कितना खतरनाक है Ghibli Trend?

इस ट्रेंड के लिए लोग AI के साथ ना सिर्फ अपनी फोटो शेयर कर रहे हैं बल्कि अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों की फोटो भी शेयर कर रहे हैं

गिबली आर्ट के फाउंडर मियाजाकी ने एआई जनरेटेड तस्वीरों को लेकर साल 2016 में कड़ी आलोचना की थी।

गिबली आर्ट के फाउंडर मियाजाकी ने एआई जनरेटेड तस्वीरों को लेकर साल 2016 में कड़ी आलोचना की थी।

दुनिया इन दिनों पूरी तरह से डिजिटल हो चुकी है। इस डिजटलीकरण में सबसे नई चीज है AI जिसने कई कामों को आसान कर दिया है। हालांकि, इसके बहुत से नकारात्मक पहलू भी हैं। इसके बारे में ट्रेंड के पीछे भागने वाले विचार भी नहीं करते हैं। वो अपनी निजता दांव में लगा देते हैं। AI की दुनिया में रोज कुछ न कुछ नया आता है। इस समय OpenAI ChatGPT के गिबली ट्रेंड का दौर चल रहा है। जिसमें लोग फोटो AI को देते हैं और वो उसे एक विशेष प्रकार के आर्ट में तब्दील करके वापस करता है। इसके बाद क्या… चालू हो जाता है सोशल मीडिया में शेयरिंग का दौर। बात इतने में ही नहीं थमती है। ट्रेंड के पीछे भागने की ये लत आपको खतरे में डाल रही है। आइये जानें आखिर गिबली क्या और ये कैसे ट्रेंड बन गया? ChatGPT की प्राइवेसी पॉलिसी से समझते हैं ये आपके लिए कैसे खतरा है-

गिबली आर्ट और ChatGPT का ट्रेंड

सोशल मीडिया ट्रेंड में चल रही गिबली वास्तव में एक स्टूडियो के एनीमेशन स्टाइल का एक इंटरनेट मूवमेंट है। यह स्टूडियो जापान के कोगानेई, टोक्यो में स्थित है। इसकी स्थापना 1985 में एनीमेशन निर्देशक हयाओ मियाजाकी और इसाओ ताकाहाता ने की थी। यह अपने स्टूडियो में गहरी कहानी और प्रकृति, मानवता, कल्पना और आत्म-खोज जैसे विषयों पर हाथों से आर्ट बनाते हैं। इसमें इनकी संजीदगी नजर आती है। इन्हें क्रिएटिव और खूबसूरत एनीमेशन के लिए दुनियाभर में सराहा जाता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में जानी मानी कंपनी OpenAI ने ChatGPT का GPT-4o मॉडल लॉन्च किया। इसके जरिए फोटो जनरेट की जा सकती है। GPT-4o को गिबली के कुछ प्रॉन्ट के साथ तस्वीर अपलोड करनी होती है। इसके बाद सामने आती काफी हद तक जापान के गिबली स्टूडियो की तरह बनी फोटो। GPT ने पहली फोटो कब बनाई और यह तस्वीर किसकी थी। इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है। अभी तक कितनी तस्वीरें जनरेट की गई हैं। इसे लेकर भी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, जब से ये ट्रेंड शुरू हुआ है तभी से दुनियाभर में लोग इसके पीछे अंधी भाग में दौड़ रहे हैं।

