श्री लंका वक्त, बीते कुछ वर्षों की सबसे बड़ी और खतरनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। चक्रवात दित्वाह ने वहां तबाही मचा दी है और श्री लंका के ज्यादा इलाके मूसलधार बारिश और भारी बाढ़ की चपेट में हैं।
डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) के अनुसार, दित्वाह चक्रवात की वजह से अब तक कम अस कम 123 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 150 के क़रीब लोग लापता हैं।
इस चक्रवात की वजह से श्री लंका के ज़्यादातर हिस्सों में बीते एक हफ्ते से लगातार बारिश हो रही है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में घर और रिहाइशें तबाह हो चुकी हैं, और लाखों लोगों को घर छोड़ कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ़ पलायन करना पड़ा है। यही नहीं खाने–पीने और पशुओं के लिए चारे की दिक्कतें भी शुरू हो चुकी हैं।
द्वीप भर में व्यापक विनाश
DMC के मुताबिक़ अब तक क़रीब 45 हजार लोगों को सरकारी राहत केंद्रों में शिफ्ट किया गया है, क्योंकि बाढ़ का पानी इनके घरों में घुस चुका था। इन इलाकों में बहने वाली नदियां भी उफान पर हैं और उनका पानी कोहराम मचा रहा है, जिसके चलते नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत घर छोड़ने को कहा गया है। बाढ़ और आपदा में फँसे हुए लोगों को बचाने के लिए श्रीलंकाई सेना देशभर में तैनात की गई है, जो हेलिकॉप्टर और नावों की मदद से राहत कार्य कर रही है।
श्री लंका की मदद के लिए पहुंचा भारत– ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ शुरू
तमिल नाडु समेत भारत के कुछ हिस्सों पर भी इस तूफ़ान का असर पड़ा है, लेकिन श्री लंका में बढ़ते मानवीय संकट को देखते हुए भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया है। इस राहत अभियान के अंतर्गत श्री लंका में ज़रूरी राहत–बचाव सामग्री और लॉजिस्टिक हेल्प पहुंचाई जा रही है।
शनिवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारतीय वायुसेना का C-130J विमान लगभग 12 टन राहत सामग्री लेकर कोलंबो पहुँचा है। इसमें टेंट, तिरपाल, कंबल, हाइजीन किट्स और रेडी–टू–ईट खाद्य सामग्री शामिल हैं।
इससे पहले शुक्रवार को INS विक्रांत और INS उदयगिरि श्रीलंका पहुँचे थे और उन्होंने इस अभियान के तहत राहत सामग्री की पहली खेप वहां पहुंचाई थी।
विदेश मंत्री जयशंकर ने X पर बताया कि, “ऑपरेशन सागर बंधु शुरू हो चुका है और ये बताता है कि भारत इस संकट की घड़ी में अपने सबसे नज़दीकी समुद्री पड़ोसी के साथ मजबूती से खड़ा है।”
पीएम मोदी ने दिया पूरी मदद का भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका में हुई तबाही पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्होने भरोसा देते हुए कहा कि, ‘भारत स्थिति के अनुसार हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है।‘
उन्होंने लिखा, “हम जरूरत के अनुसार और मदद देने को तैयार हैं।”
उन्होने कहा कि ऑपरेशन ‘सागर बंधु भारत की ‘नेबर्स फर्स्ट’ और ‘विजन ओशन’ से प्रेरित है, जो श्रीलंका के रणनीतिक और मानवीय महत्व को दर्शाती है।
ऐतिहासिक स्तर की आपदा
चक्रवात दित्वाह को पिछले साल जून के बाद से अब तक का सबसे घातक तूफ़ान माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार की बाढ़ 2016 के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकती है। श्रीलंका में इस सदी की सबसे भयानक बाढ़ 2003 में आई थी, जिसमें 254 लोगों की मौत हुई थी — और अभी कई इलाकों में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है।
राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी हैं और कुछ हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान भी है, जो चिंताएं बढ़ा रहा है। ज़ाहिर है ये श्रीलंका के सामने मुश्किल समय है, लेकिन सकारात्मक संदेश ये है कि भारत जैसा पड़ोसी श्री लंका के साथ खड़ा है, जो बताता है कि श्रीलंका इस आपदा से अकेले नहीं लड़ रहा, भारत भी उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार है।
