हाल ही में New Delhi में आयोजित एआई समिट का मकसद दुनिया के सामने यह दिखाना था कि India कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में कितनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। लेकिन यह कार्यक्रम एक विवादित विरोध प्रदर्शन के कारण राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। इस घटना के बाद देशभर में बहस, विरोध-प्रदर्शन और कुछ जगहों पर झड़पें भी देखने को मिलीं, खासकर Indore में।
यह कार्यक्रम “India AI Impact Summit 2026” के नाम से जाना गया और इसका आयोजन Bharat Mandapam में किया गया था। इसमें तकनीकी विशेषज्ञ, नीति निर्माता, विदेशी प्रतिनिधि और एआई उद्योग से जुड़े बड़े अधिकारी शामिल हुए थे। कार्यक्रम का उद्देश्य एआई के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को दिखाना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना था।
लेकिन कार्यक्रम के दौरान Indian Youth Congress (IYC) के कुछ सदस्यों ने अंदर शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार, वे लोग राजनीतिक नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और उनकी सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए। खासकर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन कुछ ही देर चला, लेकिन उसने सबका ध्यान खींच लिया।
सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इस तरीके को अनुचित और देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का प्रदर्शन करना शर्मनाक है और इससे देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कई युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। चार मुख्य आयोजकों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। पुलिस ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं।
इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया। Madhya Pradesh के इंदौर शहर में युवा कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल के युवा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। बात इतनी बढ़ी कि पत्थरबाजी तक हो गई और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। दोनों पक्षों के कुछ लोग घायल भी हुए।
देश के अन्य राज्यों में भी विरोध और जवाबी विरोध प्रदर्शन हुए। सत्तारूढ़ दल के युवा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के तरीके की आलोचना की, जबकि कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताया। उनका कहना था कि यह सरकार की नीतियों के खिलाफ युवाओं की आवाज उठाने का तरीका था और इसका उद्देश्य समिट को बाधित करना नहीं था।
कुछ विपक्षी नेताओं ने भी इस प्रदर्शन के तरीके को सही नहीं माना। उनका कहना था कि विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में इस तरह का प्रदर्शन करना ठीक नहीं था।
इस घटना ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक विरोध कितना और कैसे होना चाहिए। एक तरफ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ लोग मानते हैं कि ऐसे मंचों पर देश की छवि का ध्यान रखना भी जरूरी है।
अब यह देखना बाकी है कि इस घटना का आगे राजनीति और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल, एआई समिट में हुआ यह शर्टलेस प्रदर्शन देश की राजनीति में एक चर्चित मुद्दा बन गया है।
