सोमनाथ 1000 वर्ष: मोदी ने कहा– आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता

इतिहास में सोमनाथ पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार भारतीय समाज ने इसे फिर से खड़ा किया। यह मंदिर हर पीढ़ी के संघर्ष, त्याग और आस्था का प्रतीक बन गया।

पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

सोमनाथ नाम सुनते ही भारत की आत्मा, आस्था और गौरव की अनुभूति होती है। गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की भारतीय सभ्यता, विश्वास और संघर्ष का प्रतीक है।

वर्ष 2026 सोमनाथ के इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस वर्ष सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण को 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत 8 से 11 जनवरी तक कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर के दर्शन करेंगे।

सोमनाथ का उल्लेख द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सबसे पहले आता है – “सौराष्ट्रे सोमनाथं च”, जिसका अर्थ है कि सोमनाथ को प्रथम ज्योतिर्लिंग का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, “सोमलिंगं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते”,अर्थात जो व्यक्ति सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन करता है, वह पापों से मुक्त होता है और उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर प्राचीन भारत की आध्यात्मिक शक्ति के साथ-साथ उसकी समुद्री और आर्थिक समृद्धि का भी प्रतीक था। इसी कारण इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली।

1026 का आक्रमण और त्रासदी

जनवरी 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया। इस हमले का उद्देश्य केवल लूट नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को तोड़ना था। इस आक्रमण में भारी हिंसा हुई, नगर के लोगों पर अत्याचार हुए और मंदिर को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। इससे पूरे देश का मनोबल प्रभावित हुआ। लेकिन सोमनाथ की कहानी यहीं समाप्त नहीं होती।

<blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”hi” dir=”ltr”>जय सोमनाथ!<br><br>वर्ष 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है! सोमनाथ दरअसल भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है,…</p>&mdash; Narendra Modi (@narendramodi) <a href=”https://twitter.com/narendramodi/status/2008015412387287160?ref_src=twsrc%5Etfw”>January 5, 2026</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>

बार-बार टूटा, फिर भी खड़ा हुआ

इतिहास में सोमनाथ पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार भारतीय समाज ने इसे फिर से खड़ा किया। यह मंदिर हर पीढ़ी के संघर्ष, त्याग और आस्था का प्रतीक बन गया। महारानी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान हस्तियों ने इसके पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद ने सोमनाथ का दर्शन किया और 1897 में चेन्नई में अपने भाषण में कहा कि सोमनाथ जैसे मंदिर भारत के इतिहास और राष्ट्रीय चेतना को पुस्तकों से बेहतर समझाते हैं।

आजादी के बाद पुनर्निर्माण

1947 में आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल सोमनाथ पहुंचे। मंदिर की हालत देखकर उन्होंने तुरंत इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। 11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया। दुर्भाग्य से सरदार पटेल उस समय जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना पूरा हो चुका था। इस पूरे कार्य में के.एम. मुंशी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने ‘Somanatha: The Shrine Eternal’ नामक पुस्तक लिखी, जो आज भी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज मानी जाती है।

मुंशी जी का मानना था कि भारतीय सभ्यता में जो शाश्वत है, वह कभी नष्ट नहीं हो सकता। गीता का श्लोक –
“नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि” इसी भावना को दर्शाता है। सोमनाथ इसका जीवंत उदाहरण है।

आज का सोमनाथ

आज, 1000 साल बाद भी, सोमनाथ का समुद्र उसी गर्जना के साथ लहरें उठाता है। ये लहरें याद दिलाती हैं कि चाहे कितनी बार गिराया गया हो, सोमनाथ हर बार फिर खड़ा हुआ। आक्रमणकारी इतिहास में केवल विनाश के प्रतीक बनकर रह गए, जबकि सोमनाथ आज भी आस्था, विश्वास और आशा का प्रकाश बना हुआ है। सोमनाथ हमें सिखाता है कि नफरत और कट्टरता कुछ समय के लिए नष्ट कर सकती हैं, लेकिन विश्वास, एकता और सद्भावना ही स्थायी निर्माण करते हैं। यदि सोमनाथ हजार वर्षों के आक्रमणों के बाद भी खड़ा हो सकता है, तो भारत भी अपने सभ्यतागत गौरव को पुनः प्राप्त कर सकता है।

श्री सोमनाथ महादेव के आशीर्वाद से भारत ‘विकसित भारत’ की ओर अग्रसर है, जहां प्राचीन ज्ञान और आधुनिक सोच मिलकर पूरे विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

Exit mobile version