कानपुर एचडीएफसी विवाद: ‘मैं ठाकुर हूं’ वीडियो पर सफाई, कर्मचारी ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

एचडीएफसी बैंक की पनकी शाखा में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत सिंह ने बताया कि यह घटना 6 जनवरी 2026 को हुई थी और इसमें कोई ग्राहक शामिल नहीं था।

कानपुर एचडीएफसी विवाद

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कानपुर में एचडीएफसी बैंक की एक कर्मचारी का 45 सेकंड का वीडियो, जिसमें वह तीखी बहस के दौरान “मैं ठाकुर हूं” कहते हुए दिखाई दे रही हैं, सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश का कारण बन गया है। इस घटना ने जाति, कार्यस्थल आचरण और कर्मचारी सुरक्षा को लेकर बहस को फिर से हवा दे दी है। कर्मचारी आस्था सिंह ने किसी भी जातिगत मंशा से इनकार किया है और दावा किया है कि वीडियो को चुनिंदा तरीके से एडिट कर उनकी छवि खराब करने के लिए प्रसारित किया गया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

एचडीएफसी बैंक की पनकी शाखा में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत सिंह ने बताया कि यह घटना 6 जनवरी 2026 को हुई थी और इसमें कोई ग्राहक शामिल नहीं था। उनके अनुसार, विवाद पूर्व कर्मचारी ऋतु त्रिपाठी के पति ऋषि मिश्रा के साथ हुआ, जो शाखा में इस्तीफे से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने आए थे।

विभिन्न मीडिया संस्थानों से बातचीत में सिंह ने आरोप लगाया कि मिश्रा ने उनकी जाति पूछी, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और उन्हें धमकाया। उनका कहना है कि मिश्रा ने मीडिया से अपने संबंधों का हवाला देकर उन्हें नौकरी से हटवाने की धमकी दी। सिंह ने कहा, “मुझे अपमानित और डराया गया। मैंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी। मैं अपनी गरिमा के साथ किसी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं करूंगी।”

उन्होंने स्वीकार किया कि पेशेवर माहौल में उनके शब्द अनुचित थे, लेकिन उनका कहना है कि वे अत्यधिक मानसिक दबाव में बोले गए। उनके अनुसार, विवाद की शुरुआत उसी दिन पहले मिश्रा की बहन के साथ वॉशरूम उपयोग को लेकर हुए मामूली मतभेद से हुई थी। बाद में जब त्रिपाठी और उनके पति आधिकारिक दस्तावेज लेने के लिए दोबारा शाखा पहुंचे, तो मामला बढ़ गया।

सिंह ने बताया कि त्रिपाठी अपने इस्तीफे और अंतिम निपटान की प्रक्रिया तत्काल पूरी करवाना चाहती थीं और औपचारिकताओं में देरी से तनाव बढ़ा।

सीसीटीवी जांच की मांग, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो घटना का केवल एक हिस्सा दिखाता है और पूरी घटना का क्रम प्रस्तुत नहीं करता। उन्होंने कहा, “जनता ने केवल 45 सेकंड देखे हैं। बाकी कहानी गायब है।” उनका दावा है कि शाखा के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है।

उन्होंने मांग की है कि फुटेज की जांच कर उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जनवरी की घटना फरवरी में ही ऑनलाइन क्यों सामने आई, और आरोप लगाया कि इसका समय त्रिपाठी के अंतिम निपटान की प्रक्रिया पूरी होने से जुड़ा हो सकता है।

एचडीएफसी कर्मचारी ने बताया कि घटना वाले दिन ही उन्होंने बैंक प्रबंधन को औपचारिक शिकायत ईमेल की थी और अब वह वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ मानहानि सहित कानूनी कार्रवाई शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद से सिंह को तीखी आलोचना और ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। जहां कई लोग उन पर जातिगत अहंकार दिखाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न और चुनिंदा आक्रोश का मामला बता कर उनका समर्थन कर रहे हैं।

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