तिरुपति देवस्थानम से जुड़ा एक मामला सामने आया है जिसमें साफ हो गया है कि एक बार फिर से वहां करोड़ों के घी में मिलावट हो रहा है, मामला सामने आते ही सीबीआई की अगुवाई में बनी एक विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में 36 लोगों को आरोपी बनाया है। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर तिरुपति के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की शुद्धता से समझौता किया। इस घोटाले में सप्लायर, अधिकारी और बिचौलिए शामिल बताए गए हैं।
यह मामला 2019 से 2024 के बीच का है, जब वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की सरकार थी। सितंबर 2024 में विवाद तब शुरू हुआ जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि लड्डू बनाने में इस्तेमाल घी में जानवरों की चर्बी, पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और रासायनिक पदार्थ मिलाए गए थे। उन्होंने इसे “भगवान के खिलाफ पाप” बताया और कहा कि इससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई हो सकती है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) की रिपोर्टों के आधार पर खरीद और जांच प्रक्रिया में गड़बड़ियों की बात सामने आई। 25 सितंबर 2024 को मामला दर्ज हुआ और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई। करीब 15 महीने चली जांच में 12 राज्यों में खरीद प्रक्रिया, लैब रिपोर्ट, परिवहन रिकॉर्ड और पैसों के लेनदेन की जांच की गई। जनवरी 2026 में SIT ने नेल्लोर की एसीबी कोर्ट में कई भागों वाली चार्जशीट दाखिल की।
मुख्य आरोपियों में उत्तराखंड की भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के निदेशक पोमिल जैन और विपिन जैन को मास्टरमाइंड बताया गया है। इसके अलावा TTD के कुछ पूर्व अधिकारी और अन्य डेयरी कारोबारी भी आरोपी बनाए गए हैं। जांच में सामने आया कि लगभग 68 लाख किलो मिलावटी घी पांच साल में सप्लाई किया गया। आरोप है कि फर्जी सर्टिफिकेट, नकली लैब रिपोर्ट और टेंडर में हेरफेर कर करीब ₹250 करोड़ का घोटाला किया गया। रिश्वत शेल कंपनियों और हवाला के जरिए दी गई। कई अधिकारियों पर पैसे लेकर नियमों को नजरअंदाज करने का आरोप है।
फरवरी 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। वह आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और विदेशी लेनदेन की जांच कर रही है। कुछ प्रमुख लोगों से पूछताछ हुई, लेकिन उन्हें चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाया गया। इस मामले से पूरे देश में आक्रोश फैल गया। कई धार्मिक नेताओं ने इसे आस्था के साथ गंभीर अन्याय बताया और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि पहले की लैब रिपोर्ट में जानवरों की चर्बी की पुष्टि नहीं हुई थी और मौजूदा सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठा रही है। फरवरी 2026 में एक आरोपी चिन्ना अप्पन्ना को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ।
अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है। राज्य सरकार ने खरीद और गुणवत्ता जांच प्रक्रिया में सुधार के लिए एक निगरानी समिति बनाई है। TTD ने लैब सुविधाएं बेहतर करने, डिजिटल टेंडरिंग और थर्ड-पार्टी ऑडिट लागू करने की घोषणा की है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह किसी धार्मिक संस्था से जुड़ा देश के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक है। अब सभी की नजर अदालत की कार्यवाही और आगे होने वाले सुधारों पर है।






























