भारत सरकार ने कहा है कि जो विदेशी कंपनियाँ भारत में बने डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करके दुनिया भर के ग्राहकों को अपनी सेवाएँ देती हैं, उन्हें अगले 20 साल से ज़्यादा समय तक कोई टैक्स नहीं देना होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि भविष्य में टैक्स को लेकर जो डर और अनिश्चितता थी, उसे खत्म किया जा सके।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में बहुत सारे डेटा सेंटर्स बने हैं। विदेशी कंपनियों को चिंता थी कि अगर वे भारत के डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करेंगी, तो कहीं सरकार उनकी पूरी दुनिया भर की कमाई पर टैक्स न लगा दे। इसी चिंता को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026–27 के बजट में दूर किया।
उन्होंने बताया कि जो विदेशी कंपनियाँ भारत में मौजूद डेटा सेंटर्स से पूरी दुनिया को क्लाउड सेवाएँ देंगी, उन्हें 2047 तक टैक्स में छूट (टैक्स हॉलिडे) मिलेगी।
टैक्स एक्सपर्ट वैभव गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से विदेशी कंपनियों को साफ़ समझ मिल गई है और उन्हें लंबे समय तक टैक्स को लेकर कोई परेशानी नहीं होगी। अब उन्हें सिर्फ भारत में डेटा सेंटर इस्तेमाल करने की वजह से अपनी ग्लोबल कमाई पर टैक्स लगने का डर नहीं रहेगा।
आज बड़ी-बड़ी टेक कंपनियाँ भारत में तेजी से डेटा सेंटर्स बना रही हैं। गूगल ने आंध्र प्रदेश में एआई डेटा सेंटर के लिए 15 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न पहले ही अरबों डॉलर भारत में लगा चुके हैं। अडानी और रिलायंस जैसी भारतीय कंपनियाँ भी इस सेक्टर में भारी निवेश कर रही हैं।
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि डेटा सेंटर्स भारत की एक बड़ी ताकत बनेंगे और इनके ज़रिए भारत दुनिया को नई डिजिटल सेवाएँ दे सकेगा।
टैक्स हॉलिडे क्या होता है?
टैक्स हॉलिडे का मतलब है कि सरकार कुछ समय के लिए कंपनियों से टैक्स नहीं लेती या बहुत कम टैक्स लेती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कंपनियाँ निवेश करें, नए काम शुरू हों और अर्थव्यवस्था आगे बढ़े।
कंपनियों के लिए इसका मतलब होता है—
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कुछ सालों तक मुनाफे पर टैक्स नहीं देना
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खर्च कम होना और मुनाफा ज़्यादा होना
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नए निवेश में आसानी होना
भारत विदेशी कंपनियों को टैक्स हॉलिडे क्यों दे रहा है?
इसके पीछे कुछ बड़े कारण हैं:
विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए
भारत चाहता है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियाँ यहाँ लंबे समय तक निवेश करें। टैक्स छूट मिलने से उनका भरोसा बढ़ता है।
भारत को डिजिटल हब बनाने के लिए
डेटा सेंटर्स क्लाउड, एआई और डिजिटल सेवाओं के लिए बहुत ज़रूरी हैं। भारत चाहता है कि दुनिया की बड़ी डिजिटल कंपनियाँ अपना डेटा यहीं रखें।
रोज़गार और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए
डेटा सेंटर्स बनने से लोगों को नौकरी मिलती है और बिजली, इंटरनेट और दूसरी सुविधाओं का विकास होता है।
टैक्स को लेकर भरोसा देने के लिए
अब कंपनियों को यह डर नहीं रहेगा कि भविष्य में अचानक उनकी वैश्विक कमाई पर टैक्स लगा दिया जाएगा।
संक्षेप में, टैक्स हॉलिडे एक तरह की सरकारी छूट है, जिसका इस्तेमाल भारत डेटा सेंटर्स में निवेश बढ़ाने, डिजिटल ताकत मजबूत करने और दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए कर रहा है।
