बिहार चुनाव से पहले सियासी जंग अब सड़कों पर उतर आई है। दरभंगा में राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा के दौरान मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहे जाने के मामले ने राजनीति में भारी हलचल मचा दी है। इस घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को पटना में जोरदार प्रदर्शन किया और कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय सदाकत आश्रम के बाहर हंगामा किया। देखते ही देखते माहौल इतना बिगड़ा कि तोड़फोड़ और पथराव तक की नौबत आ गई।
भाजपा का आरोप: देश का अपमान
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री को गाली देना केवल नरेंद्र मोदी का अपमान नहीं, बल्कि पूरे देश और लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “राहुल गांधी की मौजूदगी में मंच से प्रधानमंत्री को गाली दी गई। यह कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की असली सोच को उजागर करता है। जनता इस अपमान का जवाब वोट से देगी।” भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन करने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि चुनावी लाभ पाने के लिए कांग्रेस लगातार नकारात्मक राजनीति कर रही है और जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
कांग्रेस का पलटवार: भाजपा ने की गुंडागर्दी
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस घटना पर भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “भाजपा के कार्यकर्ताओं ने बिना किसी उकसावे के हमारे प्रदेश मुख्यालय पर हमला किया, तोड़फोड़ की और हमारी आवाज दबाने की कोशिश की। यह लोकतंत्र में अस्वीकार्य है।”
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा मुद्दों पर चुनाव लड़ने के बजाय विपक्षी दलों के दफ्तरों पर हमला कर रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सदाकत आश्रम के बाहर अशोक राजपथ जाम कर भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने कराया हालात काबू
मौके पर पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को अलग किया। पुलिस ने कहा कि झड़प और तोड़फोड़ की घटनाओं की जांच की जा रही है। फिलहाल दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को शांत करा दिया गया है, लेकिन कांग्रेस ने भाजपा पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
चुनावी असर और राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में बिहार चुनाव की राजनीति को और ज्यादा गरमा देगी। भाजपा और एनडीए इस मामले को जनता के बीच “प्रधानमंत्री का अपमान” बनाकर पेश करेंगे। इससे उन्हें ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के बीच सहानुभूति मिलने की उम्मीद है।
वहीं कांग्रेस और इंडिया गठबंधन भाजपा पर “राजनीतिक हिंसा” का आरोप लगाकर खुद को पीड़ित के तौर पर पेश करेंगे। इससे वे भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट करने का प्रयास करेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह विवाद चुनावी रैलियों और प्रचार में बार-बार गूंजेगा और दोनों ही दल इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश करेंगे।
कुल मिलाकर, दरभंगा की घटना ने बिहार में चुनावी सरगर्मी को और तेज कर दिया है। भाजपा इसे “देश और प्रधानमंत्री के अपमान” के रूप में जनता तक पहुंचाना चाहती है, जबकि कांग्रेस इसे “भाजपा की गुंडागर्दी और लोकतंत्र पर हमला” बताकर माहौल बनाने में जुटी है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार चुनाव का मुख्य नैरेटिव बन सकता है।