Four Stars of destiny…राहुल गांधी ने एक ‘अप्रकाशित’ किताब पर अच्छा खासा ‘रायता’ फैला दिया है और ‘सफाई’ के लिए जनरल नरवणे को उसमें घसीट रहे हैं

राहुल गांधी ने कहा था कि 'उन्हें विश्वास है- जनरल नरवणे झूठ नहीं बोलेंगे' लेकिन अब जब जनरल नरवणे ने कह दिया है कि पुस्तक अप्रकाशित है, तो राहुल खुद झूठे साबित हो रहे हैं

राहुल गांधी के पास यह किताब कैसे आई लोग कर रहे सवाल

राहुल गांधी संसद में जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा Four Stars of Destiny की प्रति लेकर पहुंचे थे

2 फरवरी का दिन था, लोक सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश हुए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। नेता विपक्ष राहुल गांधी अचानक एक पत्रिका लेकर पहुंचते हैं और उसमें छपी एकअप्रकाशितकिताब का अंश पढ़ते हुए हुए पीएम मोदी पर चीन के मामले में कमजोर रुख़ अपनाने का आरोप लगाते हैं।
अब सदन में नियमों के तहत किसी भी अप्रकाशित किताब कोकोटनहीं किया जा सकता, लिहाजा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें रोक दिया। लेकिन राहुल गांधी तो राहुल गांधी ठहरे, वो किसी की क्यों सुनते?

अगले ही दिन अति उत्साह में वो बकायदा एक किताब लेकर संसद पहुँच गएये दिखाने के लिए कि, “देखिए, किताब प्रकाशित हो चुकी है और संसद में उन्हें न बोलने देने के लिए सरकार कुचक्र रच रही है।
राहुल गांधी जो किताब लेकर पहुंचे थे, उनके मुताबिक वो जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा Four Stars of destiny की हार्डकवर प्रति थी।

लेकिन अति उत्साह में उन्होने यहीं एक बड़ी गड़बड़ी कर दी और पूरा विमर्श जनरल नरवणे की आत्मकथा और उसमें लिखी बातों से हट कर इस बात पर टिक गया किये प्रति राहुल गांधी को मिली कैसे?’
क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही सदन में ऑन रिकॉर्ड ये कह चुके थे  कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।

tfipost ने भी उसी दिन ये प्रश्न उठाया था और पब्लिशर के साथसाथ लेखक और राहुल गांधी से भी किताब की वैधता को लेकर सवाल पूछे थे। (उस रिपोर्ट को यहां पढ़ सकते हैं)

‘पेंगुइन’ का दावा- ‘फर्जी’ थी राहुल गांधी की प्रति

किताब की अनअथॉराइज्ड प्रतियों के लीक और ऑनलाइन सर्कुलेशन की बात सामने आते ही दिल्ली पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली। FIR दर्ज होते ही शांति के साथ बैठ कर तमाशा देख रहे ‘पेंगुइन बुक्सकी सफ़ाई भी सामने आ गई और पब्लिशर की तरफ़ से साफ़ किया गया कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई। इसका कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया। यानी न तो किताब की कोई प्रकाशित प्रति आई है और न ही डिजिटल प्रति।

अब पेंगुइन की मानें तोनेता विपक्षमहोदय या तो अवैध रूप से हासिल की गई कोई निजी प्रति लेकर संसद पहुँच गए थे, या फिर उस दिन उनके हाथ में फर्जीवाड़ा करके तैयार की गई कोई फर्जी प्रति थी, जिसे उन्होने पूरे आत्मविश्वास के साथ न सिर्फ पूरे देश को दिखाया, बल्कि ये भी बताया किदेखो विपक्ष के साथ कितना अन्याय हो रहा है?