प्लैटफॉर्म हुआ डाउन

गिबली का ट्रेंड ऐसा चला की लोगों ने ChatGPT पर बाढ़ ला दी। बाढ़ ऐसी की खुद OpenAI की सांसे फूलने लगी। चैट जीपीटी, नए अपडेट स्टूडियो गिबली इमेज जनरेटर के ज्यादा यूज के चलते प्लेटफार्म डाउन हो गया। OpenAI ने फ्री फोटो जनरेट करने की सीमा तय कर दी। खुद CEO सैम अल्टमैन ने X पर पोस्ट करना पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा ‘कृपया इमेज बनाने में थोड़ा ब्रेक लें, हमारी टीम को नींद चाहिए’। उन्होंने बताया कि सर्वर पर भारी दबाव पड़ा है। हमारे GPU (ग्राफिक्स चिप्स) मेल्ट हो रहे हैं। इस कारण हम इमेज जनरेटर टेम्परेरी लिमिट लगा रहे हैं। हालांकि, इसके बाद भी ट्रेंड और उसे फॉलो करने वालों में कोई कमी नहीं आई। मिली छूट के मुताबिक हर कोई फोटो जनरेट किए जा रहा है।

स्टूडियो ने की आलोचना

गिबली आर्ट के फाउंडर मियाजाकी ने एआई जनरेटेड तस्वीरों को लेकर साल 2016 में कड़ी आलोचना की थी। गिबली ट्रेंड आने पर उनका ये वयान भी वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा था कि मैं इस तरह की चीजें देखकर रोमांचित नहीं हो सकता। मैं बेहद निराश हूं और कभी भी अपनी कला में इस तकनीक को नहीं अपनाना चाहूंगा। यह जीवन का अपमान है। मियाजाकी हयाओ का मानना है कि कला का असली सार तभी झलकता है जब इंसान अपने अनुभवों, दर्द, खुशी और संवेदनाओं से उन्हें बनाता है। एआई आधारित एनीमेशन इस गहराई से कोसों दूर है।

क्या है इस ट्रेंड के पीछे का खतरा?

गिबली ट्रेंड के बूम में आने के साथ ही इसके खतरों को लेकर चर्चा होने लगी है। OpenAI के ChatGPT 4o की मदद से Ghibli तस्वीर बनवाने के लिए AI के साथ ना सिर्फ अपनी फोटो शेयर कर रहे हैं, बल्कि अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों की फोटो भी शेयर कर रहे हैं। ऐसा करने वाले इस बात से अनजान हैं कि वह ना सिर्फ अपनी तस्वीरों का डेटा AI कंपनियों को दे रहे हैं। बल्कि, अनजाने में ही वह अपना फेशियल रिकॉग्निशन और प्राइवेसी भी उन्हें सौंप रहे हैं। इसका उपयोग कंपनी अपने व्यापारिक हितों के लिए कर रही है या आगे चलकर कर सकती है

खैर हम केवल गिबली फोटो बनाने के चक्कर में ही नहीं अपने रोजाना के अन्य डिजिटल कामों के जरिए अपना डेटा कंपनियों के हवाले कर रहे हैं। इसमें फोन अनलॉक करना और सोशल मीडिया टैगिंग जैसी सर्विस का उपयोग भी शामिल है। इसके अलावा हम सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करते समय भी कंपनी को कैमरे का एक्सेस देते हैं। इसका नतीजा ये होता है कि कंपनियां हमारे चेहरे के यूनिक डाइमेंशन्स को स्टोर करती हैं। अब हम ऊपर से OpenAI को अपनी और अपने परिवार की तस्वीर दे रहे हैं। ये ATM पिन और पासवर्ड के चोरी होने से भी ज्यादा खतरनाक है। जरा सोचिए पासवर्ड और पिन तो आप बदल सकते हैं लेकिन अगर चेहरा ही चोरी हो जाए तो आप क्या करेंगे? यही खतरा गिबली ट्रेंड के कारण और बढ़ गया है।

अरबों के बाजार में बिना भाव बिक रहे हैं हम!

