आईआईटी मद्रास का बड़ा कमाल: रैमजेट गोले से बढ़ेगी भारतीय सेना की मारक क्षमता

सोमवार को आईआईटी मद्रास ने बताया कि उसने 155 मिमी रैमजेट-प्रेरित तोप का गोला सफलतापूर्वक तैयार कर लिया है।

आईआईटी मद्रास ने रैमजेट तकनीक से चलने वाले 155 मिमी के तोप के गोले विकसित किए हैं

आईआईटी मद्रास ने रैमजेट तकनीक से चलने वाले 155 मिमी के तोप के गोले विकसित किए हैं

आईआईटी मद्रास के स्टूडेंट ने एक बार फिर देश की सेवा में आपना योगदान दिया है, जिससे देश की सेना की सुरक्षा में वृद्धि हुई है। इससे भारतीय सेना की ताकत आगे बढ़ने वाली है।

अब सेना दुश्मनों पर पहले से ज्यादा दूर और ज्यादा प्रभावी तरीके से हमला कर सकेगी। यह संभव हो पाया है। रैमजेट तकनीक से चलने वाले नए तोप के गोले के कारण, जिसे आईआईटी मद्रास ने विकसित किया है। सोमवार को आईआईटी मद्रास ने बताया कि उसने 155 मिमी रैमजेट-प्रेरित तोप का गोला सफलतापूर्वक तैयार कर लिया है और इसके परीक्षण भी सफल रहे हैं। इस नई तकनीक से मौजूदा तोपों की मारक क्षमता लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। जो रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

आईआईटी मद्रास के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और इस परियोजना के प्रमुख पी.ए. रामकृष्ण ने बताया कि इस तकनीक की मदद से भारतीय तोपखाना अब बहुत ज्यादा दूरी तक सटीक हमला कर सकेगा। अभी आम तौर पर तोप के गोले 30 से 40 किलोमीटर की दूरी तक ही मार कर पाते हैं, लेकिन रैमजेट तकनीक के इस्तेमाल से यह दूरी काफी बढ़ जाएगी।

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इस नई तकनीक में तोप के गोले के पीछे लगने वाली पारंपरिक बेस-ब्लीड यूनिट को हटाकर उसकी जगह रैमजेट इंजन लगाया गया है। रैमजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन के साथ मिलाता है और लगातार ताकत (थ्रस्ट) पैदा करता है। इससे गोला तोप से निकलने के बाद भी अपनी रफ्तार बनाए रखता है और हवा के कारण जल्दी धीमा नहीं पड़ता। इसी वजह से यह गोला ज्यादा दूर तक जा पाता है और लक्ष्य पर गिरते समय उसकी मारक शक्ति बनी रहती है।

वर्तमान समय में अगर सेना को बहुत दूर स्थित लक्ष्य पर हमला करना होता है, तो उसे महंगी मिसाइलों का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन इस नई तकनीक के आने से भविष्य में तोप के गोले ही लंबी दूरी तक भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम होंगे जिससे लागत भी कम होगी और युद्ध के समय गोला-बारूद की उपलब्धता भी बेहतर रहेगी।

यह महत्वपूर्ण परियोजना साल 2020 में भारतीय सेना के सहयोग से शुरू की गई थी। इसे सफल बनाने के लिए कई कठिन और चरणबद्ध परीक्षण किए गए। सबसे पहले आईआईटी मद्रास में 76 मिमी की तोप पर शुरुआती परीक्षण किए गए। इसके बाद 155 मिमी प्रणालियों पर बड़े पैमाने पर परीक्षण हुए। अंत में सितंबर 2025 में महाराष्ट्र के डिओलाली स्थित आर्टिलरी स्कूल में इसके फील्ड ट्रायल किए गए, जो सफल रहे। कुल मिलाकर, रैमजेट तकनीक से चलने वाला यह नया तोप का गोला भारतीय सेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और देश को रक्षा क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा।

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