ओला, उबर और रैपिडो के ड्राइवर आज 6 घंटे की हड़ताल पर , जानें क्या है वजह

बता दें कि आज ओला, उबर वाले हड़ताल पर है , उनका कहना है कि आज भी किराया उनके मुताबिक तय नहीं हो रहा है , जब तक इस समस्या का समाधान नहीं होगा तब तक हड़ताल खत्म नहीं होगा।

ओला , उबर और रेपिडों का आज हड़ताल

ओला , उबर और रेपिडों का आज हड़ताल

ओला, उबर और रैपिडो जैसी राइड-हेलिंग ऐप्स के साथ काम करने वाले ड्राइवर शनिवार को देशभर में हड़ताल करने जा रहे हैं। ड्राइवरों ने कहा है कि वे छह घंटे तक ऐप बंद रखेंगे। इसे उन्होंने ऑल इंडिया ब्रेकडाउन नाम दिया है।

यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने आयोजित की है, जो देशभर के ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स का प्रतिनिधित्व करती है।

बुधवार को सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में यूनियन ने बताया कि ड्राइवर 7 फरवरी को सुबह से ऐप से लॉग-आउट करेंगे। यह विरोध अनुचित किराया तय करने की प्रक्रिया और कमजोर सरकारी नियमों के खिलाफ है।

ड्राइवर हड़ताल क्यों कर रहे हैं?

यूनियन का कहना है कि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 लागू होने के बावजूद, राइड-हेलिंग कंपनियां अब भी अपने मन से किराया तय कर रही हैं।

यूनियन ने कहा:
“2025 की गाइडलाइंस होने के बावजूद प्लेटफॉर्म मनमाने ढंग से किराया तय कर रहे हैं। हमारी मांगें साफ हैं—
न्यूनतम किराया तय किया जाए और निजी गाड़ियों का कमर्शियल इस्तेमाल बंद हो।”

TGPWU के मुताबिक, सरकार द्वारा न्यूनतम किराया तय न किए जाने से ड्राइवरों की कमाई लगातार घट रही है और उनकी आय अस्थिर हो गई है। यूनियन ने यह भी कहा कि निजी (नॉन-कमर्शियल) गाड़ियों को कमाई के लिए चलाने की अनुमति देने से लाइसेंसधारी ड्राइवरों को नुकसान होता है, जो पूरी तरह ऐप पर निर्भर हैं।

ड्राइवरों की दो मुख्य मांगें

  1. ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट सेवाओं के लिए न्यूनतम किराया तय किया जाए, जिसमें कैब, ऑटो, बाइक टैक्सी और डिलीवरी वाहन शामिल हों।
    यह किराया मान्यता प्राप्त ड्राइवर यूनियनों से बातचीत के बाद तय होना चाहिए और 2025 की गाइडलाइंस के अनुसार होना चाहिए।

  2. निजी, गैर-व्यावसायिक गाड़ियों को कमर्शियल राइड के लिए इस्तेमाल करने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, क्योंकि इससे लाइसेंसधारी ड्राइवरों की कमाई घटती है।

पहले भी हो चुके हैं विरोध

यह हड़ताल उस विरोध के करीब एक महीने बाद हो रही है, जब डिलीवरी वर्कर्स ने कम वेतन और खराब कामकाजी हालात को लेकर प्रदर्शन किया था।
31 दिसंबर जैसे व्यस्त दिन पर भी Zomato, Blinkit, Zepto, Instamart और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म प्रभावित हुए थे।

“ऑल इंडिया ब्रेकडाउन” की घोषणा

X (पहले ट्विटर) पर हड़ताल की घोषणा करते हुए यूनियन ने कहा:

“देशभर के ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स 7 फरवरी को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन करेंगे।
न कोई न्यूनतम किराया।
न कोई नियम।
बस लगातार शोषण।”

उन्होंने आगे कहा:
“लाखों ड्राइवर गरीबी में धकेले जा रहे हैं, जबकि कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं। सरकार की चुप्पी कंपनियों को खुली छूट दे रही है।”

यूनियन ने कहा कि इस हड़ताल का मकसद सरकार को मजबूर करना है ताकि वह ड्राइवर प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू करे और निष्पक्ष नियम बनाए।

गिग वर्कर्स की मुश्किलें

आर्थिक सर्वे 2025–26 (30 जनवरी को जारी) में भी गिग वर्कर्स की आय से जुड़ी समस्याओं को उजागर किया गया है।

सर्वे के मुताबिक:

सर्वे ने प्लेटफॉर्म कंपनियों के एल्गोरिदम, फीस, फैसलों में पारदर्शिता और वर्कर्स की सुरक्षा के लिए बेहतर नियमों की सिफारिश की है।

असर क्या होगा?

ड्राइवरों के छह घंटे तक ऐप बंद रखने से 7 फरवरी को कई शहरों में कैब और बाइक टैक्सी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

यह हड़ताल दिखाती है कि ऐप-आधारित ड्राइवर किराए, नियमों और अपनी कमाई को लेकर कितने परेशान हैं।

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