केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद ही नहीं, यकीन है कि जो इसका विरोध कर रहे थे, उनके हृदय में बदलाव होगा और वे बिल का समर्थन करेंगे।” उनकी यह टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर कटाक्ष थी, जो इस विधेयक के खिलाफ बेवजह हाय-तौबा मचा रहे हैं। जबकि, ऐसा नहीं है कि की वक्फ बोर्ड में कोई पहली बार संशोधन हो रहे हैं। इससे पहले भी कांग्रेस के राज में ही इस कानून में 2 बार यानी 1995 और 2013 संशोधन हो चुके हैं। कांग्रेस के विरोध का कारण भी इन्हीं बदलावों में छुपा है। आइये जानें आखिर साल 1995 और 2013 में कांग्रेस ने ऐसा क्या किया था जिसे बदलने के लिए मोदी सरकार 2025 में फिर से संशोधन करने जा रही है।
क्या है वक्फ का इतिहास?
‘वक्फ’ अरबी के ‘वकुफा’ शब्द से बना है। इसका अर्थ ठहरना, रोकना या निषिद्ध करना। भारत में पहले वक्फ का जिक्र मोहम्मद गौरे के समय मिलता है। हालांकि, देश में इसका कानूनी संस्थागत ढांचा 1954 में सामने आया और संसद में बिल के जरिए 1955 में वक्फ कानून बना। इसके बाद इसमें साल 1995 में कांग्रेस की नरसिंह राव सरकार में संसोधन किए गए और वक्फ को अधिक अधिकार दिए गए। इसी संशोधन के बाद से बोर्ड पर अधिकारों के बेजा इस्तेमाल के आरोप लगाने लगे। इसके बाद साल 2013 में कांग्रेस के मनमोहन राज में ही संशोधन किए गए और इसमें कुछ सुधार किए गए लेकिन ये कारगर साबित नहीं हुए। अब एक बार फिर से इसमें संशोधन होने जा रहा है।
कांग्रेस सरकार में वक्फ कानून में हुए संशोधन
साल 1955 में वक्फ कानून बना तो यह केवल वक्फ संपत्तियों का रखरखाव करता था। देश भर में इस कानून के तहत वक्फ बोर्ड बनाए गए। इसके बाद साल 1995 कांग्रेस के राज में ही कानून में बदलाव किया गया और वक्फ बोर्ड की शक्तियों में बेतहाशा बढ़ोतरी की गई। कानून में धारा 40 जोड़ी गई जिसमें वक्फ को किसी संपत्ति में दावा करने का अधिकार मिल गया। इतना ही नहीं इसमें ये भी जोड़ा गया कि विवादों को सुलझाने के लिए वक्फ ट्रिब्यूनल का गठन होगा और इसका फैसला सर्वमान्य होगा।
साल 1995 में हुए बदलावों के बाद वक्फ बोर्ड बेलगाम का हो गया। इसके बाद उसने कई संपत्तियों पर कब्जा किया। कांग्रेस को इतने में खुशी नहीं थी कि वो साल 2013 में कानून में और संशोधन ले आई। उसके जरिए वक्फ की संपत्तियों में होने वाले कब्जे और अतिक्रमण को लेकर कड़े प्रावधान किए गए। इसमें ये बात भी जोड़ी गई कि वक्फ या वक्फ ट्रिब्यूनल अपने फैसले को लागू करवाने के लिए सरकारी मशीनरी का उपयोग कर सकती है।
साल 2013 में हुए कुछ बदलावों में एक अच्छी चीज जोड़ी गई वो थी वक्फ संपत्तियों के लेखा-जोखा को डिजिटल करना। हालांकि, इसके लिए कोई कड़े प्रावधान नहीं किए गए। इस कारण ये कोई खासा प्रभावी नहीं हो पाया। ऊपर से इस संशोधन के जरिए राज्यों के बोर्ड को अधिक स्वतंत्रता दे दी गई। इसके बाद से ही इस बोर्ड में सकारात्मक बदलावों की बात होने लगी। अब 2025 में ये साकार होने जा रहा है।
साल 2013 में किए गए बदलाव के बाद वक्फ करने की अनुमति गैर मुस्लिमों को मिल गई थी। जबकि, इससे पहले कोई भी गैर मुस्लिम वक्फ नहीं करता था। 2013 के संशोधन के बाद विवाद की स्थिति बढ़ गई थी। अब 2025 के बदलाव में 2013 से पहले वाली स्थिति को बहाल कर दिया गया है। इसमें साफ किया गया है कि अपनी संपत्ति वक्फ को देने वाले के लिए न्यूनतम 5 साल इस्लाम को फॉलो करना जरूरी है। यानी अब वही व्यक्ति वक्फ कर सकता है जो कम से कम 5 साल से इस्लाम स्वीकार कर रखा है।
1995 और 2013 के संशोधन में कांग्रेस ने मुस्लिम महिलाओं के बारे में कुछ नहीं सोचा। बोर्ड या पारिवारिक संपत्ति में किसी भी तरह के उत्तराधिकार को परिभाषित नहीं किया गया। साल 2025 में वक्फ कानून में संशोधन करके मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को संरक्षित करने जा रही है। अब किसी संपत्ति को वक्फ करने से पहले महिलाओं के रजामंदी जरूरी है। यानी पारिवारिक संपत्ति में महिलाओं के उत्तराधिकार को नकारा नहीं जा सकता है।
2025 में क्या बदलाव होंगे?
