसे भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों को उकेरा, जिससे हर दर्शक को शिव की दिव्यता और शक्ति का अनुभव हुआ।

शिवा फेस्ट: एक ऐतिहासिक उपलब्धि और भविष्य की योजना

शिवा फेस्ट का सबसे बड़ा गौरव यह रहा कि इसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। यह पहली बार हुआ कि 108 कलाकारों ने 108 मिनट में भगवान शिव के 108 स्वरूपों को एक साथ चित्रित किया, जो भारतीय कला और आध्यात्मिकता के संगम का एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।

शांतनु गुप्ता ने इस उपलब्धि पर कहा:
“महाकुंभ में शिव के 108 रूपों को एक साथ चित्रित करना केवल एक कला उत्सव नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने वाला पवित्र अनुष्ठान है। इस आयोजन को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराना हमारी भारतीय कला और संस्कृति के लिए गर्व की बात है।”

आयोजन समन्वयक पुष्कर शर्मा ने कहा:
“शिवा फेस्ट भारतीय कला और आध्यात्मिकता का अद्वितीय संगम है। इसे भविष्य में और भी बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना है। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है, ताकि पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति और शिव भक्ति की दिव्यता को महसूस कर सके।”

परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा:
“जब कला और भक्ति एक साथ आती हैं, तो इतिहास बनता है। शिवा फेस्ट ने न केवल शिव तत्त्व का अनुपम चित्रण किया, बल्कि कलाकारों के लिए एक दिव्य साधना का माध्यम भी बना।”

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने इसे महाकुंभ का एक आत्मीय अनुभव बताते हुए कहा:
“यह आयोजन महाकुंभ की आध्यात्मिक आत्मा को और अधिक गहराई से अनुभव करने का अवसर था। यह केवल एक कला उत्सव नहीं था, बल्कि शिव भक्ति के दिव्य रंग में रंगने का एक अमृत अवसर था।”

शिवा फेस्ट के इस भव्य आयोजन ने कला, संस्कृति और भक्ति का त्रिवेणी संगम प्रस्तुत किया। इस ऐतिहासिक क्षण ने न केवल महाकुंभ 2025 को गौरवान्वित किया, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

 

 

 

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