पिछली कई घटनाओं के सामने आने के बाद भी हम बिना सोचे समझे किसी ट्रेंड के पीछे भागने की आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। हमारी इसी आदत के कारण कंपनियों को अरबों का फायदा हो रहा है। कुछ समय पहले Clearview AI नाम की कंपनी पर आरोप लगे थे कि उसने बिना इजाजत सोशल मीडिया, न्यूज साइट्स और पब्लिक रिकॉर्ड से 3 बिलियन फोटो जुटाकर डेटाबेस प्राइवेट कंपनियों को बेच दिया। साल 2024 में ऑस्ट्रेलियाई कंपनी Outabox का डेटा लीक होने की खबर भी आई थी। दावा किया जा रहा था कि इसमें 1.05 मिलियन लोगों के फेशियल स्कैन, ड्राइविंग लाइसेंस के साथ पते चोरी हुए थे। ये तो लीक का मामला है। कंपनियां कई बार इस डेटा को गैरकानूनी रूप से बेचने का काम भी करती हैं।

आंकड़ों को लेकर काम करने वाली एजेंसी Statista की रिपोर्ट के अनुसार, फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (Facial Recognition Technology, FRT) का बाजार 2025 में 5.73 बिलियन डॉलर के आसपास चला जाएगा। इसके बाद इसमें लगातार बढ़ोतरी होगी और ये आंकड़ा 2031 तक 14.55 बिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। मेटा और गूगल पर अपने AI मॉडल के ट्रेनिंग देने के लिए पहले भी यूजर के डेटा उपयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि OpenAI यानी ChatGPT भविष्य में अपने डेटा का उपयोग कर सकती है। क्योंकि, आप उसकी प्राइवेसी पॉलिसी को पढ़े और समझे बिना ही आपनी फोटो उसे दनादन दिए जा रहे हैं।

क्या है OpenAI की प्राइवेसी पॉलिसी?

4 नवंबर 2024 को OpenAI ने अपडेट प्राइवेसी पॉलिसी जारी की थी। कंपनी ने साफ किया था कि वो यूजर किसी डेटा को कैसे स्टोर और उपयोग करेगी। अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में OpenAI सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए यूजर के डेटा और उनके द्वारा दी गई जानकारी का उपयोग कर सकती है। कंपनी द्वारा ये भी कहा गया है कि व्यावसायिक संचालन की जरूरतों को पूरा करने के लिए यूजर के डेटा का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, शब्दों से खेलते हुए कंपनी ने यहां ‘आपकी मदद’ शब्द का उपयोग किया है। कंपनी ने कहा है कि वो अपने सहयोगियों को यूजर का डाटा शेयर कर सकती है।

इतना ही नहीं बिजनेश ट्रांसफर को लेकर कंपनी ने अपना पॉलिसी में कहा है कि रणनीतिक लेनदेन, कंपनी के पुनर्गठन, दिवालियापन की स्थिति में अगर कंपनी का हस्तानांतरण करना पड़ता है तो कंपनी के पास मौजूद डेटा भी संपत्तियों के साथ उत्तराधिकारी या सहयोगी कंपनी ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग देशों के अनुसार इस नियमों में महज थोड़ा अंतर है।

आपके पास क्या रास्ता?

अब सवाल उठता है कि तेजी से बढ़ रहे डिजिटल युग में आप औरों से पीछे रहे बिना अपनी निजता और अपने डेटा की सुरक्षा कैसे करें। तो सबसे पहले आप गिबली-गिबली खेलना बंद करें। हो सके तो कोशिश करें की ऐसे ही किसी सोशल मीडिया ट्रेंड के पीछे न भागें। कही भी अपना डेटा शेयर कर रहे हैं तो उनकी पॉलिसी के बारे में जरूर पढ़ लें। सोशल मीडिया पर हाई-रिजॉल्यूशन फोटो अपलोड करने से बचें। फेस अनलॉक की जगह पिन का यूज करें। हालांकि, ये तो फौरी उपाय है जो आप कर सकते हैं। इस समस्या से बचने के लिए आपके चेहरे के गैरकानूनी उपयोग को लेकर कड़े कानूनों और निगरानी की जरूरत है।

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