प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (27 जनवरी) को भारत–यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को “सभी समझौतों की जननी” बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोप, दोनों के लोगों और व्यवसायों के लिए बड़े अवसर खोलेगा और दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा।
नई दिल्ली में होने वाले 16वें भारत–EU शिखर सम्मेलन से पहले बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत के वैश्विक आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा, “कल यूरोपीय संघ और भारत के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहे हैं। यह समझौता भारत और यूरोप के लोगों के लिए बड़े अवसर लेकर आएगा। यह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी का बेहतरीन उदाहरण है।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक GDP का लगभग 25% और दुनिया के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। उनके अनुसार, यह समझौता वैश्विक आर्थिक ढांचे को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका और भारत व EU के बीच आपसी भरोसे को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के ये बयान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों से कुछ घंटे पहले आए। यह शिखर सम्मेलन ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि इसमें लंबे समय से चल रही FTA वार्ताओं के औपचारिक रूप से पूरा होने की घोषणा होने वाली है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि औपचारिक घोषणा मंगलवार, 27 जनवरी को की जाएगी। समझौते को लागू होने में अभी समय लगेगा, क्योंकि इसके कानूनी मसौदे की जांच (लीगल स्क्रबिंग) में 5–6 महीने लगेंगे, जिसके बाद दोनों पक्ष इसे औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता अगले साल से लागू होने की उम्मीद है।
उर्सुला वॉन डर लेयेन, जो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, ने भारत की आर्थिक प्रगति को रणनीतिक रूप से अहम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
“एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है। और इससे हम सभी को लाभ होता है।”
इस समझौते पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया आई है। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारत–EU FTA को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप, भारत के जरिए रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पाद खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से रूस–यूक्रेन युद्ध को वित्तीय मदद दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जहां भारत पर इस मुद्दे को लेकर शुल्क (टैरिफ) लगाता है, वहीं यूरोप ऐसा करके अपनी ही सुरक्षा कमजोर कर रहा है।
कुल मिलाकर, भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते को एक परिवर्तनकारी करार माना जा रहा है, जो व्यापार को नया आकार देगा, सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा।