साल 1955, 1995 और साल 2013 के बाद वक्फ कानून में अब 2025 में फिर से संशोधन होने जा रहे हैं। इसमें इतने सालों कांग्रेस राज में संस्था को दिए गए बेजा अधिकारों को रोकने के साथ ही संस्था को देश के अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं की तरह बनाना है। इसमें ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि महिलाओं के साथ प्रशासन के लोग भी बोर्ड में हो जिससे इसके कार्यप्रणाली पारदर्शी बने।
आर्टिकल 9 और 14 में बदलाव
बोर्ड में महिलाओं को शामिल किया जाएगा
बोर्ड में 2 गैर मुस्लिम सदस्य जोड़े जाएंगे
शिया, सुन्नी और पिछड़ा मुसलमानों को बोर्ड में स्थान दिया जाएगा
बोहरा, अगखानी के लिए अलग बोर्ड बनाए जाएंगे
सेंट्रल वक्फ काउंसिल में अब किसी धर्म के सांसद हो सकेंगे
प्रॉपर्टी को लेकर बदलाव
अब वक्फ को अपनी संपत्ति कलेक्ट्रेट में रजिस्ट्री करानी होगी
जिला कलेक्टर, सर्वे कमिश्नर का स्थान लेगा
CAG बोर्ड की संपत्ति का ऑडिट कर पाएगी
बिना कागजात के कई संपत्ति वक्फ की नहीं होगी
विवाद को लेकर
धारा-40 को खत्म कर दिया जाएगा। यानी बोर्ड किसी संपत्ति पर दावा नहीं कर पाएगा
विवाद में सरकार के फैसले तक बोर्ड को संपत्ति पर अधिकार नहीं मिलेगा
ट्रिब्यूनल के फैसले को अब कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी
कांग्रेस को क्यों हो रही दिक्कत?
वक्फ कानून और बोर्ड के ढांचों को लेकर कभी भी कांग्रेस ने सवाल नहीं उठाए हैं। जबकि, इस संस्था का ढांचा हमेशा से गैर लोकतांत्रिक रहा है। इसमें महिलाओं और पिछड़ों को स्थान नहीं दिया गया। ऊपर से 1995 और 2013 में संशोधन के बाद बोर्ड की शक्तियों में भारी इजाफा किया गया। ऐसा कांग्रेस ने अपने सेकुलर इमेज को मजबूत बनाने और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति को साधने के लिए किया। अब 2025 के संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड काफी हद तक भारत के संवैधानिक विचार के अनुरूप बनने जा रहा है। इस कारण कांग्रेस को यह बात परेशान कर रही है।
अभी क्या-क्या हुआ है?
8 अगस्त 2024 को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल लाया जाता है। इसके खिलाफ सदन से लेकर सड़क तक प्रदर्शन शुरू हो जाता है। इस कारण सरकार ने बिल को JPC के पास भेज दिए। JPC ने बिल में सुझाए गए करीब 44 में से 14 संशोधनों को उचित पाया। हालांकि, JPC में शामिल विपक्ष के सांसदों ने इन्हें नकार दिया था। 13 फरवरी 2025 को JPC की रिपोर्ट संसद में पेश हुई और 19 फरवरी 2025 को इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। अब ये बिल संसद के पटल पर है।