तेजस Mk1-A: बन कर तैयार हैं तो फिर Air Force को सौंपे क्यों नहीं गए ? इंजन या HAL की लेट लतीफी- क्या है देरी की असली वजह ?

HAL का दावा है कि 5 Mk1-A वायु सेना को सौंपे जाने के लिए तैयार हैं, जबकि एयर फोर्स इन्हें मौजूदा स्थितियों में स्वीकार नहीं कर रही है

तेजस Mk1-A: बन कर तैया

तेजस Mk1-A: बन कर तैया

स्वदेशी तेजस Mk1A एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, क्योंकि इससे जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई है। इस तस्वीर में एक LCA Mk1A दिखाई देता है, जिसे कई डिफेंस पोर्टल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स ने साझा किया है।

इस तस्वीर में जो एयरक्राफ्ट दिख रहा है उसकी टेल पर लिखा हुआ नंबर बताता है कि ये LA5051 है।
तेजस Mk1A एयरक्राफ्ट्स के टेल नंबर LA5033 से शुरू होते हैं। इस हिसाब से तस्वीर में दिख रहा विमान 19 वां एयरफ्रेम होना चाहिए, जो कि एसेंबल हो कर तैयार है।
इसका सीधा मतलब है कि करीब 19 एयरक्राफ्ट पहले ही बन चुके हैं, यानी इस लिहाज़ से कम से कम एक पूरा स्क्वॉड्रन तैयार है।

यहीं से एक असहज लेकिन ज़रूरी सवाल खड़ा होता है।
वो ये कि- अगर ये विमान बन चुके हैं, तो फिर भारतीय वायुसेना को अब तक डिलीवर क्यों नहीं किए जा रहे हैं?

HAL
लगातार तारीख़ पर तारीख़ क्यों दे रहा है?

दरअसल एक पूरी तरह कपल किया गया एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन के नज़रिए से तो कंप्लीट माना जाता है। लेकिन भारतीय वायुसेना के नज़रिए से देखें तो जब तक कोई विमान अपनी सभी क्षमताओं को पूरी तरह प्राप्त नहीं कर लेता वो अधूरा ही रहता है और तेजस Mk1A के मामले में यही मूल समस्या है।

वायुसेना पहले ही साफ कर चुकी है कि वह मई में एक रिव्यू करेगी, और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही डिलीवरी लेना शुरू करेगी।
इसका नतीजा यह है कि तेजस Mk1A का पहला बैच, जिसे पहले मार्च 2024 में सेवा में शामिल किया जाना था, अब उसका जून या जुलाई से पहले शामिल होना मुश्किल है, वह भी तब जब सबकुछ ठीक रहे।

HAL के दावे और वायु सेना की मजबूरी 

HAL का कहना है कि पांच तेजस Mk1A विमान डिलीवरी के लिए तैयार हैं, और तस्वीर के आधार पर देखा जाए तो दस और एयरफ्रेम बन चुके हैं। HAL के मुताबिक, अब सिर्फ General Electric से इंजनों की सप्लाई ही सबसे बड़ी बाधा है।

लेकिन भारतीय वायुसेना इस दावे से सहमत नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, कई मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं, और मौजूदा कॉन्फ़िगरेशन में यह विमान ASQR — Air Staff Qualitative Requirements को पूरी तरह पूरा नहीं करता।
इसलिए वायुसेना ने साफ कर दिया है कि जब तक उसे वादे के मुताबिक़ काम पूरा करके नहीं दिया जाता तब वो डिलिवरी नहीं लेंगे।

सूत्र यह भी बताते हैं कि HAL ने वायुसेना को यह विकल्प दिया था कि वह विमान को मौजूदा स्थिति में इंडक्ट कर ले और वेपन इंटीग्रेशन व रडार से जुड़े बाकी काम बाद में पूरे कर लिए जाएं।
ऐसे उदाहरण पहले भी रहे हैं। फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल भी कुछ क्षमताओं के बिना ही सेवा में लिए गए थे, जिनमें X-Guard towed decoy भी शामिल है।

लेकिन तेजस Mk1A का मामला अलग है और इसकी वजह भी है।

दरअसल वायुसेना पहले ही इस विमान को लेकर काफी इंतज़ार कर चुकी है और तेजस को लेकर उसका रुख बिल्कुल साफ है और वो इसे पूरी तरह तैयार होने के बाद ही सर्विस में लेना चाहती है, खासकर इसलिए क्योंकि घटती स्क्वॉड्रन स्ट्रेंथ के बीच यही विमान भविष्य की फाइटर फ्लीट की ताक़त बनने वाला है।
वायु सेना के नज़रिए से देखें तो ये दृष्टिकोण गलत भी नहीं है, क्योंकि वायु सेना द्वारा पहले ही HAL को लेकर अच्छाखासा समय दिया जा चुका है।

क्या तेजस पूरी तरह कॉम्बैट रेडी नहीं है?

