अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल के कारण भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी नियमों के तहत भारी शुल्क (टैरिफ) झेल सकते हैं।
इस बिल का नाम है “Sanctioning of Russia Act 2025”। इसके तहत अगर कोई देश जानबूझकर रूस से यूरेनियम या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदता है, तो उस पर अमेरिका में 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस बिल से अवगत है। भारत वैश्विक बाजार और ऊर्जा की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बना रहा है ताकि 1.4 अरब लोगों को सस्ते दाम पर ऊर्जा मिलती रहे।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। भारत- अमेरिका दोनों सरकारें संतुलित और आपसी लाभकारी समझौते के लिए बातचीत में लगी हैं।
वाणिज्य सचिव और अमेरिकी मंत्री की बातें
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ टैरिफ कम करने के लिए शुरुआती फ्रेमवर्क डील को अंतिम रूप देने के बहुत करीब है।
वहीं, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को कॉल नहीं किया।
ट्रंप ने क्या कहा
ट्रंप ने कहा कि भारत पर 50% शुल्क लगाया गया है, जिसमें रूस से तेल की खरीद पर 25% शुल्क शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी अब रूस से तेल के व्यापार को काफी हद तक कम कर चुके हैं।
संसद की समिति
भारत की संसद की वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ के प्रभाव का अध्ययन कर रही है। समिति यह जानने की कोशिश कर रही है कि किस तरह भारतीय उत्पाद और व्यवसाय अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होंगे और इसके नकारात्मक असर को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
समिति ने विशाखापत्तनम, चेन्नई और कोयंबटूर का दौरा किया और विभिन्न व्यापारिक प्रतिनिधियों से बातचीत की। इस समिति की अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य डोला सेन हैं।
