केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। इस बिल में 1995 के वक्फ अधिनियम के कई प्रावधानों में संशोधन का प्रावधान किया गया है। रिजिजू ने कहा कि मौजूदा वक्फ (संशोधन) विधेयक, 1995 के अधिनियम की धारा 40 को निरस्त करने का प्रस्ताव करता है क्योंकि यह बोर्ड को संपत्ति पर निर्णय लेने का अधिकार देता है। रिजिजू ने इस धारा को ‘सबसे क्रूर प्रावधान’ बताते हुए कहा कि अब इसे समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “इसने वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को अपना घोषित करने का अधिकार दिया था। अब ऐसा नहीं होगा।”
‘धारा 40 से फैला वैमनस्य’
सरकार द्वारा वक्फ के जिन प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर चर्चा की गई है उसमें वक्फ अधिनियम की धारा 40 भी शामिल है। सरकार के मुताबिक, “संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में अधिग्रहित करने और घोषित करने के लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया गया। इससे न केवल बड़ी संख्या में मुकदमे बाज़ी हुई है बल्कि समुदायों के बीच वैमनस्य भी पैदा हुआ है।”
क्या है वक्फ एक्ट 1995 की धारा 40?
वक्फ एक्ट की धारा 40 में कहा गया है–
यह निश्चय कि क्या कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है- (1) बोर्ड किसी ऐसी संपत्ति के बारे में जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह वक्फ संपत्ति है, स्वयं जानकारी संगृहीत कर सकेगा और यदि इस बाबत कोई प्रश्न उठता है कि क्या कोई विशिष्ट संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं अथवा कोई वक्फ सुन्नी वक्फ है या शिया वक्फ तो वह ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह उचित समझे, उस प्रश्न का निश्चय कर सकेगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी प्रश्न पर बोर्ड का विनिश्चय जब तक कि उसको अधिकरण द्वारा द्वारा प्रतिसंहृत या उपांतरित न कर दिया जाए, अंतिम होगा।
(3) जहां बोर्ड के पास यह विश्वास करने का कारण है कि भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) के अनुसरण में अथवा सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन या किसी अन्य अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी न्यास या सोसाइटी की कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है वहां बोर्ड, ऐसे अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी संपत्ति के बारे में जांच कर सकेगा और यदि ऐसी जांच के पश्चात् बोर्ड का समाधान हो जाता है कि ऐसी संपत्ति वक्फ संपत्ति है, तो वह, यथास्थिति, न्यास या सोसाइटी से मांग कर सकेगा कि वह ऐसी संपत्ति को इस अधिनियम के अधीन वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्ट्रीकृत कराए या इस बात का कारण बताए कि ऐसी संपत्ति को इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत क्यों नहीं किया जाए:
परंतु ऐसे सभी मामलों में, इस उपधारा के अधीन की जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई की सूचना, उस प्राधिकारी को दी जाएगी जिसके द्वारा न्यास या सोसाइटी रजिस्ट्रीकृत की गई है।
(4) बोर्ड, ऐसे हेतुक पर सम्यक् रूप से विचार करने के पश्चात् जो उपधारा (3) के अधीन जारी की गई सूचना के अनुसरण में दर्शित किया जाए, ऐसे आदेश पारित करेगा जो वह ठीक समझे, और बोर्ड द्वारा इस प्रकार किया गया आदेश अंतिम होगा जब तक कि वह किसी अधिकरण द्वारा प्रतिसंहृत या उपांतरित नहीं कर दिया जाता है।
यानी इस धारा के तहत वक्फ को यह अधिकार दे दिया गया था कि वह किसी भी संपत्ति को खुद की मानकर उसकी जांच करे और उसे अपनी संपत्ति घोषित कर दे। वक्फ बोर्ड पर इस धारा का व्यापक रूप से दुरुपयोग करने के आरोप लगे जिसके चलते मुकदमे बाज़ी हुई है और लोगों के बीच इसे लेकर असंतोष भी पनपा है।