खुद को सही साबित करने के लिए  जनरल नरवणे को लपेटने की कोशिश

पेंग्विन के मुकरने के बाद राहुल गांधी ये समझ चुके थे कि उन्होने ठीकठाक मात्रा में रायता फैला लिया है, तो उसे साफ़ करने और अपनी विश्वसनीयता बचाए रखने के लिए उन्होने जनरल नरवणे को भी इसमें घसीटने का प्रयास किया।

राहुल गांधी ने संसद के बाहर मीडिया के सामने जनरल नरवणे की एक पुरानी X पोस्ट पढ़ कर सुनाईजिसमें लिखा था  हेलो दोस्तों, मेरी किताब अब अवेलेबल है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग”।
यानी राहुल गांधी ने बड़ी चतुराई से गेंद जनरल नरवणे के पाले में डाल दी और ये दावा किया कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या फिरपेंगुइन
राहुल गांधी ने कहा,मुझे विश्वास है कि जनरल नरवणे झूठ नहीं बोलेंगे।

वैसे जनरल नरवणे की जिस पोस्ट को राहुल गांधी नेकोटकियामाफ कीजिएमिस कोट किया, उसमें कहीं भी नहीं लिखा था कि पुस्तक बाज़ार में आ चुकी है, या बिक्री के लिए उपलब्ध है। बल्कि पेंग्विन ने इसमें सिर्फप्री ऑर्डरदेने की बात कही थी, जो कि किताबों की मार्केटिंग के लिए सामान्य प्रक्रिया है और जनरल नरवणे ने पेंग्विन की इसी पोस्ट को अपने कमेंट के साथरिपोस्टकिया था।

जनरल नरवणे की इस पोस्ट को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने साझा किया था

जनरल नरवणे का राहुल गांधी को शालीन जवाब: ‘खुद ही फैलाया है, खुद ही समेटो’

दरअसल राहुल गांधी सारी मुसीबत जनरल नरवणे के सिर पर डाल कर ख़ुद बच निकलने की तरकीब लगा रहे थे, लेकिन जनरल साहब उनकी इस होशियारी को समय रहते भाँप गए और उनकी इस योजना पर पानी फेर दिया।

जनरल नरवणे ने पेंगुइन द्वारा की गई एक पोस्ट कोरिपोस्टकिया और बताया कि उनकी आत्मकथा की वही स्थिति है जो पेंगुइन द्वारा बताई गई है। यानी किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।

जनरल नरवणे ने पेंगुइन के दावे का समर्थन किया है

अब चूंकि राहुल गांधी स्वयं पूरे देश के सामने ये दावा कर चुके हैं किजनरल नरवणे झूठ नहीं बोलेंगे और उन्हें इसका भरोसा है’,  लेकिन अब जब जनरल नरवणे ने कह दिया है कि पुस्तक अप्रकाशित है, तो राहुल खुद झूठे साबित हो रहे हैं।

अब जब देश के रक्षा मंत्री, प्रकाशक और स्वयं लेखक द्वारा ये बताया जा चुका है कि पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, तो ये बात भी साफ है कि राहुल गांधी उस दिन संसद में जो प्रति लेकर पहुंचे थे वो सिर्फ एक फर्जी प्रति थी, बल्कि फर्जीवाड़ा करके तैयार की हुई पुस्तक थी। लेकिन देश के नेता विपक्ष को PM मोदी को घेरने की जल्दबाजी में न तो नियमों का ध्यान रहा और न ही नैतिकता का।

‘फर्जी’ किताब के लिए संसद का ठप होना- क्या माफी मांगेगें राहुल गांधी ?

इससे भी बड़ी विडंबना ये है कि देश का विपक्ष अपने नेता केगैरकानूनीऔरफर्जीकृत्य को आधार बना संसद की कार्यवाही को बाधित करता रहा। यहां तक कि लोक सभा में प्रधानमंत्री का भाषण तक रद्द करना पड़ा।
विपक्ष का कहना है कि उनके नेता को कथित रूप से सदन में बोलने नहीं दिया गया। लेकिन वहां वो क्या बोलना चाहते थे  एकपायरेटेडपुस्तक का पाठ ?

प्रश्न ये भी है कि क्या अब भी राहुल गांधी इसके लिए माफी मांगेंगे या रायता ही समेटते रहेंगे?

वैसे भी प्रकाशक और लेखक के स्पष्टीकरण के बाद अब वो दिल्ली पुलिस की जाँच के घेरे में भी हैं और दिलचस्प बात ये है कि ये सब उन्होने सदन के बाहर कहासुना है, जहां उन्हें विशेषाधिकार (सदन के अंदर की गई गतिविधियों पर पुलिस केस नहीं होता) के तहत कोई छूट भी नहीं मिल सकेगी।

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