बांग्लादेश 12 फरवरी 2026 को अपने राष्ट्रीय चुनाव की तैयारी कर रहा है। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली नेता शेख हसीना और उनकी आवामी लीग पार्टी 2024 में सत्ता से हट गई। इसके बाद इस चुनाव में भारत, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान की भी खास रुचि है।
वर्तमान में बांग्लादेश की सरकार अस्थायी रूप से मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में है। इस महीने चुनाव में मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी के बीच है। अनुमान है कि लगभग 1.7 करोड़ लोग वोट डालेंगे।
विदेशी प्रभाव के आरोप और सफाई
चुनाव से पहले कुछ लोगों ने कहा कि विदेशी ताकतें चुनाव में हस्तक्षेप कर रही हैं। कुछ आरोप BNP पर भी लगे कि वह “भारत समर्थक” और “अमेरिका का पपेट” है। वहीं जमात-ए-इस्लामी पर अमेरिका के साथ गुप्त संबंध होने के आरोप लगे।
BNP और जमात ने इन आरोपों को झूठा बताया। दोनों दलों ने साफ किया कि वे किसी भी विदेशी ताकत के प्रभाव में नहीं आएंगे और देश के हित को ही प्राथमिकता देंगे।
अमेरिका का नजरिया: लोकतंत्र और व्यापार
अमेरिका इस चुनाव में रुचि ले रहा है और चाहता है कि चुनाव लोकतांत्रिक और निष्पक्ष हो। अमेरिका बांग्लादेश के साथ व्यापार और टैरिफ समझौते भी कर रहा है, ताकि देश वैश्विक बाज़ार में और शामिल हो सके।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दखल माना जा सकता है।
पाकिस्तान और चीन की भूमिका
पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते हाल के सालों में गर्म हुए हैं। 2024 में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने बांग्लादेश का दौरा किया और सुरक्षा और आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश की। दोनों देशों ने प्रत्यक्ष व्यापार और उड़ानें भी फिर से शुरू की हैं। चीन भी बांग्लादेश में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चुनाव से पहले चीन ने राजनीतिक नेताओं से बैठकें कीं और देश में निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कूटनीतिक संबंध बढ़ाए हैं। चीन बांग्लादेश को आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है।
भारत के लिए महत्व
बांग्लादेश भारत का सिर्फ पड़ोसी नहीं है, बल्कि सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और सांस्कृतिक संबंधों में महत्वपूर्ण साथी है। एक स्थिर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश सीमा पर शांति बनाए रखने और दक्षिण एशिया में भारत के हितों के लिए जरूरी है।
हसीना के हटने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। भारत अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत बांग्लादेश के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भारत उम्मीद करता है कि चुनाव में ऐसा सरकार आएगी जो भारत के साथ सहयोग करे और विदेशी दबाव में न आए।
घरेलू मुद्दे भी अहम
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, बांग्लादेश के घरेलू राजनीतिक मुद्दे भी चुनाव में बहुत मायने रखते हैं। 2024 के बाद राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है, कई दलों का स्वरूप बदला है और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए चिंताएं बढ़ी हैं।
इन बदलावों से तय होगा कि बांग्लादेश अंदरूनी नीतियों पर ध्यान देगा या विदेशी प्रभाव को महत्व देगा।
निष्कर्ष
2026 का बांग्लादेश चुनाव अब केवल राष्ट्रीय मामला नहीं रहा। यह वैश्विक भू-राजनीतिक केंद्र बन गया है। अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और भारत—सभी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। 12 फरवरी के चुनाव परिणाम न केवल ढाका, बल्कि पूरे क्षेत्र में असर डाल सकते हैं।
