भारत और फ्रांस बेंगलुरु में होने वाली मंत्रीस्तरीय वार्ता के दौरान अपने 10 साल पुराने रक्षा सहयोग समझौते को फिर से नवीनीकृत करने जा रहे हैं। इससे दोनों देशों की मजबूत रणनीतिक साझेदारी और रक्षा उद्योग में सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा।
17 फरवरी 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरु में होने वाले 6वें भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद की संयुक्त अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh और फ्रांस की सशस्त्र बल एवं पूर्व सैनिक मामलों की मंत्री Catherine Vautrin करेंगी। इस बैठक में दोनों देश रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे, खासकर रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
इस दौरान रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाने की उम्मीद है। साथ ही, ‘हैमर’ मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन के लिए एक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) समझौते पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं।
दोनों देशों की सेनाओं के बीच अधिकारियों की आपसी तैनाती को लेकर भी घोषणा होने की संभावना है। इसके अलावा, दोनों मंत्री कर्नाटक के वेमगल में टाटा एयरबस द्वारा स्थापित H125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन के उद्घाटन को वर्चुअली देखेंगे। इस सुविधा का उद्घाटन प्रधानमंत्री Narendra Modi और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron करेंगे।
भारत और फ्रांस के संबंधों में रक्षा सहयोग हमेशा से एक अहम स्तंभ रहा है। साल 2024–2025 के दौरान कई उच्चस्तरीय दौरों और बैठकों से दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती साफ नजर आई। प्रधानमंत्री मोदी जुलाई 2023 में फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस ‘बैस्टिल डे’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे, जबकि राष्ट्रपति मैक्रों 2024 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि रहे थे।
भारत और फ्रांस के बीच सैन्य सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश नियमित रूप से तीन प्रमुख संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं—थल सेनाओं के बीच ‘शक्ति’, नौसेनाओं के बीच ‘वरुणा’ और वायु सेनाओं के बीच ‘गरुड़’। इसके अलावा भी कई रक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
फ्रांस की रक्षा मंत्री बनने के बाद 12 अक्टूबर 2025 को पद संभालने के बाद यह कैथरीन वात्रां की पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले 5वां भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद 11 से 13 अक्टूबर 2023 के बीच फ्रांस में आयोजित हुआ था।
कुल मिलाकर, यह बैठक भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने और साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
