बांग्लादेश में बीएनपी की सत्ता वापसी: जानें क्या हुआ था साल 2024 में ?

अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। हालात बिगड़ने के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वे भारत आ गईं।

शेख हसीना का भारत में प्रवास और प्रत्यर्पण

शेख हसीना का भारत में प्रवास और प्रत्यर्पण

ढाका में एकबार फिर बीएनपी की वापसी हो गई है, कुछ लोगों ने  बांग्लादेश में हुए हालिया चुनावों को उन्होंने “ढोंग” और “मजाक” बताया है। वहीं, तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) करीब 20 साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है। पिछली बार तारिक रहमान की मां खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनी थीं।

शेख हसीना क्यों हैं भारत में?

दरअसल  साल 2024 के अगस्त महीने में बंग्लादेश में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला,  छात्र आंदोलन के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। हालात बिगड़ने के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वे भारत आ गईं। तब से वे नई दिल्ली में रह रही हैं। वे सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई देती हैं, हालांकि समय-समय पर बयान जारी करती रही हैं।

जनवरी 2026 में उन्होंने दिल्ली से एक संबोधन दिया, जिसमें अंतरिम सरकार का विरोध करते हुए लोगों से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की। उस समय बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस कर रहे थे।

मौत की सजा और प्रत्यर्पण की मांग

नवंबर 2025 में बांग्लादेश की एक ट्रिब्यूनल अदालत ने छात्र आंदोलन के दौरान हिंसक कार्रवाई के मामले में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई। इसके बाद बांग्लादेश सरकार और कई राजनीतिक दलों ने भारत से उन्हें वापस भेजने की मांग की।

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि जिन लोगों को मानवाधिकार उल्लंघन जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया है, उन्हें शरण देना न्याय के खिलाफ है। बांग्लादेश ने भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण समझौते के तहत हसीना की वापसी की औपचारिक प्रक्रिया भी शुरू की है।

बीएनपी नेताओं का कहना है कि यह केवल कानूनी मामला नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता का मुद्दा भी है। उनका मानना है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते “शेख हसीना से आगे” बढ़ने चाहिए।

भारत का क्या रुख है?

भारत ने अदालत के फैसले पर कहा कि उसने इस पर ध्यान दिया है, लेकिन आगे क्या होगा यह फैसला शेख हसीना को करना है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 2025 में एक कार्यक्रम में कहा था कि शेख हसीना “कुछ विशेष परिस्थितियों में” भारत आई थीं और आगे का निर्णय काफी हद तक उन्हीं पर निर्भर करता है।

आगे क्या?

अब जबकि बीएनपी दोबारा सत्ता में आ रही है, माना जा रहा है कि नई सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाएगी। इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा दोनों देशों के बीच अहम राजनीतिक और कूटनीतिक विषय बना रह सकता है।

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