ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई की तैयारी? ट्रंप के सामने सैन्य विकल्पों पर मंथन

ईरान के खिलाफ Donald Trump कड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। The Wall Street Journal (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सामने ऐसे सैन्य विकल्प रखे गए हैं जिनमें ईरान के वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाने की योजनाएं भी शामिल हैं।

ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई की तैयारी

ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ईरान के खिलाफ कड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। The Wall Street Journal (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सामने ऐसे सैन्य विकल्प रखे गए हैं जिनमें ईरान के वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाने की योजनाएं भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि एक प्रस्ताव में कई हफ्तों तक चलने वाले हवाई हमले शामिल हैं, जिनका उद्देश्य ईरान की सत्ता और सैन्य ढांचे को कमजोर करना या गिराना हो सकता है। दूसरे विकल्पों में परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर सीधे हमले शामिल हैं।

हमले की योजनाओं पर विचार

WSJ के मुताबिक, ट्रंप को अलग-अलग सैन्य रणनीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई है। एक योजना में बड़े पैमाने पर हवाई हमले का प्रस्ताव है, जिससे ईरान की सैन्य कमान और नेतृत्व को कमजोर किया जा सके। दूसरी योजना में यूरेनियम संवर्धन केंद्रों और मिसाइल निर्माण स्थलों को निशाना बनाने की बात है।

CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना जरूरत पड़ने पर जल्द ही कार्रवाई करने के लिए तैयार है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन योजनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

बताया जा रहा है कि ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में बैठक की। इसके बावजूद, ट्रंप अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि कूटनीतिक दबाव से ईरान अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करने पर राजी हो सकता है।

जिनेवा में कूटनीतिक कोशिश

इस हफ्ते जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता में बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने चर्चा को सकारात्मक बताया, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हुआ।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन करना ईरान का कानूनी और गैर-समझौता योग्य अधिकार है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन के लिए है।

तनाव 2015 के परमाणु समझौते के बाद से बढ़ा है। यह समझौता, जिसे Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता है, ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका के बाहर निकलने के बाद कमजोर पड़ गया।

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती

रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका की मौजूदा सैन्य तैनाती 2003 में इराक पर हमले के बाद की सबसे बड़ी है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, जिनमें USS Gerald R. Ford भी शामिल है, क्षेत्र में तैनात किए गए हैं।

इतनी बड़ी तैनाती से अमेरिका लंबी अवधि तक हवाई अभियान चलाने में सक्षम हो जाता है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तैनाती दबाव बनाने और संभावित हमले की तैयारी—दोनों के लिए होती है।

रूस की चेतावनी

रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने अमेरिका पर “आग से खेलने” का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला हुआ तो इससे बड़ा परमाणु संकट पैदा हो सकता है।

रूस का कहना है कि 2015 के समझौते से अमेरिका के हटने से ही यह संकट पैदा हुआ।

क्या युद्ध करीब है?

हालांकि ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन बढ़ती सैन्य गतिविधि और ठप पड़ी कूटनीति से संकेत मिलते हैं कि हालात गंभीर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया, तो यह केवल रोकथाम की नीति नहीं बल्कि सत्ता परिवर्तन की रणनीति मानी जाएगी, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है।

फिलहाल, अमेरिका सैन्य दबाव के जरिए बातचीत में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहा है। आगे क्या होगा—नई कूटनीति या खुला संघर्ष—यह आने वाला समय तय करेगा।

अभी के लिए, पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं, क्योंकि हालात पिछले कई वर्षों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील दिखाई दे रहे हैं।

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