आरोपी निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को अमेरिका की एक संघीय अदालत में खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नुन की हत्या की असफल साजिश के मामले में दोष स्वीकार कर लिया। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में रहा है और इससे भारत-अमेरिका संबंधों पर भी सवाल उठे थे।
अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, 54 वर्षीय निखिल गुप्ता पर आरोप था कि उन्होंने गुरपतवंत सिंह पन्नुन की हत्या की साजिश रची थी। पन्नुन एक खालिस्तानी समर्थक नेता हैं और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह साजिश ‘मर्डर-फॉर-हायर’ यानी पैसे देकर हत्या करवाने की योजना के तहत रची गई थी।
शुरुआत में निखिल गुप्ता ने इन आरोपों से इनकार किया था। जून 2024 में उन्होंने अमेरिकी संघीय अदालत में खुद को निर्दोष बताया था। हालांकि, अब उन्होंने अदालत में पेश होकर हत्या के लिए सुपारी देने (मर्डर-फॉर-हायर), मर्डर-फॉर-हायर की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश जैसे गंभीर आरोपों को स्वीकार कर लिया है।
मैनहट्टन स्थित अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के अनुसार, गुप्ता ने अदालत में इन अपराधों में अपनी भूमिका को स्वीकार किया। अभियोजकों का कहना है कि साजिश को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर धन का लेन-देन और संपर्क स्थापित करने की कोशिशें की गई थीं। हालांकि यह योजना सफल नहीं हो सकी और समय रहते अमेरिकी एजेंसियों को इसकी जानकारी मिल गई।
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि आरोपों में यह दावा किया गया था कि यह साजिश भारतीय सरकारी अधिकारियों के निर्देश पर रची गई थी। हालांकि, इस संबंध में भारत सरकार पहले ही किसी भी तरह की आधिकारिक संलिप्तता से इनकार कर चुकी है।
अब गुप्ता द्वारा दोष स्वीकार किए जाने के बाद अदालत में सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस मामले में उन्हें गंभीर सजा का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका में ‘मर्डर-फॉर-हायर’ और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों को बेहद गंभीर माना जाता है।
