Assam : पीएम की असम हाईवे पर ऐतिहासिक लैंडिंग- चीन के लिए संदेश,जानें सबकुछ

आज भारत के प्रधानमंत्री उसी असम में पूरी शक्ति के साथ न सिर्फ उतरे हैं, मैसेज भी दिया है कि असम सिर्फ मुट्ठी है और उसके पीछे बाजू के रूप में पूरे देश की शक्ति है। 

असम में आपात लैंडिंग सुविधा की शुरुआत

असम में आपात लैंडिंग सुविधा की शुरुआत

एक वक्त था जब 1962 में चीन के हमले के दौरान असम को खाली कर दिया गया था। खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा था कि My heart goes out to the people of Assamनेहरू असहाय था और असम को चीन के हाथों जाते हुए देख रहे थे… लेकिन आज भारत के प्रधानमंत्री उसी असम में पूरी शक्ति के साथ न सिर्फ उतरे हैं, मैसेज भी दिया है कि असम सिर्फ मुट्ठी है और उसके पीछे बाजू के रूप में पूरे देश की शक्ति है।

बता दें कि पीएम मोदी के इस फैसले की जमकर तारीफ हो रही है, चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा से महज 300 किलोमीटर की दूरी पर भारत ने असम में एक हाईवे के हिस्से को लड़ाकू विमानों के लिए  रनवे बना दिया है, यह चीन के मुंह पर सीधा तमाचा है।

इससे  सीमा पर अपनी सैन्य क्षमता और मजबूत हो गई है। नया इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) Dibrugarh-Moran stretch पर राष्ट्रीय राजमार्ग 127 पर बना है, जिसका उद्घाटन पीएम मोदी ने किया है।

इवेंट के एक वीडियो में भारतीय वायु सेना के Sukhoi Su-30MKI और Rafale लड़ाकू विमान को एलईएफ से मोरान बाइपास पर उड़ान भरते हुए दिखाया गया, जहां पीएम मोदी के साथ बाकी सभी गेस्ट भी मौजूद थें।

 असम में स्थित इस सुविधा को पूर्वोत्तर में भारत के सैन्य ढांचे में एक रणनीतिक जोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह वायु सेना को उन क्षेत्रों में तेजी से प्रतिक्रिया देने की सुविधा देती है, जहां हाल के वर्षों में तनाव बढ़ा है।

 बता दें कि इस सुविधा को इमरजेंसी लैडिंग को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है,  अगर Dibrugarh Airport या Chabua Air Force Station किसी कारण बस उपलब्ध नहीं होगा तो इस सुविधा का इस्तेमाल किया जाएगा।

हाईवे रनवे की विशेषताएँ

  • यह 4.2 किलोमीटर लंबा मजबूत कंक्रीट का हिस्सा है, जिसे आपातकालीन रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • इसमें कोई सेंट्रल डिवाइडर नहीं है, जिससे विमान आसानी से उतार-चढ़ाव कर सकते हैं।

  • दोनों किनारों पर बाड़ लगाई गई है और अस्थायी सड़क संरचनाओं को हटा दिया गया है, ताकि संचालन सुरक्षित रहे।

  • यह सुविधा 40 टन तक के लड़ाकू विमान और 74 टन तक के परिवहन विमान का समर्थन कर सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक लैंडिंग

उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री का विमान राष्ट्रीय राजमार्ग पर मोरान में उतरा और वहीं से फिर उड़ान भरा, बजाय पास के चाबुआ एयर फोर्स स्टेशन के रनवे का उपयोग करने के। पीएमओ के अनुसार, मोदी का विमान नई दिल्ली से सुबह 7:15 बजे रवाना हुआ और 9:50 बजे चाबुआ एयर फोर्स स्टेशन पहुंचा। वहां से वह मोरान गए तो, जहां उनका विमान लगभग 10 बजे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी पर उतरा।

प्रधानमंत्री लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर की 20 मिनट की हवाई प्रदर्शनी भी देखें, और फिर C-130 विमान से सीधे गुवाहाटी के लिए उड़ान भरेंगे, जो इस क्षेत्र में पहली बार होगा।

रक्षा से परे उपयोग

हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य है, अधिकारियों ने बताया कि ELF आपदा राहत और मानवतावादी सहायता (HADR) में भी काम आएगा। असम और पूरे पूर्वोत्तर में बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा रहता है। हाईवे रनवे होने से राहत टीमें, आपूर्ति और बचाव विमान तेजी से पहुंच सकेंगे।

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