वर्ष 2026–27 के लिए पेश किए गए केंद्रीय बजट में रक्षा, रणनीतिक क्षेत्र और अवसंरचना सबसे अधिक ध्यान में रखे जाने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे। बजट में इन क्षेत्रों से जुड़ी कई घोषणाएँ की गई हैं, जिनमें विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति-श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
रक्षा क्षेत्र: वैश्विक चुनौतियों के बीच बड़ा इज़ाफा
वित्त मंत्री ने देश का रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया है। इसमें से ₹2.19 लाख करोड़ सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर खर्च किए जाएंगे, जबकि पिछले वर्ष यह राशि ₹1.80 लाख करोड़ थी।
सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और रखरखाव (मेंटेनेंस) से जुड़े इकोसिस्टम को मजबूत करने पर बना हुआ है।
एक अहम प्रस्ताव के तहत, रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले विमान पुर्जों के निर्माण के लिए आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क (बेसिक कस्टम ड्यूटी) से छूट देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य देश में ही एमआरओ गतिविधियों को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता
बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 शुरू करने की घोषणा की गई है। इस चरण का फोकस सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री के उत्पादन, पूर्ण-स्टैक भारतीय बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) के विकास और सेमीकंडक्टर आपूर्ति-श्रंखला को मजबूत करने पर होगा।
ISM 2.0 को मौजूदा सेमीकंडक्टर पहलों का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें विनिर्माण के साथ-साथ डिजाइन क्षमताओं और सहयोगी इकोसिस्टम पर अधिक जोर दिया गया है।
महत्वपूर्ण खनिजों के संदर्भ में, बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित दुर्लभ पृथ्वी खनिज कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन कॉरिडोरों का उद्देश्य खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को एकीकृत ढांचे में लाना है।
इसके अलावा, बजट में रसायन क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए राज्यों को तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने में सहायता देने का प्रावधान भी शामिल है। यह व्यवस्था क्लस्टर-आधारित और प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आधारित होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत आवंटन बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है। यह वृद्धि उन निवेश प्रतिबद्धताओं के बाद की गई है, जो पहले के ₹22,999 करोड़ के लक्ष्य से लगभग दोगुनी हो चुकी हैं।
अवसंरचना: पूंजीगत व्यय और लॉजिस्टिक्स
वित्त वर्ष 2026–27 के लिए पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। यह राशि सड़कों, रेलवे, शहरी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
लॉजिस्टिक्स सुधारों के तहत, बजट में पूर्व से पश्चिम को जोड़ने वाले एक नए समर्पित मालवाहक कॉरिडोर का प्रस्ताव किया गया है, जो विशेष रूप से डानकुनी से सूरत तक होगा।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय जलमार्गों के विस्तार पर भी लगातार जोर दिया गया है, ताकि खनिज-समृद्ध क्षेत्रों—खासकर ओडिशा और पूर्वी भारत—को बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके।
अवसंरचना परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए, बजट में एक इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य निर्माण चरण के दौरान परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों को आंशिक रूप से कवर करना है।
