लोकसभा में पेश होगा वक्फ संशोधन विधेयक; कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप, हंगामे के आसार

इस कानून में 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA की सरकार में भी संशोधन किया गया था

नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को बुधवार (2 अप्रैल) को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस बिल पर चर्चा के लिए लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने 8 घंटे का समय निर्धारित किया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब 1955 के वक्फ अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है इस कानून में 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA की सरकार में भी संशोधन किया गया था। बिल पर बहस के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन को 4 घंटे 40 मिनट का समय दिया गया है इस पर चर्चा के दौरान लोकसभा में हंगामे के भी आसार हैं। लोकसभा में बहस के लिए बीजेपी, कांग्रेस, जदयू, टीडीपी समेत कई पार्टियों ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर विस्तृत चर्चा चाहती है और इसमें सभी राजनीतिक दलों को अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जनता भी यह जानना चाहती है कि विभिन्न पार्टियों का इस विधेयक पर क्या रुख है। साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि विपक्ष चर्चा में शामिल नहीं होना चाहता, तो उसे रोका नहीं जा सकता

विधेयक की जरूरत और प्रस्तावित बदलाव

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि 2013 में वक्फ अधिनियम में व्यापक संशोधन किए गए थे लेकिन इसके बावजूद, कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे कि राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियां, वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और सर्वेक्षण, अतिक्रमण हटाने और वक्फ की परिभाषा को प्रभावी रूप से हल करने के लिए और सुधारों की ज़रूरत महसूस की गई। 2013 के संशोधनों को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों, वक्फ और केंद्रीय वक्फ परिषद पर गठित संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद लागू किया गया था।

इसके अलावा, सरकार वक्फ बोर्ड अधिनियम में लगभग 40 संशोधन करने की योजना बना रही है। इनमें एक महत्वपूर्ण बदलाव वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और विभिन्न मुस्लिम समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, नए विधेयक में सरकार के बोर्ड पर नियंत्रण को और मजबूत किए जाने की संभावना भी है। नए विधेयक के तहत, वक्फ अधिनियम 1995 का नाम बदलकर ‘एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995’ रखा जाएगा।

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