जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को लश्कर-ए-तैयाब जैसे संगठन से संबंधित जुड़े 5 सरकारी  कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को लश्कर-ए-तैयाब जैसे संगठन से संबंधित जुड़े 5 सरकारी  कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। बता दें कि बर्खास्त किए गए आंतकियों कि पहचान मोहम्मद इशफाक, तारिक अहमद राह, बशीर अहमद मीर, फारूक अहमद भट और मोहम्मद यूसुफ के रूप में की है

 

बता दें कि साल 2021 से लेकर अब तक 85 से अधिक सरकारी कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया है। राज्य के सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, गलत तरीके से नियमों का पालन करने वाले अधिकारियों के लिए कोई सेवा नहीं दिया जाएगा। ISI संगठनों ने कश्मीर के सरकारी ढ़ांचे को कमजोर करने की कोशिश कि लेकिन इसकी सूचना मिलते ही सरकार ने सख्ती से कदम उठाया है।

 

इस संगठन ने सरकारी ढ़ांचे को कमजोर करने की कोशिश की है, सूत्रों के साथ यह खुलासा हुआ है कि संगठन युवाओं को आतंक के लिए उकसाने की कोशिश कर रहा था। इसका संपर्क पाकिस्तान के लश्कर कमांडर मोहम्मद उमीन के साथ कनेक्शन जुड़ा हुआ था। जांच में पता चला है कि गिरफ्तारी में उस स्थान पर गोला बारूद बरामद किया गया।

जम्मू कश्मीर में  कटरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को आतंक के लिए प्रेरित कर रहा था, युवाओं का दिमाग बदल रहा था, जेल में रहते हुए आतंकी ने कैदियों को कटरपंथी बनाने की कोशिश की।

लैब टेक्नीशियन ने हिज़्बुल कमांडर को पाकिस्तान भागने में मदद की

स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद राह को 2011 में संविदा पर नियुक्त किया गया था और 2016 में उसकी सेवा स्थायी हुई। उसे राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने गिरफ्तार किया, जब उसके चाचा और पूर्व हिज़्बुल मुजाहिदीन डिविजनल कमांडर अमीन बाबा को 2005 में पाकिस्तान भेजने में उसकी भूमिका निभाई थी। यह मामला 2023 में SIA को सौंपा गया था।

रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि, तारिक ने अनंतनाग में बाबा को ठहरने की व्यवस्था की और अटारी-वाघा सीमा तक उसकी यात्रा का इंतज़ाम किया। तारिक ने आतंकी को अंतराष्ट्रीय सीमा को पार कराने में मदद की थी, खुफिया जानकारी में इस बात का पता चला है कि वह लश्कर के साथ मीटिंग में शामिल होता था। इतना ही नहीं वह आतंकियों के साथ मिलकर युवाओं को देश के खिलाफ भड़काने की कोशिश करता था। जेल से रिहा होने के बाद भी वह आतंकियों के साथ लगातार संपर्क में बना रहा।

वन विभाग का कर्मचारी और पूर्व विधायक का सहयोगी भी शामिल

वन विभाग में फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट भी अमीन बाबा को पाकिस्तान भेजने की साजिश में शामिल पाया गया। 2024 में गिरफ्तार भट को पिछले साल जमानत मिल गई थी। भट के साथ जब सुरक्षा एजेंसिया जुड़ी तो जांच में पाया गया कि इसका कनेक्शन भी पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है, वह अपने सरकारी पहचान पत्र का इस्तेमाल करके अपने गाड़ी और ड्राइवर का इस्तेमाल करके आमीन बाबा को सीमा तक पहुंचाया था।

PHE विभाग में तैनात ओवरग्राउंड वर्कर

बशीर अहमद मीर को 1988 में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण (PHE) विभाग में नियुक्त किया गया था और 1996 में उसे सहायक लाइनमैन के रूप में नियमित किया गया। बाद में वह बांदीपोरा जिले के गुरेज़ इलाके में आतंकियों का ओवरग्राउंड वर्कर बन गया।

सूत्रों के अनुसार, मीर आतंकियों को रास्ता दिखाता था, लॉजिस्टिक सपोर्ट और पनाह देता था तथा सुरक्षा बलों की गतिविधियों की जानकारी साझा करता था। सितंबर 2021 में उसके घर में दो LeT आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने पर वह जांच के दायरे में आया।

“उसके घर से दो AK-47 राइफलें और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया। उसे गिरफ्तार किया गया और बाद में मेडिकल आधार पर जमानत दी गई। सरकारी सिस्टम में गहराई से घुसे ऐसे लोग, जो सरकारी वेतन लेते हुए दुश्मन की सेवा करते हैं, देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं।

अस्पताल का ड्राइवर, हिज़्बुल के लिए हथियार और पैसा पहुंचाता था

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ का कनेक्शन भी हिज़्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों के साथ पाया गया, पाकिस्तान स्थित कमांडर बशीर अहमद भट के साथ संबंध पाएं गए, यूसुफ गंदरबल जिले में हथियार और आतंकी फंड पहुंचाता था।

जुलाई 2024 में उसे अपने सहयोगी एहसान हमीद के साथ एक खेप पहुँचाते समय गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनकी गाड़ी से एक पिस्तौल, गोला-बारूद, एक ग्रेनेड और 5 लाख रुपये नकद बरामद किए।

पूछताछ में पता चला की वह पाकिस्तान की मदद कर रहा था खेप पहुंचाने में, युसूफ ने पुलिस के सामने स्वीकार किया।

इस खबर को TFIpost.om से लिया गया है।

 

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