तेजस के साथ अस्त्र मार्क -1 (जो फ़िलहाल इसकी मुख्य BVR मिसाइल होने वाली है) की फायरिंग को लेकर दिक्कतें बताई गई थीं, लेकिन अब HAL का कहना है कि हथियारों के ट्रायल पूरे हो चुके हैं और इन्हें इजराइली रडार के साथइंटीग्रेटकिया जा चुका है।
लेकिन वायु सेना का मानना है कि इंटीग्रेशन सिर्फ हथियार लॉन्च करने तक सीमित नहीं है, रडार को बाकी सभी ऑनबोर्ड सिस्टम्स के साथ पूरी तरह तालमेल में होना चाहिए और HAL तेजस का फुल सिस्टमलेवल इंटीग्रेशन अभी नहीं कर पाया है।

दरअसल किसी भी विमान को सेवा में लेने से पहले दो अहम चरण होते हैं।
पहला: सभी टेक्निकल और इंटीग्रेशन से जुड़े मुद्दों को सुलझा लिया जाए और इसे सर्टिफाई किया जाए
दूसरा: वायुसेना द्वारा किए जाने वाले एक्सेप्टेंस ट्रायल, जिनमें एयर फोर्स एयरक्राफ्ट को उड़ा कर अच्छी तरह परखती है। इस तरह के ट्रायल्स में एक महीना तक लग सकता है

वायुसेना सूत्रों के मुताबिक, अगर HAL तेजस को पूरी तरह कंप्लीट करके दे, जो ASQR को पूरा करता हो, तो एयर फोर्स तुरंत ही एक्सेप्टेंस ट्रायल शुरू करने के लिए तैयार है। यानी वायुसेना अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार है। बल्कि उसे इन प्लेटफॉर्म्स की शिद्दत से जरूरत भी है। लेकिन उसकी शर्त साफ हैविमान पूरी तरह तैयार होने चाहिए, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त समय पहले ही दिया जा चुका है।

HAL के बयान और सवाल

HAL के अपने सार्वजनिक बयान भी विरोधाभासी नजर आते हैं। कंपनी ने कहा है कि उसके पांच तेजस मार्क-1A डिलीवरी के लिए तैयार हैं और इनमेंमेजर कॉन्ट्रैक्टेड कैपेबिलिटीज़शामिल हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यहांमेजरशब्द का इस्तेमाल किया गया है, न किसंपूर्णयाकंप्लीट। इसका सीधा अर्थ यही निकलता है कि कुछ चीज़ें अभी भी बाकीहैं।

HAL ने यह भी कहा है कि डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े मुद्दों को तेजी से सुलझाया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ऐसी कमियां अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि अगर डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े मसले अभी भी चल रहे हैं, तो विमान को पूरी तरह तैयार कैसे माना जा सकता है?

यह भी एक बड़ा सवाल है कि डिजाइन जैसी चीजें तो काफी पहले ही पहचानकर सुधार ली जानी चाहिए थीं। अगर इस चरण में आकर डिजाइन की खामियों की बात हो रही है, तो यह कहीं न कहीं तालमेल में कमी की तरफ़ भी इशारा करती है।

इंजन सप्लाई: देरी का बड़ा कारण, लेकिन इकलौती वजह नहीं

HAL ने तेजस की डिलीवरी में देरी के लिए जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा F404-IN20 इंजन की देर से सप्लाई को जिम्मेदार ठहराया है। इसमें कोई शक नहीं कि इंजन की उपलब्धता एक बड़ा फैक्टर रही है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह अकेली वजह नहीं है।

2021 में जब इन इंजनों का ऑर्डर दिया गया था, उस समय GE ने F404 इंजन की प्रोडक्शन लाइन बंद कर दी थी। इसके बाद नई प्रोडक्शन लाइन शुरू करने में कोरोना महामारी के कारण सप्लाई चेन से जुड़ी गंभीर दिक्कतें आईं।

हालात ऐसे हैं कि GE बारबार अपने कमिटमेंट पूरे करने में नाकाम रहा है, और अब तक सिर्फ पांच इंजन ही डिलीवर किए जा सके हैं। इस पूरे साल अब तक एक भी इंजन डिलीवर नहीं हुआ है, और यह स्थिति HAL के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

यही वजह है कि हाल ही में HAL चीफ ने अमेरिका का दौरा किया और GE की इंजन प्रोडक्शन फैसिलिटी का निरीक्षण किया। इस दौरे के बाद उन्होंने बताया कि GE ने मैन्युफैक्चरिंग को तेज़ करने के लिए एक अतिरिक्त प्रोडक्शन लाइन खोल दी है। इसके अलावा भारतअमेरिका ट्रेड डील भी फाइनल हो चुकी है, जिससे पेंडिंग मुद्दों को सुलझाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्वदेशीतेजसकी आगे की राह क्या है ?

फिलहाल योजना यह है कि साल के अंत तक 24 इंजनों की डिलीवरी हो सके। अगर जूनजुलाई तक 4–5 और इंजन आ जाते हैं, तो करीब 10 एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना को डिलीवर किए जा सकते हैं, क्योंकि एयरफ्रेम पहले से तैयार हैं और सिर्फ इंजन लगाए जाने हैं।
अगर GE अपने कमिटमेंट पर कायम रहता है, तो साल के अंत तक भारतीय वायुसेना के पास 24 तेजस Mk1A एयरक्राफ्ट हो सकते हैं। मौजूदा स्क्वॉड्रन स्ट्रेंथ को देखते हुए, ये विमान बेहद अहम साबित होंगे। क्योंकि जब तक Mk2 या अतिरिक्त राफेल सेवा में नहीं आ जाते, तब तक अस्त्र Mk1 और Mk2 मिसाइलों से लैस तेजस वायुसेना को ज़रूरी ऑपरेशनल क्षमता उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा।

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